देश में भूजल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम, 39 लाख से ज्यादा वर्षा जल संचयन परियोजनाएं स्थापित की गईं

देश में भूजल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम, 39 लाख से ज्यादा वर्षा जल संचयन परियोजनाएं स्थापित की गईं

देश में भूजल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम, 39 लाख से ज्यादा वर्षा जल संचयन परियोजनाएं स्थापित की गईं

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IANS
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(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 22 जनवरी (आईएएनएस)। देश में भूजल को फिर से भरने के लिए बड़ी संख्या में काम किए जा रहे हैं। गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सितंबर 2024 में शुरू की गई कैच द रेन- जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) पहल के तहत अब तक 39.6 लाख से ज्यादा कृत्रिम भूजल रिचार्ज और जल संग्रहण परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।

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इस पहल का मकसद वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों को फिर से भरना, बोरवेल रिचार्ज और रिचार्ज शाफ्ट जैसे तरीकों से भूजल स्तर को सुधारना है, ताकि आने वाले समय में पानी की कमी न हो।

सरकार द्वारा तैयार भूजल कृत्रिम रिचार्ज मास्टर प्लान में अलग-अलग क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति के अनुसार रिचार्ज तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया गया है। इस योजना के तहत देशभर में लगभग 1.42 करोड़ वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज संरचनाएं बनाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि करीब 185 अरब घन मीटर भूजल को दोबारा भरा जा सके।

भूजल भारत की जल सुरक्षा का सबसे अहम आधार है। खेती, पीने का पानी, और पर्यावरण काफी हद तक भूजल पर निर्भर हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी निकालने, पानी की गुणवत्ता खराब होने, और जलवायु परिवर्तन के कारण भूजल पर दबाव बढ़ गया है, जिससे इसका सही और टिकाऊ प्रबंधन जरूरी हो गया है।

इसी को ध्यान में रखते हुए भारत ने नीति सुधार, वैज्ञानिक अध्ययन, ढांचा निर्माण और लोगों की भागीदारी पर आधारित एक व्यापक योजना अपनाई है। जल शक्ति मंत्रालय के नेतृत्व में देश भर में 43 हजार से ज्यादा भूजल निगरानी केंद्र, 712 जल शक्ति केंद्र और 53,264 अटल जल गुणवत्ता जांच केंद्र काम कर रहे हैं।

इसके अलावा अटल भूजल योजना (अटल जल) के तहत गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे जल संकट वाले राज्यों में सामुदायिक स्तर पर भूजल प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना के तहत अब तक 6.68 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में पानी का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया गया है।

25 दिसंबर 2019 को शुरू की गई यह योजना जल जीवन मिशन के तहत जल स्रोतों को टिकाऊ बनाने में मदद करती है। पांच साल की इस योजना पर कुल 6,000 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं, जिसमें संस्थागत मजबूती और बेहतर परिणामों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

इसके साथ ही मिशन अमृत सरोवर योजना, जो अप्रैल 2022 में शुरू हुई थी, के तहत देश के हर जिले में तालाब बनाए जा रहे हैं। हर तालाब कम से कम एक एकड़ क्षेत्र में फैला होता है और इसमें करीब 10,000 घन मीटर पानी संग्रहित किया जा सकता है। अब तक 68 हजार से ज्यादा तालाब पूरे हो चुके हैं।

भूजल पर मॉडल विधेयक, जल शक्ति अभियान, जल संचय जन भागीदारी, भूजल रिचार्ज मास्टर प्लान 2020, अटल भूजल योजना, और मिशन अमृत सरोवर जैसी योजनाएं मिलकर भूजल संरक्षण और इसकी निगरानी और सही उपयोग को मजबूत बना रही हैं।

सरकार द्वारा तैयार भूजल मॉडल विधेयक को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझा किया गया है। अब तक 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इसे अपनाया है, जिनमें बिहार, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं।

केंद्र सरकार राज्यों के साथ लगातार बैठकें, सेमिनार और सम्मेलनों के जरिए भूजल के सही इस्तेमाल और संरक्षण को बढ़ावा दे रही है। बढ़ते जल संकट को देखते हुए सरकार ने जलवायु परिवर्तन से निपटने और टिकाऊ विकास के लिए भूजल प्रबंधन को बेहद जरूरी बताया है।

--आईएएनएस

डीबीपी/डीकेपी

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