बांग्लादेश में एलपीजी संकट, अवामी लीग ने 'सरकार की अनदेखी' को ठहराया जिम्मेदार

बांग्लादेश में एलपीजी संकट, अवामी लीग ने 'सरकार की अनदेखी' को ठहराया जिम्मेदार

बांग्लादेश में एलपीजी संकट, अवामी लीग ने 'सरकार की अनदेखी' को ठहराया जिम्मेदार

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IANS
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Gas crisis across Bangladesh direct outcome of state neglect, says Awami League

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

ढाका, 20 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश इन दिनों एक और नए संकट की गिरफ्त में है। आफत आम लोगों की रोटी पर है। देश एलपीजी संकट से जूझ रहा है। अवामी लीग ने इसकी वजह सत्ता की अनदेखी को बताया है।

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पार्टी ने मंगलवार को कहा कि पूरे बांग्लादेश में हो रहा गैस संकट मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की लापरवाही का सीधा नतीजा है, जिसने सुधार की आड़ में एक जरूरी पब्लिक सर्विस का बुरा हाल कर दिया है।

पार्टी के अनुसार, बांग्लादेश का ये मौजूदा संकट अचानक नहीं पेश आया; ये किसी वैश्विक परिस्थिति के कारण या आपूर्ति की समस्या से नहीं हुआ, बल्कि इसे टाला जा सकता था। जो हुआ है वो शासन की विफलता है और यूनुस सरकार के कुशासन का एक और उदाहरण है।

अवामी लीग ने अपने बयान में कहा, यह संकट रातों-रात पैदा नहीं हुआ। बांग्लादेश ने हाल के वर्षों में इससे कहीं ज्यादा बड़े ग्लोबल एनर्जी संकटों का सामना किया है और फिर भी सिस्टम को पूरी तरह से गिरने से रोकने में कामयाब रहा है। हालांकि, आज गैस की कमी बनी हुई है, उपभोक्ता पैसे देने को तैयार है, आयात में कोई दिक्कत नहीं है, इसके बावजूद एलपीजी सिलेंडर बाजार से गायब हैं, और सप्लाई चेन साफ ​​तौर पर अव्यवस्थित हैं। ये कमी के लक्षण नहीं हैं; ये प्रशासनिक पक्षाघात के लक्षण हैं।

पार्टी ने कहा कि असल में यह संसाधनों की विफलता नहीं, बल्कि नेतृत्व की विफलता है। आगे कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के तहत, कमी का पूर्वानुमान लगाया गया था और एलएनजी आयात, एलपीजी और सीएनजी सब्सिडी और सक्रिय सरकारी हस्तक्षेप के जरिए इसे मैनेज किया गया था; लेकिन, यूनुस सरकार के तहत इसे बिल्कुल छोड़ दिया गया है।

अवामी लीग ने आगे कहा, सरकार सुधारों के बारे में जोर-शोर से बात करती रहती है, लेकिन शासन के सबसे बुनियादी काम में विफल रही है, और वह है देश को सही तरीके से चलाना! इसका नतीजा यह हुआ है कि गैस संकट गहरा गया है, जिससे पता चलता है कि कैसे एक मैनेज की जा सकने वाली चुनौती को राष्ट्रीय आपातकाल में बदल दिया गया। एक ऐसा संकट जो होना ही नहीं चाहिए था!

पार्टी ने सिस्टम की विफलता को रेखांकित करते हुए आगे कहा, गैस संकट शॉर्ट-टर्म रुकावट से आगे बढ़कर सिस्टम की विफलता के चरण में पहुंच गया है। मौजूदा बुनियादी ढांचों और आयात चैनलों के बावजूद, यूनुस प्रशासन आपूर्ति मैनेज करने, बाजारों को नियंत्रित करने, या निरंतरता सुनिश्चित करने में विफल रहा है, जिससे एनर्जी तक पहुंच अनिश्चितता में बदल गई है।

अवामी लीग ने इस बात पर जोर दिया कि 2024 में सत्ता संभालने के बाद से, यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने गैस खरीद में कोई ठोस सुधार नहीं किया है, एलएनजी फाइनेंसिंग का कोई पुनर्गठन नहीं किया है, एलपीजी और सीएनजी बाजारों के लिए कोई स्थिरीकरण तंत्र नहीं बनाया है, और घरेलू गैस खोज का विस्तार करने के लिए कोई पहल नहीं की है।

उसने कहा कि सप्लाई प्लानिंग तदर्थ बनी रही, स्टोरेज बफर की उपेक्षा की गई, और बाजार की निगरानी कमजोर हो गई।

पार्टी ने कहा, व्यवहार में, सुधार देरी को छिपाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक नारा बन गया है। जबकि सरकार ने लॉन्ग-टर्म बदलाव की बात की, वह शासन के तत्काल काम में विफल रही: ऊर्जा बचाने, सामने की चुनौती को मैनेज करने, और सिस्टम को टूटने से रोकने में ये सरकार फेल हुई है। मौजूदा गैस संकट सुधार का ट्रांजिशन कॉस्ट नहीं है; यह कुछ भी न करने का नतीजा है।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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