वेनेजुएला को लेकर अमेरिका की अब क्या है रणनीति? विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सामने रखा रोडमैप

वेनेजुएला को लेकर अमेरिका की अब क्या है रणनीति? विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सामने रखा रोडमैप

वेनेजुएला को लेकर अमेरिका की अब क्या है रणनीति? विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सामने रखा रोडमैप

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IANS
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Rubio outlines three-phase US plan for Venezuela, no early elections

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

वाशिंगटन, 8 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन ने वेनेजुएला के लिए तीन चरणों वाली योजना सामने रखी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि इस रोडमैप के तहत फिलहाल वेनेजुएला में जल्द चुनाव कराए जाने की कोई योजना नहीं है और अमेरिका की भूमिका लंबे समय तक बनी रहेगी।

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रुबियो के अनुसार, यह योजना तीन हिस्सों में बंटी है, जिनमें स्थिरीकरण, पुनर्बहाली और राजनीतिक संक्रमण शामिल हैं। उन्होंने साफ किया कि इन चरणों को जल्दबाजी में लागू नहीं किया जाएगा, क्योंकि वेनेजुएला की मौजूदा स्थिति वर्षों की गिरावट का नतीजा है।

पहला चरण देश में स्थिरता लाने पर केंद्रित है। रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाए जाने के बाद अराजकता फैलने से रोकना इस चरण का मुख्य उद्देश्य है। इसके लिए अमेरिका वेनेजुएला के तेल निर्यात पर सख्त नियंत्रण रखेगा।

उन्होंने बताया कि प्रतिबंधों के कड़े पालन और समुद्री निगरानी (नौसैनिक क्वारंटीन) के जरिए वाशिंगटन के पास इस समय सबसे मजबूत दबाव की स्थिति है।

दूसरा चरण आर्थिक पुनर्बहाली से जुड़ा है। इस दौरान वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को अमेरिकी, पश्चिमी और अन्य स्वीकृत विदेशी कंपनियों के लिए दोबारा खोला जाएगा। रुबियो ने कहा कि इस चरण में बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण, बिजली व्यवस्था की मरम्मत और आर्थिक विकास के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना शामिल है। साथ ही राष्ट्रीय मेल-मिलाप की कोशिशें भी होंगी, जिनमें विपक्षी नेताओं की रिहाई या माफी और देश छोड़ चुके लाखों वेनेजुएलावासियों की वापसी शामिल है।

तीसरे और अंतिम चरण में ही राजनीतिक संक्रमण की प्रक्रिया शुरू होगी। हालांकि रुबियो ने इसके लिए कोई समयसीमा बताने से इनकार किया।

उन्होंने कहा, अभी सिर्फ कुछ ही दिन हुए हैं। वर्षों की संस्थागत गिरावट को रातों-रात ठीक नहीं किया जा सकता।

यह योजना भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। अमेरिका की दीर्घकालिक भागीदारी से वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है, जिसका सीधा प्रभाव उन बाजारों पर होगा जिन पर भारत काफी हद तक निर्भर है।

आलोचनाओं पर जवाब देते हुए रुबियो ने कहा कि यह कोई तात्कालिक या बिना सोची-समझी रणनीति नहीं है। पूरी योजना कांग्रेस के साथ साझा की जा चुकी है। प्रशासन का मानना है कि जल्द चुनाव कराना देश को और अस्थिर कर सकता है, इसलिए पहले स्थिरता और आर्थिक सुधार जरूरी हैं।

यह रणनीति यह भी दिखाती है कि अमेरिका अब सीधे राजनीतिक बदलाव के बजाय आर्थिक दबाव, खासकर ऊर्जा क्षेत्र में नियंत्रण, के जरिए अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है। साथ ही इसका मकसद लैटिन अमेरिका में चीन के बढ़ते प्रभाव को चुनौती देना भी है।

--आईएएनएस

वीकेयू/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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