भारत ने पाकिस्तान की 'अल्पसंख्यकों के दमन' वाली टिप्पणियों को खारिज किया, याद दिलाया उसका भयावह रिकॉर्ड

भारत ने पाकिस्तान की 'अल्पसंख्यकों के दमन' वाली टिप्पणियों को खारिज किया, याद दिलाया उसका भयावह रिकॉर्ड

भारत ने पाकिस्तान की 'अल्पसंख्यकों के दमन' वाली टिप्पणियों को खारिज किया, याद दिलाया उसका भयावह रिकॉर्ड

author-image
IANS
New Update
Look at your record before commenting on others: India slams Pakistan on minorities

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 9 जनवरी (आईएएनएस)। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने पाकिस्तान को अपने गिरेबां में झांकने की सलाह दी है। पाकिस्तान ने आरोप लगाया था कि भारत में मुस्लिम विरासत को मिटाने की कोशिश की जा रही है, जिसका जवाब उसे शुक्रवार को मिल गया। साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान को दूसरों के बारे में टिप्पणी करने से पहले अपने देश में अल्पसंख्यकों की हालत देख लेनी चाहिए।

Advertisment

नई दिल्ली में तोड़फोड़ की कार्रवाई के बारे में पाकिस्तान फॉरेन ऑफिस (पीएफओ) प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी की हालिया टिप्पणी पर जायसवाल ने कहा, मुझे आपको विस्तार से बताने या यह बताने की जरूरत नहीं है कि उस देश में अल्पसंख्यकों की क्या हालत है, और जो लोग ऐसी टिप्पणी करते हैं, उन्हें दूसरों पर टिप्पणी करने से पहले अपना रिकॉर्ड देख लेना चाहिए।

अंद्राबी की टिप्पणी दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास गैर-कानूनी कब्जों को हटाने के लिए की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई के बाद की गई थी। दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (एमसीडी) के अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक मस्जिद और आस-पास के इलाकों से गैर-कानूनी ढांचा हटाने के लिए की गई थी।

पिछले महीने, भारत ने भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा पर इस्लामाबाद की टिप्पणी को साफ तौर पर खारिज कर दिया था, साथ ही धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करने के पाकिस्तान के बहुत खराब रिकॉर्ड पर भी रोशनी डाली थी।

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता की बातों पर एमईए की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया, हम उस देश की कही गई बातों को खारिज करते हैं जिसका इस मामले में बहुत बुरा रिकॉर्ड है। पाकिस्तान का अलग-अलग धर्मों के अल्पसंख्यकों पर भयानक और प्रणालीगत अत्याचार करना एक जानी-मानी बात है। किसी पर भी उंगली उठाने से यह बात मिट नहीं सकती।

पिछले साल, नई दिल्ली में मौजूद इंटरनेशनल सेंटर फॉर पीस स्टडीज की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर ज़ुल्म, खासकर हिंदुओं को लगातार दोयम दर्जे का नागरिक बताना, इस्लाम का गलत इस्तेमाल और राजनीतिक फायदे के लिए भारत विरोधी भावना, देश की राष्ट्रीय पहचान में बड़े विरोधाभासों को दिखाते हैं।

लाहौर के सेंटर फॉर सोशल जस्टिस का हवाला देते हुए, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2024 में ईशनिंदा के 344 मामले दर्ज किए गए, और 2021–2024 के बीच 421 अल्पसंख्यक महिलाओं और लड़कियों (जिनमें ज्यादातर हिंदू और ईसाई थीं और 71 प्रतिशत नाबालिग थीं) का जबरदस्ती धर्म बदलवाया गया।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Advertisment