भारत के खिलाफ पाकिस्तान के गुप्त अभियानों का गेटवे बन रहा बांग्लादेश: रिपोर्ट

भारत के खिलाफ पाकिस्तान के गुप्त अभियानों का गेटवे बन रहा बांग्लादेश: रिपोर्ट

भारत के खिलाफ पाकिस्तान के गुप्त अभियानों का गेटवे बन रहा बांग्लादेश: रिपोर्ट

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IANS
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Cairo: Bangladesh Chief Adviser Muhammad Yunus and Pakistan PM Shehbaz Sharif during a bilateral meeting on the sidelines of the D-8 Summit

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

ढाका, 20 जनवरी (आईएएनएस)। आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देश के रूप में पाकिस्तान की वैश्विक छवि पहले से ही जगजाहिर है, लेकिन इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि बांग्लादेश अनजाने में इस्लामाबाद के गुप्त अभियानों का माध्यम बनता जा रहा है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अपने क्षेत्र को लॉजिस्टिक और वैचारिक आधार के रूप में इस्तेमाल होने की अनुमति देकर ढाका, भारत के खिलाफ पाकिस्तान के लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष में खुद को उलझाने का जोखिम उठा रहा है।

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बांग्लादेश की प्रमुख साप्ताहिक पत्रिका ‘ब्लिट्ज’ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, खतरे के संकेत साफ हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) एक बार फिर धर्म को हथियार बनाकर, सीमाओं का दुरुपयोग कर और प्रॉक्सी समूहों के जरिए क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “पाकिस्तान के ‘डीप स्टेट’ के लिए आतंकवाद कोई अपवाद नहीं, बल्कि एक स्थापित सिद्धांत है। जब दुनिया इस्लामाबाद की कूटनीतिक दिखावेबाजी और खोखले सुधार वादों में उलझी हुई है, उसी दौरान आईएसआई ने भारत के खिलाफ अपना सबसे घातक खेल फिर से सक्रिय कर दिया है- प्रॉक्सी जिहाद। भारत के गणतंत्र दिवस समारोह के आसपास समयबद्ध इस साजिश के तहत, आईएसआई पश्चिम बंगाल से लेकर बांग्लादेश तक और पश्चिमी देशों में स्थित भारतीय दूतावासों तक फैली आतंक, तोड़फोड़ और वैचारिक युद्ध की बहुस्तरीय मुहिम चला रही है।”

खुफिया आकलनों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तानी आईएसआई की ‘ढाका सेल’ के प्रत्यक्ष संचालन समन्वय में तथाकथित “फंसे हुए पाकिस्तानी” समुदाय (पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर-पीओके) से जुड़े प्रशिक्षित ऑपरेटिव्स को भारत-बांग्लादेश सीमा के जरिए योजनाबद्ध तरीके से भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कराई जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, “इन व्यक्तियों को विध्वंसक और अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों को अंजाम देने का काम सौंपा गया है। खुफिया दस्तावेजों में इस इकाई को ‘मोहाजिर रेजिमेंट’ कहा गया है, जिसमें 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग के पुरुष और महिला दोनों ऑपरेटिव शामिल हैं। इनमें से कुछ को आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाने और आत्मघाती हमलों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।”

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2024 में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद नीतिगत बदलावों और वैचारिक रियायतों की एक श्रृंखला ने इस्लामवादी नेटवर्क के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर दिया है। इससे लश्कर-ए-तैयबा और बांग्लादेशी कट्टरपंथी नेताओं के बीच लंबे समय से निष्क्रिय पड़े संबंध फिर से सक्रिय हो रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया, “वर्षों तक लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद ने मुफ्ती हारून इजहार और अंसार अल-इस्लाम के प्रमुख मुफ्ती जशिमुद्दीन रहमानी जैसे लोगों से रिश्ते बनाए रखे थे। खुफिया सूत्रों के अनुसार, ये नेटवर्क अब चुपचाप फिर से जोड़े जा रहे हैं।”

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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