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(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)
इस्लामाबाद, 18 जनवरी (आईएएनएस)। स्थानीय मीडिया ने रविवार को कराची के तीन अस्पतालों और हैदराबाद के एक अस्पताल से मिले डेटा के हवाले से बताया कि 2025 में पाकिस्तान के सिंध प्रांत में मच्छर जनित बीमारियों से कुल 103 लोगों की मौत हुई, जिनमें से 23 लोगों की जान कराची के एक अस्पताल में मलेरिया की वजह से गई।
पाकिस्तान: पिछले साल सिंध में डेंगू और मलेरिया से गई 103 लोगों की जान, कराची का हाल सबसे खराब
अस्पतालों से मिले आंकड़े प्रांतीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा बताए गए आंकड़ों से अलग हैं, जिसमें दावा किया गया है कि डेंगू और मलेरिया से 33 लोगों की मौत हुई है। पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, चार अस्पतालों—इंडस हॉस्पिटल, आगा खान यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल (एकेयूएच), सिंध इन्फेक्शियस डिजीज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (एसआईडीएच एंड आरसी), और लियाकत यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल, हैदराबाद/जामशोरो (एलयूएच)—से जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, मलेरिया सहित मच्छर जनित बीमारियों से 103 लोगों की मौत हुई।
2025 में इंडस हॉस्पिटल में कुल 8,883 डेंगू के मामले सामने आए, जिनमें 40 मौतें हुईं। डॉन ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इनमें से 18 मरीज, जिन्हें गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था, इमरजेंसी विभाग में मर गए। इसके अलावा, अस्पताल में मलेरिया के 2,719 मरीज सामने आए, जिनमें से 23 लोगों की मौत हुई। इनमें से छह मरीजों की मौत अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में हुई।
मच्छर जनित बीमारियों के कुल 941 मामले सामने आए, जिनमें 651 डेंगू के और 290 मलेरिया के मामले शामिल थे। अस्पताल ने डेंगू बुखार से 14 मौतों की सूचना दी, जबकि मलेरिया से किसी मौत की सूचना नहीं मिली।
मीडिया आउटलेट एकेयूएच से व्यापक डेटा इकट्ठा नहीं कर सका। हालांकि, सूत्रों ने बताया कि पिछले साल जनवरी-अक्टूबर के बीच डेंगू से कम से कम छह मरीजों की मौत हुई। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, एसयूएच के सूत्रों ने बताया कि 2025 में अस्पताल में डेंगू बुखार से 25 लोगों की मौत हुई थी।
हालांकि, आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सिंध में डेंगू बुखार के 20,502 मामले सामने आए, जिनमें 33 मौतें हुईं, और इनमें से 90 प्रतिशत से अधिक मामले कराची में सामने आए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सिंध में मलेरिया के कुल 283,140 मामले सामने आए, जिनमें कोई मौत नहीं हुई।
इन अस्पतालों के सूत्रों ने बताया कि सरकार के पास डेटा को पारदर्शी तरीके से इकट्ठा करने की कोई प्रणाली नहीं थी। ऐसा सिंध में संचालित होने वाले अस्पतालों और लैब की दशा का हवाला देते हुए बताया गया। बड़ी संख्या में मरीजों ने सामान्य डॉक्टरों से सलाह ली जो छोटे क्लीनिक में इलाज करते हैं, और उनमें से कई की घर पर ही मौत हो गई, जिससे पता चलता है कि 2025 में देखा गया सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट जितना दिखाया गया था, उससे कहीं अधिक बड़ा और गंभीर था।
--आईएएनएस
केआर/
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