मादुरो की गिरफ्तारी का कानूनी आधार मजबूत: अमेरिकी संवैधानिक विशेषज्ञ (आईएएनएस इंटरव्यू)

मादुरो की गिरफ्तारी का कानूनी आधार मजबूत: अमेरिकी संवैधानिक विशेषज्ञ (आईएएनएस इंटरव्यू)

मादुरो की गिरफ्तारी का कानूनी आधार मजबूत: अमेरिकी संवैधानिक विशेषज्ञ (आईएएनएस इंटरव्यू)

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IANS
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Maduro's arrest rests on strong legal footing: US Constitutional Expert (IANS interview)

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

वाशिंगटन, 7 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिका के वरिष्ठ कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञ माइकल ओ’नील के अनुसार, वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने में अमेरिका ने अपने संविधान और कानूनों के तहत ही काम किया है। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई को अमेरिकी अदालतों में चुनौती देने पर उसके सफल होने की संभावना बहुत कम है।

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आईएएनएस को दिए विशेष साक्षात्कार में ओ’नील ने बताया कि मादुरो की गिरफ्तारी को किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि एक अपराधी भगोड़े की कानूनी गिरफ्तारी के तौर पर देखा जाना चाहिए। इसका कारण यह है कि अमेरिका लंबे समय से मादुरो को वेनेजुएला का वैध राष्ट्रपति नहीं मानता।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जिक्र करते हुए ओनील ने कहा, संवैधानिक नजरिए से, राष्ट्रपति के पास आर्टिकल II के तहत यह सुनिश्चित करने का स्पष्ट अधिकार है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के कानूनों को ईमानदारी से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति के खिलाफ ग्रैंड जूरी आरोप तय कर देती है, जैसे कि निकोलस मादुरो के मामले में हुआ, तो उसे पकड़कर न्याय के सामने पेश करना सरकार का दायित्व बन जाता है। अमेरिका मादुरो को मादक पदार्थों की तस्करी और आतंक से जुड़े एक संगठित गिरोह का सरगना मानता है।

उन्होंने कहा कि मादुरो पर 2020 में अमेरिकी संघीय अभियोजकों ने आरोप तय किए थे और अब उन्हें न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले में मुकदमे का सामना करना पड़ रहा है। मादुरो की स्थिति पर दोनों पार्टियों का एक ही कानूनी रुख है। बाइडेन प्रशासन ने भी उन्हें वेनेजुएला के असली राष्ट्रपति के तौर पर मान्यता नहीं दी थी और उनकी गिरफ्तारी की जानकारी देने वाले को 25 मिलियन डॉलर का इनाम देने की पेशकश की थी।

ओ’नील ने साफ कहा कि अमेरिका मादुरो को किसी संप्रभु देश का नेता नहीं मानता, बल्कि उन्हें एक नार्को-टेररिस्ट संगठन, कार्टेल डे लॉस सोल्स का मुखिया माना जाता है, जो बड़े पैमाने पर ड्रग तस्करी और अन्य गंभीर अपराधों में शामिल है जो सीधे तौर पर अमेरिकी हितों को प्रभावित करते हैं।

संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों पर उठे सवालों पर ओ’नील ने बताया कि इस तरह की कार्रवाई पहले भी हो चुकी है। उन्होंने 1989 में पनामा के नेता मैनुएल नोरिएगा के खिलाफ हुई अमेरिकी कार्रवाई का उदाहरण दिया, जिसमें बाद में अमेरिकी अदालतों ने सजा को सही ठहराया था। उन्होंने कहा कि ये कोई नई बात नहीं है और अदालतें ऐसे मामलों में पहले के फैसलों को काफी महत्व देती हैं।

ओ’नील के अनुसार, मादुरो की ओर से संप्रभु प्रतिरक्षा पर आधारित दलीलों के सफल होने की संभावना नहीं है, क्योंकि यह संरक्षण आमतौर पर उन्हीं नेताओं को मिलता है जिन्हें वैध राष्ट्राध्यक्ष के रूप में मान्यता प्राप्त हो। मादुरो के मामले में ऐसी कोई मान्यता नहीं है और विदेशी मामलों में अदालतें आमतौर पर सरकार के निर्णय में दखल नहीं देतीं। उन्होंने यह भी कहा कि मादुरो के वकील ऐसे तर्क ज़रूर देंगे, लेकिन अदालत में यह साबित करने की ज़िम्मेदारी स्वयं मादुरो पर होगी कि वह इस संरक्षण के हकदार है। आम तौर पर न्यायाधीश इस बात में सरकार के रुख को ही प्राथमिकता देते हैं कि किसी देश के नेता को मान्यता दी जाए या नहीं।

ऑपरेशन में सैन्य साधनों के इस्तेमाल पर ओ’नील ने कहा कि अगर कानूनी गिरफ्तारी के दौरान कानून लागू करने वाले अधिकारियों की सुरक्षा के लिए सेना की मदद ली गई, तो यह पूरी तरह उचित है, खासकर तब जब जोखिम ज्यादा हो।

ओ’नील ने बताया कि यह मामला अमेरिकी आपराधिक न्याय प्रणाली के तहत ही आगे बढ़ेगा। मादुरो को पूरी कानूनी प्रक्रिया का अधिकार मिलेगा, जिसमें अनुभवी वकील, सबूतों तक पहुंच और जूरी के सामने ट्रायल शामिल हैं। अगर मादुरो दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें कई दशकों तक जेल की सज़ा हो सकती है, जैसा कि नोरिएगा के मामले में हुआ था। उन्होंने कहा, यह एक लंबी कानूनी प्रक्रिया होगी। प्री-ट्रायल मोशन, ट्रायल की कार्यवाही और अपील कई सालों तक चल सकती हैं।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति को हो रही बहस पर ओ’नील के कहा कि असली मुद्दा क़ानून का है। सरल रूप से यह गंभीर अपराधों के आरोपी एक व्यक्ति पर अमेरिकी आपराधिक कानून लागू करने का मामला है और इस पहलू से सरकार का पक्ष काफी मजबूत है।

--आईएएनएस

एएस/

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