पाकिस्तान की समस्या बलोच प्रतिरोध से नहीं, पहचान से है: मानवाधिकार कार्यकर्ता

पाकिस्तान की समस्या बलोच प्रतिरोध से नहीं, पहचान से है: मानवाधिकार कार्यकर्ता

पाकिस्तान की समस्या बलोच प्रतिरोध से नहीं, पहचान से है: मानवाधिकार कार्यकर्ता

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IANS
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Pakistan's problem is with Baloch identity not resistance: Human rights activist

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

क्वेटा, 6 जनवरी (आईएएनएस)। मानवाधिकार कार्यकर्ता और बलोच यकजाहती कमेटी (बीवाईसी) की नेता सम्मी दीन बलोच ने कहा है कि पाकिस्तान बलोच लोगों को एक आबादी के रूप में नहीं, बल्कि दुश्मन के तौर पर देखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी सोच के चलते बलूचिस्तान में पाकिस्तानी प्रशासन द्वारा लगातार मानवाधिकार उल्लंघन किए जा रहे हैं।

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में सम्मी दीन बलोच ने कहा, “राज्य को हर उस व्यक्ति से समस्या है जिसकी पहचान बलोच है। इसी मानसिकता के तहत बलोच पुरुषों, महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और यहां तक कि नाबालिग बच्चों तक को जबरन गायब किया जा रहा है या उनकी हत्या की जा रही है। ये बलोच-विरोधी नीतियां साफ दिखाती हैं कि राज्य की समस्या बलोचों के प्रतिरोध से नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व और पहचान से है।”

उन्होंने कहा कि आतंकवाद और आतंकवाद-रोधी कार्रवाई का नैरेटिव महज एक पर्दा है, जिसके पीछे राज्य अपनी बलोच-विरोधी नीतियों को सही ठहराने और दुनिया के सामने उन्हें वैध साबित करने की कोशिश करता है। उन्होंने सवाल उठाया, “अगर ऐसा नहीं है, तो फिर निहत्थी महिलाओं, गर्भवती महिलाओं और 13 वर्षीय बच्चों के जबरन गायब किए जाने को आतंकवाद-रोधी कार्रवाई की किस श्रेणी में रखा जाएगा?”

सम्मी दीन बलोच ने कहा कि जब बलूचिस्तान के लोग बलोच नरसंहार की बात करते हैं, तो इसे झूठा नैरेटिव बताकर खारिज कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इससे बड़ा कोई नरसंहार नहीं हो सकता, जो बिना पुरुष, महिला, बुजुर्ग और बच्चों में भेद किए, बलोच पहचान को मिटाने की कोशिश करता हो।

बीवाईसी नेता ने पाकिस्तानी प्रशासन की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, “हमने सुना है कि सभ्य राष्ट्र दुश्मनी और युद्ध की स्थिति में भी महिलाओं और बच्चों को अलग मानते हैं, लेकिन बलोचों की बदकिस्मती यह है कि जो सत्ता उन्हें दुश्मन मानती है, उसके भीतर न तो सभ्यता बची है और न ही इंसानियत। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संविधान तथा कानूनों की बातें अब पूरी तरह अर्थहीन हो चुकी हैं, क्योंकि इस देश में वे सिर्फ कागजी दावे बनकर रह गए हैं।”

रिपोर्ट में कहा गया है कि बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा की जा रही अत्याचारों की श्रृंखला से जूझ रहा है। आरोप है कि प्रशासन वहां मौत के दस्तों को संरक्षण देता है, जो जबरन गुमशुदगी, गैर-न्यायिक हत्याओं और अवैध हिरासत के जरिए बलोच लोगों को निशाना बना रहे हैं।

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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