हांगकांग, मलेशिया जैसे देशों से आगे निकला भारत, कर-से-जीडीपी अनुपात 19.6 प्रतिशत हुआ

हांगकांग, मलेशिया जैसे देशों से आगे निकला भारत, कर-से-जीडीपी अनुपात 19.6 प्रतिशत हुआ

हांगकांग, मलेशिया जैसे देशों से आगे निकला भारत, कर-से-जीडीपी अनुपात 19.6 प्रतिशत हुआ

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IANS
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India’s tax-to-GDP ratio reaches 19.6 pc, structural reforms key to further gains: Report

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। भारत का कर-से-जीडीपी अनुपात बढ़कर 19.6 प्रतिशत हो गया है, यह अन्य उभरते हुई बाजार हांगकांग, मलेशिया और इंडोनेशिया से अधिक है। यह जानकारी बैंक ऑफ बड़ौदा की एक रिपोर्ट में दी गई।

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अधिक कर-से-जीडीपी अनुपात दिखाता है कि देश में कर दक्षता बढ़ रही है और संग्रह में सुधार हो रहा है। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से किया जाने वाला कर संग्रह शामिल है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि भारत का केंद्रीय सकल कर राजस्व जीडीपी के 11.7 प्रतिशत पर कम है, लेकिन समग्र एकीकृत आंकड़ा राज्यों की मजबूत भागीदारी और पूरे सिस्टम में बेहतर अनुपालन को दर्शाता है।

हालांकि, अभी भी भारत का कर-से-जीडीपी अनुपात जर्मनी के 38 प्रतिशत और अमेरिका के 25.6 प्रतिशत से काफी कम है।

बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा कि विशेष रूप से इसकी अनुकूल जनसांख्यिकीय स्थिति को देखते हुए, यह अंतर भारत के लिए एक बड़ा नीतिगत अवसर प्रस्तुत करता है।

रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार सरलीकरण, युक्तिकरण और डिजिटलीकरण के उद्देश्य से व्यापक कर सुधारों पर तेजी से ध्यान केंद्रित कर रही है।

इन प्रयासों से आने वाले वर्षों में कर-से-जीडीपी अनुपात में वृद्धि होने की उम्मीद है।

आयकर अधिनियम, 2025 की शुरुआत और कॉर्पोरेट कर संरचनाओं का सरलीकरण सहित प्रमुख नियामकीय कदमों से पारदर्शिता में सुधार और अनुपालन में आसानी होने की उम्मीद है।

नया आयकर अधिनियम, जो 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होने वाला है, अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के अधिक हिस्से को औपचारिक प्रणाली में लाकर कर आधार को व्यापक बनाने की भी उम्मीद है।

रिपोर्ट में कहा गया कि ऐतिहासिक विश्लेषण से पता चलता है कि समय के साथ कर संग्रह और नॉमिनल जीडीपी में निकटता बढ़ने लगी है।

रिपोर्ट में बताया गया कि आयकर संग्रह का नॉमिनल जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय दोनों के साथ मजबूत सहसंबंध दिखता है - जो बढ़ती आय और बेहतर अनुपालन को दर्शाता है।

कंपनियों को बेहतर मुनाफे से कॉर्पोरेट कर संग्रह को भी लाभ हुआ है, और ऐतिहासिक रुझानों की तुलना में इसमें मजबूती का स्तर बरकरार है।

--आईएएनएस

एबीएस/

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