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(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)
नई दिल्ली, 8 फरवरी (आईएएनएस)। क्वींसलैंड सरकार ने एंटी-सेमिटिज्म (यहूदी-विरोध) और नफरत फैलाने वाली गतिविधियों के खिलाफ नए सख्त कानून बनाने का ऐलान किया है। इन कानूनों के तहत, फिलिस्तीन समर्थक नारे फ्रॉम द रिवर टू द सी और ग्लोबलाइज द इंतिफादा पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
इस तरह ऑस्ट्रेलिया का क्वींसलैंड देश का ऐसा पहला राज्य होगा जहां फ्रॉम द रिवर टू द सी नारे पर पूरी तरह से बैन लग सकता है। ये वाक्यांश फिलीस्तीन समर्थक माना जाता है और इसे हेट स्पीच श्रेणी में रखा जाता है। प्रांत के प्रीमियर डेविड क्रिसाफुली ने रविवार को हेट स्पीच के खिलाफ कड़े कदम उठाने की जानकारी दी।
एसबीएस न्यूज आउटलेट के अनुसार यदि कोई व्यक्ति इन नारों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करता है, प्रकाशित करता है, या उच्चारित करता है और इससे उत्पीड़न या अपमान होता है, तो अधिकतम 2 साल की जेल भी हो सकती है।
प्रीमियर डेविड क्रिसाफुल्ली ने रविवार को प्रस्तावित कानूनों की घोषणा की और बताया कि इन्हें मंगलवार को संसद में पेश किया जाएगा। डेविड ने इसे बोंडी आतंकी हमले का सीधा जवाब बताया, जहां हनुका उत्सव के दौरान पिछले साल दिसंबर में 15 लोग आतंकी हमले का शिकार हुए थे।
अटॉर्नी जनरल डेब फ्रेकलिंगटन ने पुष्टि की कि ग्लोबलाइज द इंतिफादा और नदी से समुद्र तक को प्रतिबंधित वाक्यांशों के रूप में शामिल किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ऐसे वाक्यांश जिनका इस्तेमाल नफरत, अपराध और धमकी भड़काने के लिए किया जाता है, कि क्वींसलैंड में कोई जगह नहीं है। न्यू साउथ वेल्स में, पिछले महीने एक संसदीय जांच में ग्लोबलाइज द इंतिफादा वाक्यांश पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई थी। समिति ने माना था कि इसका इस्तेमाल नफरत, उत्पीड़न, धमकी या हिंसा भड़काने के लिए किया जाता है।
इंतिफादा अरबी शब्द विद्रोह या झटकने से आया है, जिसे फिलिस्तीन समर्थक 1987 और 2000 में इजरायल के खिलाफ शुरू हुए विद्रोहों के संदर्भ में इस्तेमाल करते हैं। लेकिन यहूदी समुदाय के कई लोगों ने कहा है कि यह उनके खिलाफ हिंसा का आह्वान है।
एनएसडब्ल्यू की जांच में फ्रॉम द रिवर टू द सी पर बैन लगाने की सिफारिश नहीं की गई। माना गया कि यह स्लोगन जॉर्डन नदी से लेकर भूमध्य सागर तक के क्षेत्र को परिभाषित करता है। इजरायल और उसके समर्थकों का कहना है कि यह नारा इजरायल-विरोधी फिलिस्तीनी गुट लगाते हैं। इस नारे को इजरायल के अस्तित्व को खत्म करने के आह्वान के रूप में देखा जाता है। फिलिस्तीनी लोग और समर्थक इसे फिलिस्तीन की आजादी के रूप में देखते हैं।
--आईएएनएस
केआर/
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