भारत का कर संग्रह बढ़ेगा, आने वाले बजट में जारी रह सकता है राजकोषीय समेकन : रिपोर्ट

भारत का कर संग्रह बढ़ेगा, आने वाले बजट में जारी रह सकता है राजकोषीय समेकन : रिपोर्ट

भारत का कर संग्रह बढ़ेगा, आने वाले बजट में जारी रह सकता है राजकोषीय समेकन : रिपोर्ट

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IANS
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India's tax collection to rise, fiscal consolidation to continue in upcoming Budget: Report

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 7 जनवरी (आईएएनएस)। भारत का कर संग्रह वित्त वर्ष 27 में बढ़ेगा और सकल कर उछाल बढ़कर 1.1 तक पहुंच सकता है, जो कि वित्त वर्ष 26 में 0.64 था। यह जानकारी बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।

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एचडीएफसी बैंक की रिपोर्ट में कहा गया कि नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 27 में 10.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो कि वित्त वर्ष 26 में 8.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट में बताया गया कि सरकार का पूंजीगत खर्च वित्त वर्ष 27 में 10.5 प्रतिशत बढ़कर 11.5-12 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमा है, जबकि इस दौरान राजस्व खर्च 9.5 प्रतिशत बढ़कर 41.9 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है।

सरकार वित्त वर्ष 26 के लिए निर्धारित 4.4 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य प्राप्त कर सकती है। घाटा लगभग 15.79 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जबकि बजट अनुमान 15.69 लाख करोड़ रुपए था।

रिपोर्ट में कहा गया कि आने वाले केंद्रीय बजट 2026-27 में राजकोषीय समेकन जारी रहेगा, जिसमें वित्त वर्ष 27 के लिए 4.2 प्रतिशत का लक्ष्य रखा जा सकता है, जबकि वित्त वर्ष2 6 में यह 4.4 प्रतिशत था। रिपोर्ट में आने वाले बजट में डेट/जीडीपी रेश्यो 55.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 26 के लिए जारी किए बजट अनुमान में यह 56.1 प्रतिशत था।

सरकारी बॉन्ड की अधिक आपूर्ति से मांग/आपूर्ति में अंतर बना रहेगा, जिससे वित्त वर्ष27 में लगभग 4-4.5 लाख करोड़ रुपए की ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) खरीदारी की गुंजाइश बनेगी और 10 साल की यील्ड 6.5-6.7 प्रतिशत की रेंज में ऊंची बनी रहेगी।

एक थिंक टैंक फोरम की हालिया रिपोर्ट में आने वाले आम बजट में पीक डायरेक्ट टैक्स दरों को फ्रीज करने, टेक्नोलॉजी के जरिए डायरेक्ट टैक्स बेस का विस्तार करने, एमआरपी-आधारित टैक्सेशन से बचने और जीएसटी क्रेडिट चेन को पूरा करने को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

इसमें यह भी कहा गया है कि बजट में टैक्स न्यूट्रैलिटी को बहाल करने और इंडस्ट्री के लिए कैस्केडिंग लागत को कम करने के लिए पेट्रोलियम, बिजली और अन्य बाहर रखे गए इनपुट को जीएसटी के तहत लाने के लिए एक चरणबद्ध रोडमैप बताया जाना चाहिए।

--आईएएनएस

एबीएस/

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