केंद्रीय बजट 2026-27 बदलाव के दौर से गुजर रही अर्थव्यवस्था के आत्मविश्वास और परिपक्वता को दिखाता है: हरदीप सिंह पुरी

केंद्रीय बजट 2026-27 बदलाव के दौर से गुजर रही अर्थव्यवस्था के आत्मविश्वास और परिपक्वता को दिखाता है: हरदीप सिंह पुरी

केंद्रीय बजट 2026-27 बदलाव के दौर से गुजर रही अर्थव्यवस्था के आत्मविश्वास और परिपक्वता को दिखाता है: हरदीप सिंह पुरी

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IANS
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New Delhi: Winter Session of Parliament (Rajya Sabha)

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

देहरादून, 7 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार को कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 वर्ष 2014 के बाद से परिवर्तन से गुजरी अर्थव्यवस्था के आत्मविश्वास और परिपक्वता को दर्शाता है।

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यहां केंद्रीय बजट 2026-27 पर एक प्रेस वार्ता के दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए पुरी ने कहा कि बजट विकास को बढ़ावा देने और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने के बीच सावधानीपूर्वक संतुलन स्थापित करता है और भारत की उस यात्रा को रेखांकित करता है जिसमें वह कमजोर पांच देशों में गिने जाने से लेकर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सबसे भरोसेमंद वैश्विक विकास गाथाओं में से एक बनने तक पहुंचा है।

बजट को दूरदर्शी और सुदृढ़ीकरण उन्मुख बताते हुए पुरी ने कहा कि यह पिछले दशक में रखी गई नींव पर आधारित है और भारत को वैश्विक नेतृत्व के अगले चरण के लिए तैयार करता है। उपभोग और निवेश से प्रेरित होकर, वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो वैश्विक वृद्धि दर लगभग 3 प्रतिशत के आसपास रहने के बावजूद, लगातार चौथे वर्ष भारत को सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करता है।

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि भारत ने 2025 में प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष मुद्रास्फीति में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की, जो लगभग 1.8 प्रतिशत थी। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच, खाद्य पदार्थों, विशेष रूप से सब्जियों और दालों की कम कीमतों के कारण मुद्रास्फीति औसतन लगभग 1.7 प्रतिशत रही। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में मुद्रास्फीति का स्तर कई विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है।

पुरी ने 2014 से पूंजी-आधारित विकास की ओर निर्णायक बदलाव पर जोर देते हुए कहा कि 2026-27 में कुल पूंजीगत व्यय लगभग 12.2 लाख करोड़ रुपए है, जो 2013-14 की तुलना में 430 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। इस अवधि के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए आवंटन में लगभग 500 प्रतिशत, रक्षा के लिए 210 प्रतिशत से अधिक, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के लिए लगभग 176 प्रतिशत और शिक्षा के लिए 110 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा कि अवसंरचना पर किया गया खर्च विकास का एक प्रमुख इंजन बन गया है, और राष्ट्रीय राजमार्ग विकास पर खर्च किया गया प्रत्येक रुपया सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 3.2 रुपए का योगदान देता है।

--आईएएनएस

एबीएस/

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