बांग्लादेश में प्राइवेट यूनिवर्सिटी से दो शिक्षकों को बर्खास्त करने पर मानवाधिकार संस्था ने की फैसले की निंदा

बांग्लादेश में प्राइवेट यूनिवर्सिटी से दो शिक्षकों को बर्खास्त करने पर मानवाधिकार संस्था ने की फैसले की निंदा

बांग्लादेश में प्राइवेट यूनिवर्सिटी से दो शिक्षकों को बर्खास्त करने पर मानवाधिकार संस्था ने की फैसले की निंदा

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IANS
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Rights body condemns dismissal of two Bangladeshi University teachers over blasphemy allegations

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

पेरिस, 21 जनवरी (आईएएनएस)। पेरिस स्थित मानवाधिकार संस्था जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (जेएमबीएफ) ने बांग्लादेश की एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी से ईशनिंदा के आरोपों पर दो शिक्षकों को निकाले जाने की कड़ी निंदा की है। मानवाधिकार संस्था ने इस घटना को दक्षिण एशियाई देश में अकादमिक स्वतंत्रता के लिए एक खतरनाक उदाहरण बताया।

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ढाका में यूनिवर्सिटी ऑफ एशिया पैसिफिक (यूएपी) के अधिकारियों ने 18 जनवरी को शिक्षकों को बर्खास्त किया। असिस्टेंट प्रोफेसर लायेका बशीर और एसोसिएट प्रोफेसर एएसएम मोहसिन, दोनों बेसिक साइंसेज और ह्यूमैनिटीज डिपार्टमेंट में थे। मोहसिन उस डिपार्टमेंट के हेड थे।

जेएमबीएफ ने शिक्षकों को निकालने की प्रक्रिया को अनुचित बताते हुए कहा, चरमपंथी छात्रों के विरोध प्रदर्शनों और संगठित भीड़ के दबाव में बिना किसी पारदर्शी जांच को पूरा किए और आरोपी शिक्षकों को अपना बचाव करने का मौका दिए बिना ईशनिंदा के आरोप में बर्खास्त किया गया। ऐसे कार्य बांग्लादेश के संविधान, मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा, न्याय के मौलिक सिद्धांतों और शैक्षणिक स्वतंत्रता का उल्लंघन हैं।

मानवाधिकार संस्था ने चिंता जताते हुए कहा कि शिक्षकों की नौकरी खत्म करने का मनमाना फैसला तब लिया गया, जब एक जांच समिति अभी भी कथित ईशनिंदा के आरोपों पर काम कर रही थी। इसके अलावा, संस्था ने कहा कि आरोपी शिक्षकों को अपना बचाव पेश करने का मौका नहीं दिया गया और सही कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।

जेएमबीएफ के मुख्य सलाहकार और प्रसिद्ध फ्रांसीसी मानवाधिकार कार्यकर्ता रॉबर्ट जॉन पॉल साइमन ने कहा, सोशल मीडिया पर निजी राय व्यक्त करने के लिए शिक्षकों को इस्लामोफोबिक करार देना, उनके खिलाफ भीड़ को उकसाना, धमकियां दिलवाना और आखिर में प्रशासनिक फैसलों के जरिए उनकी बर्खास्तगी करवाना एक खतरनाक मिसाल है। यह साफ दिखाता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने शिक्षकों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करने के बजाय संगठित हिंसा को खुश करने का रास्ता चुना है।

जेएमबीएफ ने कहा कि यह घटना न सिर्फ दो शिक्षकों के साथ अन्याय है, बल्कि बांग्लादेश के एजुकेशन सिस्टम और अभिव्यक्ति की आजादी के लिए एक खतरनाक मिसाल भी है।

इसमें कहा गया है, अगर इस तरह भीड़ के दबाव में शिक्षकों को हटाया जाता है, तो भविष्य में अकादमियों से जुड़े लोग आजादी से सोच नहीं पाएंगे और रिसर्च नहीं कर पाएंगे या खुलकर अपने विचार जाहिर नहीं कर पाएंगे।

मानवाधिकार संस्था ने मांग की कि दोनों शिक्षकों को बर्खास्त करने के फैसले को तुरंत रद्द किया जाए। मानवाधिकार संस्था ने यह भी मांग की कि एक अंतरराष्ट्रीय मानक का स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कमीशन बनाया जाए और साथ ही आरोपी शिक्षकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किए जाएं।

--आईएएनएस

डीसीएच/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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