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(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)
नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर मौजूद चुनौतियों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद तेज विकास दर्ज कर रही है।
शुक्रवार को जारी आरबीआई की ताजा बुलेटिन में कहा गया कि यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ हुए हालिया व्यापार समझौते और अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा भारत की विकास गति को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने में मदद करेगा।
केंद्रीय बैंक आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, नियंत्रित महंगाई दर से विकास को समर्थन देने की गुंजाइश मिलती है और साथ ही वित्तीय स्थिरता भी बनी रहती है। उन्होंने कहा, हम अर्थव्यवस्था की उत्पादक जरूरतों को पूरा करने और विकास की गति को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतक बताते हैं कि 2025-26 की तीसरी तिमाही और उसके बाद भी मजबूत विकास जारी रहने की संभावना है।
मल्होत्रा ने बुलेटिन में कहा, यूरोपीय संघ के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की दिशा में प्रगति से विकास की रफ्तार लंबे समय तक बनी रह सकती है।
भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार सुधार की दिशा में आगे बढ़ रही है। 2025-26 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है।
मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक दबावों के बीच निजी उपभोग और स्थायी निवेश ने विकास को सहारा दिया। हालांकि, शुद्ध बाहरी मांग में कमजोरी रही क्योंकि आयात, निर्यात से अधिक रहे। आपूर्ति पक्ष पर सेवा क्षेत्र के मजबूत योगदान और विनिर्माण गतिविधियों में सुधार के कारण 2025-26 में वास्तविक जीवीए वृद्धि 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
आगे चलकर 2026-27 में भी आर्थिक गतिविधियां मजबूत रहने की उम्मीद है। कृषि क्षेत्र को अच्छे जलाशय स्तर, मजबूत रबी बुवाई और फसलों की बेहतर स्थिति से समर्थन मिलेगा।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कॉरपोरेट क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन और असंगठित क्षेत्र की लगातार मजबूती से विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। निर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर मजबूत रहने की संभावना है। वहीं, घरेलू मांग के मजबूत होने से सेवा क्षेत्र में स्थिरता बनी रहेगी।
आरबीआई बुलेटिन में कहा गया है कि मांग के पक्ष से देखें, तो 2026-27 में निजी उपभोग की रफ्तार जारी रहने की उम्मीद है। बेहतर कृषि गतिविधियों और ग्रामीण श्रम बाजार की स्थिति में सुधार के चलते ग्रामीण मांग भी स्थिर बनी हुई है।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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