'इंडिया एनर्जी वीक 2026' का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा और निवेश बढ़ाने पर केंद्रित रहेगा

'इंडिया एनर्जी वीक 2026' का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा और निवेश बढ़ाने पर केंद्रित रहेगा

'इंडिया एनर्जी वीक 2026' का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा और निवेश बढ़ाने पर केंद्रित रहेगा

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IANS
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Goa: Prime Minister Narendra Modi with Goa Chief Minister Pramod Sawant and others at the inauguration of India Energy Week 2024

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 6 जनवरी (आईएएनएस)। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि ‘इंडिया एनर्जी वीक 2026’ का आयोजन 27 से 30 जनवरी तक गोवा में किया जाएगा। इस कार्यक्रम में दुनिया भर के मंत्री, बड़ी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नीति निर्माता, वित्तीय संस्थान, शिक्षाविद और तकनीकी विशेषज्ञ भाग लेंगे।

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यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है, जब पूरी दुनिया में ऊर्जा क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। यह आयोजन साल 2026 की पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बैठक होगी, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, निवेश को बढ़ावा देने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के व्यावहारिक तरीकों पर चर्चा की जाएगी।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि इंडिया एनर्जी वीक (आईईडब्ल्यू) 2026 संवाद और सहयोग का एक बड़ा मंच बनेगा। पिछले आयोजनों की सफलता को देखते हुए इस बार 120 से अधिक देशों से लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

साल 2025 के आयोजन में 68,000 से ज्यादा लोग, 570 प्रदर्शक और 5,400 सम्मेलन प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इसमें 100 से ज्यादा सत्र हुए थे, जिनमें 540 से अधिक वैश्विक वक्ताओं ने भाग लिया था। वहीं, 2026 का यह आयोजन उससे भी बड़ा होने वाला है।

इंडिया एनर्जी वीक 2026 का आयोजन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा किया जाता है। इसे भारतीय पेट्रोलियम उद्योग महासंघ और डीएमजी इवेंट्स मिलकर आयोजित करते हैं। यह प्लेटफॉर्म ऊर्जा सुरक्षा, सस्ती ऊर्जा और टिकाऊ विकास पर वैश्विक सहयोग का अवसर देता है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक 2025 के अनुसार, साल 2050 तक दुनिया में बढ़ने वाली ऊर्जा मांग का 23 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अकेले भारत का होगा, जो किसी भी देश से ज्यादा है।

इसी कारण इंडिया एनर्जी वीक 2026 में नीति निर्माता और उद्योग जगत के लीडर्स मिलकर मजबूत ऊर्जा प्रणाली बनाने और स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ने पर विचार करेंगे।

भारत का इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण बन चुका है। इससे अब तक 1.59 लाख करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा की बचत, 813 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी, 270 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल की बचत, तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) द्वारा इथेनॉल उत्पादकों को 2.32 लाख करोड़ रुपए का भुगतान और किसानों को सीधे 1.39 लाख करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है।

भारत ने अपनी दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के लिए घरेलू स्तर पर खोज और बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है। साल 2014 में जहां 52,000 पेट्रोल पंप थे, वहीं 2025 तक यह संख्या 1 लाख से ज्यादा हो गई। सीएनजी स्टेशनों की संख्या करीब 968 से बढ़कर 8,477 से अधिक हो गई है, जबकि पीएनजी घरेलू कनेक्शन की संख्या 25 लाख से बढ़कर 1.59 करोड़ से अधिक हो गई है।

इसके अलावा गैस पाइपलाइन नेटवर्क में भी लगभग 66 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है और यह 25,923 किलोमीटर से अधिक लंबा हो गया है। अब शहरी गैस वितरण (सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन) की पहुंच द्वीपों को छोड़कर पूरे देश में है। दुनिया भर में ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत ने उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की कीमतों में स्थिरता बनाए रखी है।

--आईएएनएस

डीबीपी/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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