चुनाव से पहले बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़ने की खुफिया चेतावनी

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चुनाव से पहले बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़ने की खुफिया चेतावनी

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IANS
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Relentless and planned: Intelligence warns minority killing in Bangladesh will rise ahead of polls

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 15 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा कोई नई बात नहीं है। यह कई दशकों से जारी है और 1989 के बाद से इसके बड़े और संगठित दौर देखने को मिले हैं। हालांकि वर्ष 2025 में अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों में जिस तरह की तेजी आई है, उसे भारतीय अधिकारी “असाधारण और चिंताजनक” मान रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, तब से अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की प्रक्रिया लगातार और बेरोकटोक जारी है।

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ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज़ (एचआरसीबीएम) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 6 जून 2025 से 5 जनवरी 2026 के बीच बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के 116 लोगों की हत्या की गई।

इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने का सिलसिला लंबे समय से चला आ रहा है, लेकिन मौजूदा दौर पहले से बिल्कुल अलग प्रतीत होता है। अधिकारी के अनुसार, “इस बार यह अभियान बेहद लगातार और सुनियोजित है। इसे अंजाम देने वाले लोग किसी भी सरकार के सत्ता में आने के बावजूद इसे रोकने के मूड में नहीं दिखते।”

अधिकारियों का कहना है कि पहले हिंसा के मामले किसी बड़े उभार के बाद सरकारी हस्तक्षेप से थम जाते थे, लेकिन इस बार स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। एक अन्य अधिकारी ने कहा, “ऐसा लगता है कि इस हिंसा को अंजाम देने वालों ने तब तक न रुकने का फैसला कर लिया है, जब तक अल्पसंख्यकों का पूरी तरह सफाया न हो जाए।”

एचआरसीबीएम की रिपोर्ट के अनुसार, पहले जहां हिंसा कुछ चुनिंदा डिवीजनों तक सीमित रहती थी, वहीं इस बार यह बांग्लादेश के सभी 8 डिवीजनों और 45 जिलों में फैल चुकी है। अधिकारियों का मानना है कि यह पैटर्न इस बात की ओर इशारा करता है कि हिंसा पूरी तरह योजनाबद्ध है और स्पष्ट निर्देशों के तहत की जा रही है- “काम पूरा होने तक मत रुको।”

अधिकारियों के अनुसार, अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं की हत्याओं का उद्देश्य केवल बांग्लादेश को अल्पसंख्यक-विहीन बनाना नहीं है, बल्कि इसके जरिए भारत को भी एक संदेश देने और उसे उकसाने की कोशिश की जा रही है।

खुफिया सूत्रों का दावा है कि शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद यह योजना और तेजी से लागू की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में आई व्यवस्था के दौरान आईएसआई-जमात गठजोड़ को इस अभियान को अंजाम देने में आसानी मिली है, क्योंकि यूनुस प्रशासन की ओर से इस हिंसा को रोकने का कोई ठोस दबाव नहीं है।

खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि आगामी चुनावों से पहले अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। जमात और उससे जुड़े अन्य दलों को उम्मीद है कि अल्पसंख्यकों पर हमलों से उनका कट्टर वोट बैंक और मजबूत होगा। यही कारण है कि भारतीय एजेंसियों को चुनाव से पहले और अधिक हिंसक घटनाओं की आशंका है।

एचआरसीबीएम की रिपोर्ट में कहा गया है कि ये हत्याएं किसी भी तरह से बेतरतीब घटनाएं नहीं हैं, बल्कि संरचनात्मक हिंसा का हिस्सा हैं, जो लंबे समय से चली आ रही व्यवस्थित भेदभाव और जनसांख्यिकीय बदलावों से उपजी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की आबादी 1946 में 30 प्रतिशत थी, जो 2020 तक घटकर केवल 9 प्रतिशत रह गई।

अधिकारियों का कहना है कि यूनुस प्रशासन अक्सर इन घटनाओं को अलग-अलग या व्यक्तिगत विवादों का नतीजा बताकर पेश करता है। हालांकि, जांच में लगभग सभी मामलों में यह सामने आया है कि हत्याएं जानबूझकर और विशेष रूप से अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर की गईं।

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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