भारत ने यूएन में कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के सेल्फ डिटरमिनेशन कॉन्सेप्ट की आलोचना की

भारत ने यूएन में कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के सेल्फ डिटरमिनेशन कॉन्सेप्ट की आलोचना की

भारत ने यूएन में कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के सेल्फ डिटरमिनेशन कॉन्सेप्ट की आलोचना की

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IANS
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Eldos Punoose, a counsellor at India’s United Nations Mission. Speaks at the General Assembly on Thursday, January 15, 2026. (Photo Source: UN)

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

संयुक्त राष्ट्र, 16 जनवरी (आईएएनएस)। एक बार फिर से पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का राग अलापा। वहीं, भारत ने भी एक बार फिर से पाकिस्तान की आलोचना की। भारत ने कहा कि वह कश्मीर के मुद्दे पर झूठ बोलकर लोकतांत्रिक और बहुलवादी देशों पर हमला करने के लिए आत्मनिर्णय की अवधारणा का गलत इस्तेमाल कर रहा है।

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भारत के यूएन मिशन के काउंसलर एल्डोस पुनूस ने गुरुवार को जनरल असेंबली में कहा, “ऐसे समय में जब सदस्य देशों को अपनी छोटी सोच से ऊपर उठना होगा, पाकिस्तान यूएन में अपने बांटने वाले एजेंडे को चलाने के लिए सभी प्लेटफॉर्म और प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल कर रहा है।”

उन्होंने कहा, “खुद फैसला करने का अधिकार यूएन चार्टर में शामिल एक बुनियादी सिद्धांत है। हालांकि, इस अधिकार का गलत इस्तेमाल अलग-अलग सोच वाले और लोकतांत्रिक देशों में अलगाव को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश, भारत का एक अहम और अविभाज्य हिस्सा है।”

दरअसल, असेंबली पिछले साल यूएन के काम पर सेक्रेटरी-जनरल एंटोनियो गुटेरेस की रिपोर्ट पर चर्चा कर रही थी। इस दौरान पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने कश्मीर का जिक्र किया। अब भले ही असेंबली में चर्चा का मुद्दा जो भी हो, पाकिस्तान हमेशा ही कश्मीर का राग अलापता रहता है। कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के पुराने राग को भले ही दूसरे सदस्य नजरअंदाज कर दें, लेकिन वह फिर भी एक ही बात दोहराता रहता है।

पुनूस ने कहा, “यह फोरम भी कोई अलग नहीं है, और पाकिस्तान ने जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश का बेवजह जिक्र किया, जो भारत का एक जरूरी और अविभाज्य हिस्सा है। हालांकि पाकिस्तान को इसकी आदत हो गई है, लेकिन अच्छा होगा अगर वह बेबुनियाद आरोपों और झूठ का सहारा न ले और ऐसी तस्वीर न दिखाए जो असलियत से पूरी तरह अलग हो।”

अहमद ने फिलिस्तीनी लोगों के लिए सेल्फ-डिटरमिनेशन की बात की और इसी दौरान उन्होंने कश्मीर का जिक्र भी कर दिया। उन्होंने यूएन रेजोल्यूशन के सम्मान की बात की। बता दें, 21 अप्रैल, 1948 को अपनाया गया संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 47 मांग करता है कि पाकिस्तान पूरे कश्मीर से अपनी सेना और घुसपैठियों को वापस बुला ले।

भारत का कहना है कि कश्मीर में जनमत संग्रह अब बेमतलब है क्योंकि कश्मीर के लोगों ने चुनावों में हिस्सा लेकर और इलाके के नेताओं को चुनकर भारत के प्रति अपनी वफादारी साफ कर दी है।

अहमद ने यूएन सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता बढ़ाने के पाकिस्तान के विरोध को दोहराया। इसकी सबसे बड़ी वजह सिर्फ भारत से दुश्मनी है। हालांकि, इस मुद्दे पर यूएन के ज्यादातर सदस्य, खासकर अफ्रीकी देश, पाकिस्तान से इत्तेफाक नहीं रखते हैं।

--आईएएनएस

केके/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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