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(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)
नई दिल्ली, 22 जनवरी (आईएएनएस)। एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत के बीच बढ़ता तालमेल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) की रणनीतिक साजिश को दर्शाता है। हालिया घटनाक्रम में इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत के समन्वयक मीर शफीक मंगल द्वारा लश्कर-ए-तैयबा के नेता राना मोहम्मद अशफाक को हथियार भेंट करना इस साझेदारी का प्रतीक माना जा रहा है, जो आईएसआई की निगरानी में जिहादी और सांप्रदायिक गुटों को एक मंच पर ला रही है।
इंडिया नैरेटिव में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की “डीप स्टेट” ने आतंकवाद को केवल सहन ही नहीं किया, बल्कि उसे राज्य नीति का सुनियोजित औजार बना लिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएसआई इस पूरे तंत्र की केंद्रबिंदु है, जो केवल आतंकी संगठनों को संरक्षण नहीं देती, बल्कि लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत और हमास जैसे संगठनों को जोड़कर एक तरह का “अपवित्र गठबंधन” तैयार कर रही है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद, जिसमें मुरिदके स्थित लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय को गंभीर नुकसान पहुंचा और इन संगठनों के आपसी संबंध उजागर हुए, आईएसआई ने अपने प्रयास और तेज कर दिए। आईएसआई ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद को अलग-अलग काम करने के बजाय एक “पैक” के रूप में साथ मिलकर काम करने का निर्देश दिया। हालात ऐसे हैं कि पाकिस्तानी सेना के अधिकारी खुले तौर पर आतंकियों के जनाजों में शामिल होते देखे जा रहे हैं, वहीं राजनेता लश्कर-ए-तैयबा के उपनेता सैफुल्लाह कसूरी के साथ मंच साझा कर रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ नेता रऊफ ने परेड के दौरान राज्य के संरक्षण में जिहाद के लिए भर्ती को आसान बताया, जहां हाफिज सईद के बेटे तल्हा सईद की भी मौजूदगी रही।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आईएसआई से जुड़े इस नेटवर्क में लश्कर-ए-तैयबा की शहरी लॉजिस्टिक्स और ऑपरेटिव क्षमताओं को जैश-ए-मोहम्मद की आत्मघाती हमलों की क्षमता के साथ जोड़ा गया है, जिसे हमास से मिलने वाले सामरिक सहयोग से और मजबूती मिली है। इस गठजोड़ का उद्देश्य भारत के खिलाफ लंबे समय तक हिंसा की रणनीति को आगे बढ़ाना है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी जोर दिया गया है कि अत्याधुनिक तकनीक से लैस भारतीय सुरक्षा बल इस नई चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ड्रोन जैमर, एंटी-ड्रोन स्वार्म और लेजर काउंटरमेजर्स आईईडी गिराने जैसी साजिशों को नाकाम करने के लिए तैनात हैं। इसके साथ ही, सटीक तोपखाने, मानव प्रदर्शन बढ़ाने वाले एक्सो-सूट और पैरा स्पेशल फोर्सेज की त्वरित प्रतिक्रिया इकाइयां हाइब्रिड फिदायीन हमलों और शहरी घेराबंदी जैसी स्थितियों से निपटने को तैयार हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर सेंसर ग्रिड और रणनीतिक हेलीकॉप्टर पैड त्वरित कार्रवाई को संभव बनाते हैं, जबकि साइबर यूनिट्स हवाला नेटवर्क और दुष्प्रचार अभियानों को बाधित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। भारतीय सशस्त्र बल जम्मू-कश्मीर में किसी भी प्रकार के हवाई समर्थन को रोकने के लिए आसमान की निगरानी कर रहे हैं और विदेशी खुफिया सूचनाओं के संभावित दुरुपयोग से भी सतर्क हैं।
--आईएएनएस
डीएससी
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