एमएसएमई निर्यात को बढ़ाने के लिए सरकार ने एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के दो और घटकों को लॉन्च किया

एमएसएमई निर्यात को बढ़ाने के लिए सरकार ने एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के दो और घटकों को लॉन्च किया

एमएसएमई निर्यात को बढ़ाने के लिए सरकार ने एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के दो और घटकों को लॉन्च किया

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IANS
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Centre rolls out two key finance schemes to boost MSME exports

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 2 जनवरी (आईएएनएस)। सरकार ने एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत आने वाली निर्यात प्रोत्साहन सब स्कीम के दो नए घटकों को लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य देश के एमएसएमई निर्यात को मजबूत करना और छोटे व्यापारियों के लिए किफायती क्रेडिट तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना है। यह जानकारी वाणिज्य मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को दी गई।

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पहला घटक प्री- और पोस्ट-शिपमेंट एक्सपोर्ट क्रेडिट के लिए इंटरेस्ट सबवेंशन से जुड़ा है, जिसका मकसद एक्सपोर्ट क्रेडिट की लागत को कम करना और एमएसएमई निर्यातकों को होने वाली वर्किंग-कैपिटल की दिक्कतों को कम करना है। इस कदम के तहत, पात्र क्रेडिट संस्थानों द्वारा दिए गए प्री और पोस्ट-शिपमेंट रुपए एक्सपोर्ट क्रेडिट पर इंटरेस्ट सबवेंशन दिया जाएगा।

इंटरेस्ट सबवेंशन सरकारी सब्सिडी होती है, जिससे लोन की ब्याज दर कम हो जाती है।

मंत्रालय ने बताया कि इन योजना में 2.75 प्रतिशत की बेसिक इंटरेस्ट सबवेंशन दी गई है, जिसमें ऑपरेशनल तैयारी के आधार पर, नोटिफाइड अंडर-रिप्रेजेंटेड या उभरते बाजारों में एक्सपोर्ट के लिए अतिरिक्त इंसेंटिव का भी प्रावधान है।

बयान में कहा गया है कि ब्याज सबवेंशन सिर्फ हार्मोनाइज्ड सिस्टम के छह-डिजिट लेवल पर टैरिफ लाइनों की नोटिफाइड पॉजिटिव लिस्ट के तहत आने वाले निर्यात पर लागू होगा, जिसमें भारत की लगभग 75 प्रतिशत टैरिफ लाइनें शामिल हैं और जो एमएसएमई की ज्यादा भागीदारी को दिखाता है।

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए हर फर्म के लिए प्रति निर्यातक 50 लाख रुपए की सालाना लिमिट तय की गई है। लागू दरों की समीक्षा हर छह महीने में मार्च और सितंबर में घरेलू और ग्लोबल बेंचमार्क को ध्यान में रखते हुए की जाएगी।

बयान में बताया गया कि पॉजिटिव लिस्ट एक पारदर्शी और डेटा-आधारित तरीके का इस्तेमाल करके तैयार की गई है, जिसमें ज्यादा लेबर वाले और अधिक पूंजी वाले सेक्टर, एमएसएमई की संख्या और वैल्यू एडिशन को प्राथमिकता दी गई है, जबकि प्रतिबंधित और मना की गई चीजों, कचरे और स्क्रैप, और ओवरलैपिंग इंसेंटिव स्कीम के तहत आने वाले प्रोडक्ट्स को बाहर रखा गया है। रणनीतिक एक्सपोर्ट को सपोर्ट करने के लिए डिफेंस और एससीओएमईटी-नोटिफाइड प्रोडक्ट्स को शामिल किया गया है। इस पहल के लिए विस्तृत ऑपरेशनल गाइडलाइंस भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी की जाएंगी। एक पायलट रोलआउट किया जाएगा, जिसमें लागू करने के फीडबैक के आधार पर सुधार की गुंजाइश होगी।

निर्यात प्रोत्साहन के तहत दूसरा घटक निर्यात क्रेडिट के लिए कोलैटरल सपोर्ट से जुड़ा है, जिसका मकसद एमएसएमई निर्यातकों को होने वाली दिक्कतों को दूर करना और बैंक फाइनेंस तक उनकी पहुंच को बेहतर बनाना है।

इस कदम के तहत, क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज के साथ पार्टनरशिप में निर्यात क्रेडिट के लिए कोलैटरल गारंटी सपोर्ट शुरू किया जा रहा है। माइक्रो और स्मॉल निर्यातकों को 85 प्रतिशत तक और मीडियम निर्यातकों को 65 प्रतिशत तक की गारंटी कवरेज दी जाएगी, जिसमें एक फाइनेंशियल ईयर में प्रति निर्यातक अधिकतम 10 करोड़ रुपए का आउटस्टैंडिंग गारंटीड एक्सपोजर होगा।

बयान में कहा गया है कि इन दोनों घटकों को पायलट बेसिस पर लगातार मॉनिटरिंग और डेटा-आधारित सुधारों के साथ लागू किया जाएगा। एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के जरिए, सरकार का लक्ष्य निर्यात की लागत को कम करना, फाइनेंस तक पहुंच बढ़ाना, भारत के एक्सपोर्ट ब्रांड को मजबूत करना और एक्सपोर्ट मार्केट में विविधता लाना है, जिससे भारतीय एक्सपोर्टर्स, खासकर एमएसएमई, ग्लोबल वैल्यू चेन में और गहराई से जुड़ सकें और लगातार एक्सपोर्ट-आधारित ग्रोथ में योगदान दे सकें।

--आईएएनएस

एबीएस/

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