कनाडा के प्रधानमंत्री कार्नी का भारत दौरा द्विपक्षीय संबंधों के नए चरण की शुरुआत कर सकता है: रिपोर्ट

कनाडा के प्रधानमंत्री कार्नी का भारत दौरा द्विपक्षीय संबंधों के नए चरण की शुरुआत कर सकता है: रिपोर्ट

कनाडा के प्रधानमंत्री कार्नी का भारत दौरा द्विपक्षीय संबंधों के नए चरण की शुरुआत कर सकता है: रिपोर्ट

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IANS
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Johannesburg: PM Modi Meets Canada PM Mark Carney at G20 Summit

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 12 फरवरी (आईएएनएस)। भारत और कनाडा भले ही भौगोलिक रूप से जुड़े न हों और न ही किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन का हिस्सा हों, लेकिन दोनों देशों के बीच आर्थिक पूरकता और वैश्विक शासन से जुड़े साझा हित लंबे समय से संबंधों को मजबूती देते रहे हैं। एक रिपोर्ट में गुरुवार को यह बात कही गई।

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पूर्व राजनयिक संजय कुमार वर्मा ने ‘इंडिया नैरेटिव’ में प्रकाशित अपने लेख में कहा कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहे तो आने वाले दशक में भारत–कनाडा संबंध राजनीतिक उतार-चढ़ाव से आगे बढ़कर निवेश प्रवाह, ऊर्जा सहयोग, सप्लाई चेन साझेदारी और लोगों के बीच संपर्कों पर अधिक केंद्रित होंगे।

उन्होंने लिखा कि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का आगामी हफ्तों में प्रस्तावित भारत दौरा द्विपक्षीय संबंधों को स्थिरता के चरण से आगे बढ़ाकर एक संरचित विस्तार की दिशा में ले जा सकता है। इस दौरान व्यापार ढांचे, निवेश प्रवाह और दीर्घकालिक ऊर्जा एकीकरण पर विशेष जोर रहने की संभावना है।

वर्मा के अनुसार, व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते के लिए ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ को अंतिम रूप देने की दिशा में प्रगति दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को संस्थागत रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। उन्होंने कहा कि कनाडा में भारतीय फार्मास्यूटिकल्स, डिजिटल सेवाओं, इंजीनियरिंग उत्पादों और परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों के लिए नियामकीय सहूलियत बढ़ने से भारतीय निर्यात को बड़ा बाजार मिल सकता है।

इसके बदले में भारत भी ऊर्जा संसाधन, पोटाश, दालें, लकड़ी और उन्नत कृषि प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में कनाडाई निर्यात के लिए बाजार खोल सकता है। कनाडा की संस्थागत पूंजी पहले से ही भारतीय अवसंरचना और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में प्रमुख विदेशी निवेश स्रोतों में शामिल है। एक संगठित व्यापार ढांचा अगले दशक में द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा स्तर से दोगुना तक बढ़ाने की क्षमता रखता है, बशर्ते शुल्क, नियामकीय और गतिशीलता संबंधी बाधाओं में क्रमिक कमी लाई जाए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि व्यापार के अलावा यह दौरा आर्थिक, सुरक्षा और रणनीतिक ढांचे को स्पष्ट रूप देने में भी मददगार होगा। ऊर्जा सहयोग के तहत संरचित हाइड्रोकार्बन आपूर्ति, भारत के असैनिक परमाणु विस्तार के लिए दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति और स्वच्छ बेसलोड ऊर्जा आवश्यकताओं पर चर्चा आगे बढ़ सकती है।

इसके अलावा कृषि, ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण, एयरोस्पेस, डिजिटल तकनीक और अगली पीढ़ी के विनिर्माण तंत्र में औद्योगिक और तकनीकी सहयोग का विस्तार संभव है। स्वच्छ एवं हरित प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण, कार्बन प्रबंधन और हाइड्रोजन वैल्यू चेन जैसे क्षेत्र संबंधों के प्रमुख स्तंभ बन सकते हैं। अनुसंधान सहयोग, स्टार्टअप साझेदारी और कुशल मानव संसाधन गतिशीलता पर भी जोर दिए जाने की संभावना है।

सुरक्षा के मोर्चे पर भी सहयोग बढ़ने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देश सीमा पार आतंकवाद, खालिस्तानी नेटवर्क और कनाडा में सक्रिय भारत-विरोधी तत्वों के खिलाफ समन्वय मजबूत कर सकते हैं। कानून प्रवर्तन और सुरक्षा एजेंसियों के बीच खुफिया साझाकरण, अवैध वित्तीय प्रवाह पर रोक और संगठित अपराध व आतंक से जुड़े नेटवर्क पर संयुक्त कार्रवाई पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।

बहुपक्षीय मंचों पर भी दोनों देश संयुक्त राष्ट्र समेत वैश्विक शासन संस्थाओं में सुधार, आतंकवाद-रोधी सहयोग और वैश्विक विकास एवं सुरक्षा ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने के मुद्दों पर समर्थन दोहरा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्नी का संभावित भारत दौरा द्विपक्षीय संबंधों को एक नए, अधिक व्यवस्थित और दीर्घकालिक सहयोग के चरण में प्रवेश दिला सकता है।

--आईएएनएस

डीएससी

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