पिछले पांच वर्षों में ताइवान के पास चीनी सैन्य विमानों की घुसपैठ 15 गुना बढ़ी: रिपोर्ट

पिछले पांच वर्षों में ताइवान के पास चीनी सैन्य विमानों की घुसपैठ 15 गुना बढ़ी: रिपोर्ट

पिछले पांच वर्षों में ताइवान के पास चीनी सैन्य विमानों की घुसपैठ 15 गुना बढ़ी: रिपोर्ट

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IANS
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(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

ताइपे, 2 फरवरी (आईएएनएस)। ताइवान के आसपास चीनी सैन्य विमानों की घुसपैठ पिछले पांच वर्षों में करीब 15 गुना बढ़ गई है। स्थानीय मीडिया ने ताइवान की सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) के डिपार्टमेंट ऑफ चाइना अफेयर्स की एक रिपोर्ट के हवाले से यह जानकारी दी है।

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रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 में ताइवान जलडमरूमध्य में चीनी सैन्य विमानों की 380 उड़ानें दर्ज की गई थीं, जो उस समय नियमित नहीं थीं। लेकिन अब ये उड़ानें नियमित सैन्य गतिविधि का रूप ले चुकी हैं। दैनिक ताइपे टाइम्स ने बताया कि ताइवान जलडमरूमध्य अब चीन की सैन्य गतिविधियों का नियमित क्षेत्र बन गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे स्पष्ट होता है कि ताइवान जलडमरूमध्य बीजिंग की विस्तारवादी महत्वाकांक्षाओं का शुरुआती बिंदु और परीक्षण क्षेत्र बन चुका है। इसमें आरोप लगाया गया है कि चीन क्षेत्रीय ‘यथास्थिति’ को बदलने के उद्देश्य से सुनियोजित कदम उठा रहा है और उसकी सैन्य रणनीति में ताइवान सबसे अहम कड़ी है।

रिपोर्ट के अनुसार, चीनी सैन्य विमानों की गतिविधियों में तेज और लगातार वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2020 में 380 उड़ानों से बढ़कर यह संख्या 2021 में 960, 2022 में 1,738, 2023 में 4,734, 2024 में 5,107 और 2025 में 5,709 तक पहुंच गई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन अभियानों के पैमाने और गति से स्पष्ट है कि ताइवान जलडमरूमध्य चीन की तथाकथित ‘ग्रे ज़ोन’ गतिविधियों का केंद्र बन गया है, जिनका उद्देश्य ताइवान की प्रतिरोधक क्षमता को परखना, उसकी सुरक्षा संसाधनों पर दबाव बनाना और धीरे-धीरे सुरक्षा सीमाओं को आगे बढ़ाना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, बार-बार होने वाले सैन्य अभ्यासों के जरिए चीन ताइवान पर दबाव बनाने की अपनी रणनीति को आगे बढ़ा रहा है। वर्ष 2025 में चीन द्वारा किए गए बड़े सैन्य अभ्यासों में संयुक्त अभियानों, समुद्री और हवाई नाकेबंदी तथा सटीक हमलों को शामिल किया गया था।

रिपोर्ट में बताया गया कि अप्रैल 2025 में हुए ‘स्ट्रेट थंडर-2025ए’ और दिसंबर 2025 में हुए ‘जस्टिस मिशन 2025’ अभ्यासों के दौरान निर्धारित क्षेत्र बार-बार ताइवान की 12 समुद्री मील (22.2 किलोमीटर) की क्षेत्रीय समुद्री और हवाई सीमाओं के बेहद करीब पहुंच गए थे। विभाग ने चेतावनी दी कि इस तरह की गतिविधियां इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति के लिए गंभीर खतरा हैं और चीन के रणनीतिक उद्देश्य केवल ताइवान तक सीमित नहीं हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, चीन दियाओयुताई द्वीप समूह, जापान सागर, येलो सी और दक्षिण चीन सागर सहित अन्य क्षेत्रों में भी उच्च तीव्रता वाली सैन्य और अर्ध-सैन्य गतिविधियों को आगे बढ़ा रहा है। विभाग ने कहा कि 3 सितंबर 2025 को आयोजित चीन की ‘विक्ट्री डे परेड’ के जरिए उसकी सैन्य महत्वाकांक्षाओं का प्रदर्शन किया गया।

इस बीच, इसी महीने की शुरुआत में ताइवान की शीर्ष खुफिया एजेंसी ने चीन पर आईटी और मार्केटिंग कंपनियों के जरिए फर्जी समाचार वेबसाइटें बनाने, सोशल मीडिया अकाउंट संचालित करने और गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया था। इसे स्वशासित द्वीप के खिलाफ चीन की ‘कॉग्निटिव वॉरफेयर’ रणनीति का हिस्सा बताया गया है।

ताइवान के नेशनल सिक्योरिटी ब्यूरो (एनएसबी) ने 2025 में चीन द्वारा अपनाई गई ‘कॉग्निटिव वॉरफेयर’ रणनीति पर एक विश्लेषण रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में ताइवान की खुफिया एजेंसियों ने 45,000 से अधिक फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट और 23.14 लाख से ज्यादा गलत सूचनाओं की पहचान की।

एनएसबी ने कहा कि यह गलत सूचना चीनी आईटी कंपनियों द्वारा संचालित फर्जी और बॉट अकाउंट्स के माध्यम से फैलाई जा रही थी, जिन्हें चीन के सेंट्रल पब्लिसिटी डिपार्टमेंट और मिनिस्ट्री ऑफ पब्लिक सिक्योरिटी के निर्देश पर चलाया जा रहा था।

रिपोर्ट में बताया गया कि हाइशुनशे, हाइमाई और हुया जैसी मार्केटिंग कंपनियों का इस्तेमाल कर चीन समर्थक नैरेटिव फैलाने वाली फर्जी समाचार वेबसाइटें बनाई गईं। ये वेबसाइटें पहले सामान्य और आकर्षक सामग्री के जरिए पाठकों को जोड़ती हैं और बाद में राजनीतिक सामग्री के माध्यम से ताइवान के लोगों की सोच को प्रभावित करने की कोशिश करती हैं।

एनएसबी ने कहा कि इन गतिविधियों का उद्देश्य ताइवान के भीतर विभाजन पैदा करना, जनता की प्रतिरोध क्षमता को कमजोर करना, सहयोगी देशों के समर्थन को प्रभावित करना और ताइवान के लोगों के बीच चीन के पक्ष में समर्थन हासिल करना है। एजेंसी ने बताया कि वह संबंधित सरकारी विभागों, फैक्ट-चेकिंग संगठनों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर फर्जी सूचनाओं की पहचान और उन्हें हटाने के प्रयास तेज कर रही है।

--आईएएनएस

डीएससी

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