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(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)
ढाका, 3 फरवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश के एक लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में विकास के लिए यह ज़रूरी है कि नागरिक यह सवाल उठाएं कि महिलाओं के प्रति प्रतिगामी सोच रखने वाली जमात-ए-इस्लामी जैसी कट्टर राजनीतिक पार्टी को मौजूदा संवैधानिक और कानूनी ढांचे के तहत पंजीकृत रहने और सक्रिय राजनीति करने का अधिकार मिलना चाहिए या नहीं। मंगलवार को आई एक रिपोर्ट में कहा गया कि जब तक इन बुनियादी सवालों का जवाब नहीं दिया जाता, तब तक ऐसी पार्टी को देश की शासन जिम्मेदारी सौंपना गैर-जिम्मेदाराना होगा।
बांग्लादेश के प्रमुख दैनिक प्रोथोम आलो में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, स्वतंत्रता की उद्घोषणा, संविधान की प्रस्तावना में निहित मानव गरिमा के प्रति प्रतिबद्धता और संविधान का अनुच्छेद 28 धर्म, जाति, लिंग या सामाजिक-आर्थिक आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को प्रतिबंधित करता है। इसके बावजूद, जमात अपने संविधान और व्यवहार दोनों के जरिए मुस्लिम महिलाओं और गैर-मुस्लिमों के साथ भेदभाव करती दिखती है, जिससे वे व्यवहारिक रूप से द्वितीय श्रेणी के नागरिक बन जाते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं के प्रति जमात की नकारात्मक सोच उसके अमीर (प्रमुख) के हालिया बयानों में भी साफ झलकती है। महिलाओं के काम के घंटे केवल पांच घंटे तक सीमित रखने की उनकी टिप्पणी और उससे जुड़ी बातें इस मानसिकता को दर्शाती हैं कि महिलाओं को घर तक सीमित रखा जाए। एक बैठक में उन्होंने कहा था, “नियोक्ता पांच घंटे का वेतन देगा और सरकार तीन घंटे का भुगतान करेगी। जो महिलाएं घर पर काम करेंगी, उन्हें ‘रत्नगर्भा’ माताओं के रूप में सम्मानित किया जाएगा। अगर महिलाएं आठ घंटे काम करना चाहेंगी, तो भी उन्हें सम्मान मिलेगा।”
रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में युवाओं की एक सभा में जमात अमीर ने घर से बाहर काम करने वाली महिलाओं को लेकर तीखे, व्यंग्यात्मक और अपमानजनक बयान दिए। उन्होंने पहले पूछा कि कितने लोग अविवाहित हैं और फिर शादी को लेकर सलाह देते हुए कहा, “अब से यह संकल्प लो कि घर में मजदूर नहीं, रानी लाओ। जिसे भी लाओ, उसे रानी का दर्जा दो, गुलाब का दर्जा दो।”
रिपोर्ट में ज़ोर दिया गया है कि भले ही कोई व्यक्ति परिवार, समाज या कार्यस्थल में महिलाओं की भूमिका को लेकर निजी विचार रखता हो, लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी राज्य में सक्रिय राजनीतिक पार्टी अपने संविधान में ऐसे प्रावधान रख सकती है जो सीधे तौर पर राष्ट्रीय संविधान के खिलाफ हों।
हैरानी की बात यह है कि जमात की महिला शाखा की कुछ सदस्यों ने भी महिलाओं के नेतृत्व को लेकर पार्टी के रुख को स्वीकार करने की बात कही है।
प्रोथोम आलो के अनुसार, जमात की महिला विंग की महासचिव नूरुन्निसा सिद्दिका ने महिलाओं के नेतृत्व पर सवाल के जवाब में कहा, “पवित्र कुरान में अल्लाह ने कहा है कि पुरुष महिलाओं के संरक्षक हैं। हमने ईमान स्वीकार करते समय इसे मान लिया था। इसलिए महिलाओं का शीर्ष नेतृत्व में होना महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि महिलाओं के अधिकारों को लागू किया जा रहा है या नहीं।”
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बांग्लादेश के राष्ट्रीय चुनाव में अब केवल नौ दिन बचे हैं और ऐसे में जमात की लगातार महिलाओं के खिलाफ बयानबाजी और आगामी चुनाव में एक भी महिला उम्मीदवार न उतारने का फैसला देश को एक प्रतिगामी राजनीतिक रास्ते की ओर धकेल सकता है।
--आईएएनएस
डीएससी
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