स्वास्थ्य सेवाओं में इस्तेमाल से पहले एआई की बड़े स्तर पर जांच जरूरी: एनएचए सीईओ

स्वास्थ्य सेवाओं में इस्तेमाल से पहले एआई की बड़े स्तर पर जांच जरूरी: एनएचए सीईओ

स्वास्थ्य सेवाओं में इस्तेमाल से पहले एआई की बड़े स्तर पर जांच जरूरी: एनएचए सीईओ

author-image
IANS
New Update
AI systems must be tested on diverse, population-scale datasets before deployment: NHA CEO

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आईआईटी कानपुर में फेडरेटेड इंटेलिजेंस हैकाथॉन का आयोजन किया गया।

Advertisment

इस राष्ट्रीय स्तर के हैकाथॉन का आयोजन नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) ने आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन डिजिटल हेल्थ एंड डेटा साइंस (एनआईआरडीएचडीएस) और आईआईटी कानपुर के सहयोग से किया।

यह आयोजन इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के प्री-इवेंट के रूप में 19 से 24 जनवरी 2026 तक चला, जिसका उद्देश्य सुरक्षित, गोपनीयता की रक्षा करने वाले और बड़े स्तर पर काम करने वाले हेल्थ एआई डिजिटल सिस्टम विकसित करना था।

खास बात यह रही कि इसमें बिना डेटा को एक जगह केंद्रीकृत किए फेडरेटेड एआई मॉडल्स पर काम किया गया, ताकि भरोसे और गोपनीयता को प्राथमिकता दी जा सके।

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. सुनील कुमार बरनवाल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में इस्तेमाल होने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल्स को लागू करने से पहले बड़ी और अलग-अलग तरह की आबादी से जुड़े डेटा पर जांचना जरूरी है, ताकि लोगों का भरोसा बना रहे, नतीजे सही हों और किसी को बाहर न रखा जाए।

उन्होंने कहा कि भारत अब सिर्फ प्रयोग करने से आगे बढ़कर स्वास्थ्य के लिए भरोसेमंद और मानक एआई मॉडल बनाने की दिशा में काम कर रहा है। यह कार्यक्रम इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले आयोजित किया गया।

बरनवाल ने आगे कहा कि फेडरेटेड और सहमति पर आधारित एआई सिस्टम से नई तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाया जा सकता है, बिना संवेदनशील स्वास्थ्य डेटा को एक जगह इकट्ठा किए। इससे लोगों की निजी जानकारी सुरक्षित रहती है और जनता का भरोसा भी मजबूत होता है।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एआई समाधान ऐसे होने चाहिए जो भारत की अलग-अलग आबादी, क्षेत्रों और जरूरतों के अनुसार काम कर सकें।

हैकाथॉन के लिए 374 पंजीकरण प्राप्त हुए, जिनमें 208 व्यक्तिगत प्रतिभागी और दो या दो से अधिक प्रतिभागियों की 166 टीमें शामिल थीं।

विजेताओं को प्रमाण पत्र और 12 लाख रुपए के नकद पुरस्कार दिए गए।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में प्रोफेसर संदीप वर्मा, आईआईटी कानपुर के निदेशक मणिंदर अग्रवाल और उत्तर प्रदेश की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की सचिव ऋतु महेश्वरी ने भी अपने विचार रखे।

सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक, शोध संस्थान और सरकारें मिलकर भारत की डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बना रही हैं।

आईआईटी कानपुर के विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर और एनएचए के पूर्व सीईओ डॉ. आर. एस. शर्मा ने कहा कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और आपस में जुड़ने वाले डिजिटल पब्लिक प्लेटफॉर्म सुरक्षित और लोगों के लिए उपयोगी स्वास्थ्य डेटा सिस्टम बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से नवाचार के साथ-साथ जवाबदेही भी बनी रहती है।

सर्वमएआई के सह-संस्थापक और सीईओ विवेक राघवन ने कहा कि भारत की डिजिटल हेल्थ आर्किटेक्चर एआई-आधारित स्वास्थ्य सेवा को आम लोगों तक पहुंचाने में मदद करती है।

उन्होंने बताया कि अच्छा डेटा, मजबूत गोपनीयता नियम और सुरक्षा एआई को सफल बनाने के लिए बहुत जरूरी हैं। साथ ही उन्होंने देश में बने ओपन-सोर्स एआई मॉडल की जरूरत पर जोर दिया, ताकि भारत को बाहर की तकनीकों पर ज्यादा निर्भर न रहना पड़े।

--आईएएनएस

डीबीपी/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Advertisment