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(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)
ओटावा, 21 फरवरी (आईएएनएस)। कनाडाई मीडिया संस्थानों द्वारा खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर को “सिख नेता” बताकर संबोधित किए जाने को तथ्यों को खतरनाक ढंग से मिटाने जैसा बताया गया है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पहचान की राजनीति और चुनिंदा नैरेटिव से विभाजित दुनिया में मीडिया की प्रस्तुति जनमत और नीतियों पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती है।
‘खालसा वॉक्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, जून 2023 में कनाडा के सरे में मारे गए निज्जर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नामित आतंकी, हिंसक साजिशों के कथित सूत्रधार और उग्र खालिस्तानी संगठनों के प्रमुख चेहरों में से एक के रूप में पहचाना जाता रहा है। इसके बावजूद हाल ही में ‘ग्लोबल न्यूज कनाडा’ की एक रिपोर्ट में उन्हें “बी.सी. सिख नेता” कहा गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि तथ्यों को धुंधला करने का प्रयास है। इसमें दावा किया गया कि इस तरह की प्रस्तुति आतंकवाद के पीड़ितों का अपमान करती है और उग्रवादियों को सामुदायिक प्रतिनिधि के रूप में पेश करने का खतरनाक उदाहरण स्थापित करती है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इस तरह का फ्रेमिंग निज्जर की कथित हिंसक गतिविधियों और जटिल भू-राजनीतिक संदर्भों को नजरअंदाज कर पीड़ित होने की संकीर्ण दृष्टि तक सीमित कर देता है। इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि उन्हें केवल सिख अधिकारों के पैरोकार के रूप में पेश करना, जबकि उनके कथित तौर पर पाकिस्तान की आईएसआई से संबंध और प्रशिक्षण शिविरों से जुड़ाव के आरोप रहे हैं, प्रवासी समुदायों के युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेल सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया कि यदि मीडिया सांस्कृतिक पहचान के आधार पर आतंकवाद से जुड़े व्यक्तियों को “नेता” के रूप में प्रस्तुत करता है, तो इससे वैश्विक स्तर पर उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई कमजोर पड़ सकती है, चाहे वह इस्लामवादी, अतिदक्षिणपंथी या अलगाववादी स्वरूप में हो।
रिपोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि पंजाब में कथित तौर पर निज्जर से जुड़े संगठन खालिस्तान टाइगर फोर्स द्वारा की गई हिंसा के पीड़ितों की आवाज इस नैरेटिव में हाशिये पर चली जाती है। साथ ही, कनाडा के इतिहास में सिख उग्रवाद और एयर इंडिया त्रासदी जैसे घटनाक्रमों को भी चेतावनी के तौर पर याद किया जाना चाहिए।
रिपोर्ट में मीडिया से तथ्यों को प्राथमिकता देने और किसी भी व्यक्ति की आतंकी नामांकन और गतिविधियों को स्पष्ट रूप से उल्लेखित करने की अपील की गई है। साथ ही सरकारों से भी साक्ष्यों के आधार पर समान मानदंड अपनाने और राजनीतिक दबाव से परे कार्रवाई करने की मांग की गई है।
--आईएएनएस
डीएससी
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