डर और कागज़ी बाधाएं रोक रही पाकिस्तानी महिलाओं का इलाज: रिपोर्ट

डर और कागज़ी बाधाएं रोक रही पाकिस्तानी महिलाओं का इलाज: रिपोर्ट

डर और कागज़ी बाधाएं रोक रही पाकिस्तानी महिलाओं का इलाज: रिपोर्ट

author-image
IANS
New Update
Pakistan,dengue fever,dengue,fever,Patients affected with dengue fever are treated inside mosquito nets at a hospital in Islamabad,

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

इस्लामाबाद, 10 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान में महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में गरीबी से भी अधिक बड़ी बाधाएं- उचित दस्तावेज़ों की कमी, भय, हाशिए पर रखा जाना और लैंगिक असमानता बनी हुई हैं। यह बात एक मीडिया रिपोर्ट में सामने आई है।

Advertisment

डॉन अखबार में लिखे लेख में वकील और इमकान वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन की संस्थापक-सीईओ ताहेरा हसन ने बताया कि पाकिस्तान में पुरुषों की तुलना में महिलाओं के पास पहचान संबंधी दस्तावेज कम होते हैं। दस्तावेज हासिल करने या उन्हें प्रस्तुत करने के लिए वे अक्सर पुरुष परिजनों पर निर्भर रहती हैं।

हसन के मुताबिक, “पहचान दस्तावेजों की अनुपस्थिति, प्रतिबंधात्मक सामाजिक मानदंडों और संस्थागत शक्ति असंतुलन के साथ मिलकर महिलाओं को सार्वजनिक सेवाओं से व्यवस्थित रूप से बाहर कर देती है।”

उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्तर पर संचालित एक मैटरनिटी होम से मिले अनुभव बताते हैं कि महिलाओं द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं से दूरी बनाने का कारण जागरूकता की कमी नहीं, बल्कि भय, प्रशासनिक बहिष्करण और ऐसे तंत्र से जूझने की आर्थिक, सामाजिक व भावनात्मक लागत है, जो उनके लिए डिज़ाइन ही नहीं किया गया।

रिपोर्ट में बताया गया कि जब दस्तावेज़ नहीं होते, तो महिलाओं को विशेषकर प्रसूति सेवाओं में अपमान का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में उन्हें इलाज से मना कर दिया जाता है या उनसे पूछताछ की जाती है और सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा किया जाता है। ऐसी घटनाओं की कहानियां समुदायों में तेजी से फैलती हैं, जिससे औपचारिक स्वास्थ्य सेवाओं से सामूहिक रूप से दूरी बढ़ती है।

परंपरागत दाइयों पर निर्भरता और घर पर प्रसव की प्रवृत्ति अब भी व्यापक है, क्योंकि संस्थागत स्वास्थ्य व्यवस्था को अक्सर संरक्षण के बजाय दंडात्मक अनुभव के रूप में देखा जाता है। खासकर पुरुष-प्रधान और भीड़भाड़ वाले सरकारी अस्पतालों में दुर्व्यवहार के डर से महिलाएं घर पर प्रसव को प्राथमिकता देती हैं।

हसन ने कहा, “भले ही सेवाएं कागज़ों पर मुफ्त हों, लेकिन यात्रा खर्च, रेफरल के कारण बार-बार आना-जाना, जांच शुल्क और घर या आय अर्जन के काम से दूर रहने का समय—ये सब मिलकर कम आय वाले परिवारों के लिए एक अस्पताल यात्रा को भी भारी बोझ बना देते हैं।”

निजी स्वास्थ्य सेवाएं भी राहत नहीं देतीं, क्योंकि उनकी लागत अधिक है। इसके साथ ही प्रसव के अत्यधिक चिकित्साकरण को लेकर चिंता बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, कई परिवारों का कहना है कि सामान्य प्रसव संभव होने पर भी उन्हें सिज़ेरियन ऑपरेशन की ओर धकेला जाता है।

हसन ने स्पष्ट किया, “महिलाएं इसलिए स्वास्थ्य सेवाओं से नहीं बचतीं कि वे लापरवाह हैं या आधुनिक चिकित्सा के खिलाफ हैं। वे इसलिए बचती हैं क्योंकि यह प्रणाली उन्हें अपमान, आर्थिक दबाव और प्रशासनिक जोखिमों के सामने खड़ा करती है।”

उन्होंने कहा कि केवल जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं हैं। जरूरत एक ऐसी स्वास्थ्य प्रणाली के डिज़ाइन की है जो दस्तावेज़ों को बाधा के रूप में पहचान करे, लैंगिक शक्ति असंतुलन को संबोधित करे और गरिमा को देखभाल का अनिवार्य हिस्सा माने।

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Advertisment