पाकिस्तानी अधिकारियों की कार्रवाई राजनीतिक बदले से प्रेरित : मानवाधिकार संगठन

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पाकिस्तानी अधिकारियों की कार्रवाई राजनीतिक बदले से प्रेरित : मानवाधिकार संगठन

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IANS
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‘Political vendetta by Pak authorities’: Baloch rights group after courts grant bail to detained leaders

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

क्वेटा, 1 जनवरी (आईएएनएस)। बलूचिस्तान में हो रही हिंसा को लेकर मानवाधिकार संगठन लगातार चिंताएं जाहिर कर रहा है। वहीं, मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने ज्यादातर शिकायतों को बेबुनियाद और मनगढ़ंत बताया है।

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बीवाईसी ने कहा कि जिस तरह से बलूचिस्तान की कई अदालतों से लगातार बेल ऑर्डर रिलीज किए गए हैं, उससे एक बात साफ है कि पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से दर्ज किए गए ज्यादातर मामले झूठे हैं। कोर्ट ने जिस तरह से आरोपियों को बेल दिया है, वह दिखाता है कि दर्ज की गई शिकायतें बेबुनियाद, मनगढ़ंत और राजनीति से प्रेरित हैं।

मानवाधिकार संगठन का कहना है कि बीवाईसी के प्रमुख आयोजक, महरंग बलूच, और दूसरे नेताओं, जिनमें बीबर्ग बलूच, शाहजी बलूच, गुलजादी बलूच, और बीबो बलूच शामिल हैं, को पिछले दस महीनों से गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया है।

संगठन ने कहा कि बीवाईसी नेताओं को शुरू में तीन महीने के लिए मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर (3-एमपीओ) के तहत हिरासत में रखा गया था। यह एक ऐसा कानून है, जो सरकार के पब्लिक ऑर्डर के लिए संभावित खतरों के आकलन के आधार पर निवारक निरोध की इजाजत देता है।

हालांकि, बीवाईसी ने जिसे राजनीति से प्रेरित मामला बताया, उसके जरिए उनकी हिरासत बढ़ा दी गई। संगठन ने आरोप लगाया कि बार-बार रिमांड पर लेने, जांच रिपोर्ट जमा करने में जानबूझकर देरी करने और सिस्टमैटिक प्रक्रियाओं में रुकावटों की वजह से उनकी कैद लंबी हो गई है।

बीवाईसी की तरफ से जारी बयान में कहा गया, “30 दिसंबर को, कलात में एंटी-टेररिज्म कोर्ट (एटीसी) ने बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) के नेतृत्व को चार एफआईआर में बेल दे दी। इससे पहले, 29 दिसंबर को, मस्तुंग में रजिस्टर्ड दो आम शिकायतों में बेल दी गई थी। क्वेटा में, सिटी कोर्ट ने चार शिकायतों में बेल दी, और 31 दिसंबर को, क्वेटा के सरयाब में दो आम एफआईआर में भी बेल मंजूर की गई।”

मानवाधिकार संगठन ने कहा कि पाकिस्तानी कोर्ट ने साफ तौर पर देखा है कि इन शिकायतों में ठोस आधार नहीं हैं और बीवाईसी नेताओं की गतिविधियां उनके संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के अंदर आती हैं।

हालांकि, संगठन ने कहा कि कई मामलों में, जांच पूरी होने के बावजूद, कुछ कोर्ट में बेल रोकी जा रही है, जिससे शांति से रह रहे बीवाईसी नेताओं को लगातार हिरासत में रखा जा रहा है। नेताओं के खिलाफ आरोपों में हिंसा या आपराधिक काम शामिल नहीं हैं, बल्कि, वे राजनीतिक दुश्मनी और एक अहिंसक आंदोलन के डर से पैदा हुए हैं।

बीवाईसी ने जोर देकर कहा, “पहले से दिए गए बेल ऑर्डर में कोई शक की गुंजाइश नहीं है। ये मामले शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधि और बोलने की आजादी से जुड़े हैं। ये अधिकार पाकिस्तान के संविधान के आर्टिकल 19 के तहत साफ तौर पर सुरक्षित हैं। जब एक जैसे मामलों में कई जगहों पर बेल मिल जाती है, लेकिन क्वेटा एंटी-टेररिज्म कोर्ट के सामने रुके रहते हैं, तो कानून के सामने बराबरी और न्यायिक स्वतंत्रता के भरोसे को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं।”

मानवाधिकार संगठन ने अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से अपील की कि वे बीवाईसी नेताओं की तुरंत रिहाई के लिए आवाज उठाएं और बलूचिस्तान में मानवाधिकार के लिए आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुरंत कदम उठाएं।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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