भारतीय वैज्ञानिकों ने बनाया एंटीबॉडी डिस्कवरी प्लेटफॉर्म, कैंसर और संक्रामक रोगों से लड़ाई में करेगा मदद

भारतीय वैज्ञानिकों ने बनाया एंटीबॉडी डिस्कवरी प्लेटफॉर्म, कैंसर और संक्रामक रोगों से लड़ाई में करेगा मदद

भारतीय वैज्ञानिकों ने बनाया एंटीबॉडी डिस्कवरी प्लेटफॉर्म, कैंसर और संक्रामक रोगों से लड़ाई में करेगा मदद

author-image
IANS
New Update
New indigenous antibody discovery platform to transform diagnostics in India

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

रुड़की, 20 जनवरी (आईएएनएस)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की के वैज्ञानिकों ने नेक्स्ट-जेनरेशन एंटीबॉडी डिस्कवरी प्लेटफॉर्म को डेवलप किया है। दावा है कि इसे बीमारी की पहचान और उपचार में बड़ा बदलाव आएगा। यह प्लेटफॉर्म संक्रामक रोगों, कैंसर, ऑटोइम्यून विकारों और उभरते पैथोजेन्स के लिए उच्च स्थिरता और मजबूत बंधन वाली एंटीबॉडीज की तेजी से पहचान करने में सक्षम है।

Advertisment

यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो स्थानीय स्तर पर उन्नत डायग्नोस्टिक टूल्स विकसित करने पर केंद्रित है।

इस रिसर्च में एक बहुत बड़ी, हाई-डाइवर्सिटी वाली सिंगल-डोमेन एंटीबॉडी (नैनोबॉडी) लाइब्रेरी का डेवलपमेंट शामिल है।

संक्रामक बीमारियों, कैंसर, ऑटोइम्यून डिसऑर्डर और उभरते पैथोजन से, यह प्लेटफॉर्म बहुत स्थिर और हाई-एफिनिटी एंटीबॉडी (जो टारगेट से बहुत मजबूती से जुड़ती हैं, जिससे वे अधिक सटीक और प्रभावी होती हैं) की तेजी से पहचान करने में मदद करता है।

डिस्कवरी के टाइम को काफी कम करके, यह खोज हेल्थकेयर रिस्पॉन्स में एक बड़ी कमी को पूरा करती है। खासकर आपातकालीन परिस्थिति में ये मददगार साबित होते हैं।

आईआईटी रुड़की के बायोसाइंसेज और बायोइंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रो. राजेश कुमार ने कहा, भारत में एक यूनिवर्सल, हाई-डाइवर्सिटी एंटीबॉडी डिस्कवरी सिस्टम डेवलप करके, हम बीमारियों के खिलाफ तेजी से वार करने की क्षमताओं को मजबूत कर रहे हैं और उन लोगों के लिए किफायती निदान और इलाज उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं जिन्हें इनकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

यह रिसर्च आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के विजन को फलीभूत करता है, जो कम और मध्यम आय वाले देशों के लिए बहुत जरूरी है, जहां समय पर और किफायती हेल्थकेयर समाधान तक पहुंच एक चुनौती बनी हुई है।

यह पहल स्वदेशी रिसर्च क्षमताओं को मजबूत करने, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी बनाने और इम्पोर्टेड बायोलॉजिक्स पर निर्भरता कम करती है। यह ट्रांसलेशनल रिसर्च (प्रयोगशाला की वैज्ञानिक खोज को सीधे मरीजों के इलाज के लिए लागू करना) को बढ़ावा देने, महामारी के लिए बेहतर तरीके से तैयार रहने और लंबे समय तक स्वास्थ्य सेवाओं को और शक्ति संपन्न बनाने के राष्ट्रीय प्रयासों को पूरा करती है।

आईआईटी रुड़की के डायरेक्टर प्रो. के. के. पंत ने कहा, यह डेवलपमेंट दिखाता है कि कैसे मूलभूत रिसर्च, ट्रांसलेशनल इरादे और इंडस्ट्री का सहयोग समाज की जरूरी चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं।

संस्थान ने कहा कि उसने आईएमजेनएक्स इंडिया के साथ एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया है ताकि सहयोगी रिसर्च, एडवांस्ड बायोलॉजिक्स के सह-विकास और एंटीबॉडी इंजीनियरिंग, निदान, चिकित्सा विज्ञान और बायोप्रोसेस डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में क्षमता निर्माण को बढ़ावा दिया जा सके।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Advertisment