मानवाधिकार समूह 'बलूच नरसंहार स्मरण दिवस' पर दुनिया को बताएगा पाकिस्तान की हकीकत

मानवाधिकार समूह 'बलूच नरसंहार स्मरण दिवस' पर दुनिया को बताएगा पाकिस्तान की हकीकत

मानवाधिकार समूह 'बलूच नरसंहार स्मरण दिवस' पर दुनिया को बताएगा पाकिस्तान की हकीकत

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IANS
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Pakistan: Rights group to observe 'Baloch Genocide Remembrance Day' on January 25

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

क्वेटा, 20 जनवरी (आईएएनएस)। बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने घोषणा की है कि वह 25 जनवरी को बलूच नरसंहार स्मरण दिवस पर पाकिस्तान की ज्यादतियों का खुलासा करेगी। मानवाधिकार संगठन ने दुनिया भर में बलूच समुदाय से इस दिन विरोध प्रदर्शन, सेमिनार, प्रेस ब्रीफिंग, वीडियो संदेश, पैनल चर्चा, टीवी कार्यक्रमों, पॉडकास्ट, वेबिनार, सांस्कृतिक और कलात्मक कार्यक्रमों में भाग लेने का भी आग्रह किया है।

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एक्स पर जारी एक बयान में, बीवाईसी ने कहा कि बलूच नरसंहार स्मरण दिवस, यानी 25 जनवरी, को पूरे बलूचिस्तान और दुनिया भर में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसने आरोप लगाया कि बलूच लोगों का नरसंहार उसी दिन से शुरू हुआ जब उनकी पहचान के कारण उन्हें निशाना बनाया गया।

मानवाधिकार समूह ने कहा, नरसंहार सिर्फ सीधे तौर पर बड़े पैमाने पर हत्याओं तक ही सीमित नहीं है। यह एक धीमी, व्यवस्थित और खामोश प्रक्रिया भी हो सकती है जिसमें किसी समुदाय की पहचान, अस्तित्व और जीवन शैली को धीरे-धीरे मिटा दिया जाता है। जब किसी राष्ट्र को उनकी पहचान के कारण निशाना बनाया जाता है, तो उन्हें न केवल फांसी और जबरन गायब करने से मारा जाता है, बल्कि जानबूझकर उपेक्षा, बीमारी, असुरक्षित रहने की स्थिति, आर्थिक अभाव और मनोवैज्ञानिक आतंक से भी मारा जाता है।

बीवाईसी ने आरोप लगाया कि यह नरसंहार लक्षित हत्याओं, जबरन गायब करने, ड्रोन हमलों, स्वास्थ्य सेवा से वंचित करने, आर्थिक शोषण, कैंसर और अन्य जानलेवा बीमारियों के प्रसार और बड़े पैमाने पर मनोवैज्ञानिक यातना के माध्यम से किया जाता है।

बीवाईसी के बयान में कहा गया है, जनवरी 2024 में, सरयाब शाहवानी स्टेडियम में एक ऐतिहासिक सभा में, 25 जनवरी को औपचारिक रूप से बलूच नरसंहार स्मरण दिवस के रूप में नामित किया गया। इस दिन का उद्देश्य दुनिया को बलूच लोगों पर जारी नरसंहार के बारे में सूचित करना और बलूच राष्ट्र के अस्तित्व के लिए सामूहिक संघर्ष की आवश्यकता को उजागर करना है।

इसमें आगे कहा गया है, 25 जनवरी 2014 की दुखद घटना की याद में 25 जनवरी को यह दिन मनाया जाता है। उस दिन बलूचिस्तान के तोटक इलाके में पाकिस्तानी खुफिया समर्थित मिलिशिया (डेथ स्क्वाड) से जुड़े एक सुनसान गुप्त शिविर से लापता किए गए 100 से अधिक बलूच युवाओं के क्षत-विक्षत शव बरामद किए गए थे। यह भयानक सच्चाई बलूच लोगों की राष्ट्रीय स्मृति में एक स्थायी घाव बन गई।

अधिकार समूह ने कहा कि यह घटना आज भी बलूच लोगों को परेशान करती है। इसने कहा कि तोटक की सामूहिक कब्रें इस त्रासदी का प्रतीक बनी हुई हैं, जबकि परिवार अपने प्रियजनों की पहचान का इंतजार कर रहे हैं। इसने कहा कि बलूचिस्तान में तोटक के अलावा कई अन्य सामूहिक कब्रें भी मिली हैं।

बयान में बीवाईसी ने कहा, इसीलिए 25 जनवरी प्रतीकात्मक रूप से नरसंहार की इन सभी घटनाओं को दर्शाती है। सामूहिक कब्रों से मिले शवों की सिर्फ एक ही पहचान है: वे बलूच हैं। और हर साल, ये शव सैकड़ों परिवारों के इंतजार के दर्द को फिर से ताजा कर जाते हैं। इस घोषणा के बाद, पिछले साल बलूचों ने बलूचिस्तान के संसाधन से भरपूर इलाके दलबांदिन में एक बड़ी सभा आयोजित की और दुनिया को एक साफ संदेश दिया: भले ही बलूच राष्ट्र को उसकी जमीन और संसाधनों के शोषण के लिए नरसंहार का शिकार बनाया जा रहा है, लेकिन हम इसके खिलाफ एकजुट हैं।

बलूचिस्तान पाकिस्तानी अधिकारियों के हाथों हो रहे लगातार अत्याचारों से जूझ रहा है, जो इस क्षेत्र में डेथ स्क्वॉड को बलूच लोगों के जबरन गायब होने, न्यायेत्तर हत्याओं और अवैध हिरासत को अंजाम देने में मदद करते हैं।

--आईएएनएस

केआर/

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