बांग्लादेश का जूट उद्योग वैश्विक बाजार में अपनी बढ़त लगातार खो रहा है : बीजेएसए

बांग्लादेश का जूट उद्योग वैश्विक बाजार में अपनी बढ़त लगातार खो रहा है : बीजेएसए

बांग्लादेश का जूट उद्योग वैश्विक बाजार में अपनी बढ़त लगातार खो रहा है : बीजेएसए

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IANS
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Bangladesh’s jute industry losing global edge due to high costs, outdated technology: BJSA chairman

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 4 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश जूट स्पिनर्स एसोसिएशन (बीजेएसए) के अध्यक्ष तापश प्रमाणिक के अनुसार, बांग्लादेश का जूट उद्योग वैश्विक बाजार में अपनी बढ़त लगातार खो रहा है, क्योंकि ज्यादा उत्पादन लागत, पुरानी मशीनरी और कम उत्पादकता इस क्षेत्र को लगातार नीचे खींच रही है।

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द डेली स्टार को दिए एक साक्षात्कार में प्रमाणिक ने कहा कि बांग्लादेश की जूट मिलें अन्य देशों की उन प्रतिस्पर्धी कंपनियों से मुकाबला करने के लिए संघर्ष कर रही हैं। अन्य देशों ने अपने कारखानों का आधुनिकीकरण किया है और बेहतर तकनीक और दक्षता के माध्यम से लागत में कम कमी की है।

उन्होंने कहा कि महंगी बिजली, लोन पर ज्यादा ब्याज दरें और पुरानी मशीनों ने जूट उत्पादों को महंगा बना दिया है, जिससे सिंथेटिक फाइबर और अन्य प्राकृतिक विकल्पों के मुकाबले उनकी स्थिति कमजोर हो गई है।

उन्होंने बताया कि हालांकि जूट को कभी इस क्षेत्र का गोल्डन फाइबर कहा जाता था, लेकिन वैश्विक बाजार के रुझानों के साथ उद्योग के विकसित न होने के कारण समय के साथ इसका महत्व कम हो गया है।

उन्होंने कहा कि आज भी जूट का अधिकांश निर्यात धागे, हेसियन और बोरियों जैसे पारंपरिक उत्पादों पर निर्भर है, जबकि अंतरराष्ट्रीय खरीदार पर्यावरण के अनुकूल जूट उत्पादों की तलाश कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि बांग्लादेश अनुसंधान एवं विकास, उत्पाद डिजाइन और जूट आधारित नए उत्पादों के व्यावसायिक उपयोग में पिछड़ गया है।

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को अक्सर एक विरासत उद्योग के रूप में देखा जाता है जिसे संरक्षण की आवश्यकता है, न कि एक आधुनिक कृषि-औद्योगिक मूल्य श्रृंखला के रूप में जिसे दीर्घकालिक विकास के लिए पुनर्निर्मित किया जाना चाहिए।

जूट के पर्यावरणीय लाभों के बावजूद, उन्होंने कहा कि संरचनात्मक कमजोरियों, नीतिगत कमियों और बाजार संबंधी चुनौतियों के कारण यह उद्योग अपनी पुरानी प्रतिष्ठा को पुनः प्राप्त नहीं कर पाया है।

उन्होंने आगे कहा कि सरकारी पहलें सार्थक परिवर्तन लाने के बजाय खंडित और अल्पकालिक ही रही हैं।

रेडीमेड गारमेंट्स (आरएमजी) क्षेत्र के साथ अंतर बताते हुए प्रमाणिक ने कहा कि निरंतर नीतिगत समर्थन, आधुनिक मशीनरी, बेहतर उत्पादकता, वित्त की आसान उपलब्धता और निरंतर अनुसंधान एवं विकास के कारण आरएमजी बांग्लादेश का शीर्ष निर्यात उद्योग बन गया है।

इन कारकों ने वस्त्र निर्यातकों को वैश्विक बाजारों में तेजी से एकीकृत होने और ज्यादा लाभ अर्जित करने में मदद की है।

इसके विपरीत, जूट क्षेत्र कम मूल्य वाले थोक निर्यात, पुरानी तकनीक, वित्तीय संकट और कमजोर संस्थागत समर्थन में फंसा हुआ है।

परिणामस्वरूप, जूट और जूट उत्पादों से निर्यात आय एक दशक से अधिक समय से 900 मिलियन डॉलर और 1 बिलियन डॉलर के बीच स्थिर बनी हुई है।

--आईएएनएस

एमएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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