बजट 2026-27 से भारत बनेगा इनोवेशन और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब: एसबीआई चेयरमैन

बजट 2026-27 से भारत बनेगा इनोवेशन और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब: एसबीआई चेयरमैन

बजट 2026-27 से भारत बनेगा इनोवेशन और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब: एसबीआई चेयरमैन

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IANS
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New Delhi: Nirmala Sitharaman Addresses Post-Budget Press Conference

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 2 फरवरी (आईएएनएस)। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी ने कहा है कि बजट 2026-27 भारत को इनोवेशन और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा और अहम कदम है। इस बजट का मुख्य लक्ष्य दुनिया में प्रतिस्पर्धा के लिए भारत को मजबूत बनाना है।

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एसबीआई चेयरमैन के अनुसार, इस बजट में नीतियों की निरंतरता बनी हुई है और टैक्स सिस्टम को लेकर भी स्पष्टता है। बजट में ग्रामीण और शहरी इलाकों, पुराने सेक्टर और नए उभरते सेक्टरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।

उन्होंने एसबीआई की यूनियन बजट 2026-27 एनालिसिस रिपोर्ट में कहा कि इस साल का बजट एक तरफ अनुमानित तो दूसरी तरफ भविष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। बजट का ढांचा पहले जैसा ही है, जिसमें रोजगार पैदा करने वाले और उभरते सेक्टरों पर ध्यान दिया गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर अब भी बजट का मजबूत आधार बना हुआ है और इसमें निवेश बढ़ाने का प्रस्ताव है।

सेट्टी ने कहा कि इस बजट में बैंकिंग सेक्टर के लिए कई अच्छे मौके हैं। बदलते समय के साथ बैंकिंग सिस्टम को नया रूप देना और वित्तीय बाजारों को स्थिर रखना जरूरी है ताकि भारत की अगली विकास यात्रा को सही दिशा मिल सके।

बजट के भविष्य से जुड़े हिस्से में सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (सीसीयूएस) और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे सनराइज सेक्टरों पर खास जोर दिया गया है।

एसबीआई चेयरमैन ने बताया कि बजट की गणनाएं 10 प्रतिशत की नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ के अनुमान पर आधारित हैं, जो मौजूदा महंगाई को देखते हुए सही लगती हैं। इसके आधार पर फिस्कल डेफिसिट जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

ग्रामीण और कृषि क्षेत्र में भी बजट में कुछ अहम बदलाव किए गए हैं। अब ध्यान चंदन, काजू और मत्स्य पालन जैसे ज्यादा मूल्य वाले उत्पादों पर होगा। इसके साथ ही 500 जलाशयों के एकीकृत विकास, नारियल उत्पादन बढ़ाने की योजना, पुराने और कम उत्पादन वाले बागानों को फिर से विकसित करने और अखरोट, बादाम व पाइन नट्स की खेती बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

बजट में कृषि क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल को बढ़ाने की बात भी कही गई है। इसके लिए एग्री स्टैक पोर्टल्स को आपस में जोड़ा जाएगा।

बजट में सेवा क्षेत्र, खासकर पर्यटन, ऑरेंज इकॉनमी और शिक्षा पर ध्यान दिया गया है। यह कदम इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, बेहतर कनेक्टिविटी और डिजिटल निवेश से होने वाली भविष्य की ग्रोथ को सपोर्ट करेगा। एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज नाम की एक हाई-पावर कमेटी बनाई जाएगी, जो सेवा क्षेत्र को विकसित भारत का मुख्य आधार बनाएगी।

बड़े स्तर पर हो रहे निर्माण कार्यों को देखते हुए बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन से जुड़े आधुनिक और महंगे उपकरणों का देश में ही निर्माण करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि घरेलू सप्लाई चेन मजबूत हो सके।

निजी डेवलपर्स का भरोसा बढ़ाने के लिए एक इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड बनाने का प्रस्ताव है। यह फंड बैंकों और अन्य कर्ज देने वालों को आंशिक गारंटी देगा।

तेजी से बढ़ते शहरीकरण को ध्यान में रखते हुए बजट में शहरों के समूहों की ताकत का उपयोग करने की योजना बनाई गई है। इसके तहत सिटी इकनॉमिक रीजन (सीईआर) तय किए जाएंगे और हर सीईआर को 5 साल में 5,000 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।

सेट्टी ने कहा कि उभरते हुए क्षेत्रों में बजट में मौजूदा भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके लिए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0 लाया जाएगा ताकि उपकरण, सामग्री और भारतीय तकनीक विकसित की जा सके। साथ ही, क्रिटिकल मिनरल्स की कमी को देखते हुए रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने और पूंजीगत सामान के आयात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी में छूट देने का प्रस्ताव है।

एसबीआई चेयरमैन ने कहा कि बजट में लोगों को केंद्र में रखकर योजनाएं बनाई गई हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग से जुड़े कदम देश की मौजूदा चुनौतियों को पहचानते हुए उठाए गए हैं।

--आईएएनएस

डीबीपी/

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