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हाईपरटेंशन को साइलेंट किलर क्यों कहा जाता, समझने से पहले ही चली जाती जान, जानें कैसे?

हाईपरटेंशन देश में तेजी से लोगों को अपना शिकार बना रहा है. टेंशन से भी ज्यादा हाईपरटेंशन की वजह से दिल की बीमारी के मरीज बढ़ते जा रहे हैं. हैरानी की बात है कि ज्यादातर लोग इसे समझ पाने में नाकाम हैं. ऐसे में आप लोगों को यह खबर जरूर पढ़नी चाहिए. 

Updated on: 17 May 2024, 09:44 PM

नई दिल्ली:

आज विश्व हाईपरटेंशन डे है. इस खास दिन का मकसद है लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना है. हाइपरटेंशन को साइलेंट किलर के रूप में भी जाना जाता है और डॉक्टरों की मानें तो तकरीबन  30 फीसदी आबादी इस बीमारी क़ी जद में है. एक बड़ी हकीकत ये भी है कि हार्ट, ब्रेन और किडनी को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाली बीमारी हाइपरटेंशन यानि हाई ब्लड प्रेशर के बारे में भारतीयों को कम जानकारी है. नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन में पब्लिश हुई रिपोर्ट के मुताबिक भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में 75 प्रतिशत लोग और शहरी क्षेत्रों में 58 प्रतिशत लोगों को मालूम ही नहीं कि उन्हें हाइपरटेंशन जैसी गंभीर बीमारी है. 

राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाई मानसिंह अस्पताल में आने वाले हर पांचवें मरीज में बीपी की समस्या देखने को मिल रही है. अगर इसे नजरंदाज करते हैं तो मरीज को हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर, ब्रेन स्ट्रोक ब्रेन हेमरेज, एक्यूट किडनी फेलियर हो सकता है. हाईपरटेंशन को हाई बीपी के रूप में भी जाना जाता है और इस बीमारी के लक्षण युवाओं में कम उम्र में भी दिखाई देने लगे हैं. समय पर यदि इस बीमारी का इलाज नहीं लिया जाए तो किडनी डैमेज से लेकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण मरीज की जान भी जा सकती है. उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए विश्व उच्च रक्तचाप दिवस की शुरुआत की गई थी. बदलती लाइफस्टाइल के कारण हाइपरटेंशन बीमारी लोगों को अपना शिकार बना रही है.

हाइपरटेंशन शरीर के कई अंगों को करता प्रभावित

हाइपरटेंशन को साइलेंट किलर इसलिए भी कहा गया है कि यह बीमारी शरीर के अन्य अंगों को डैमेज कर देती है. मसलन यदि कोई मरीज हाइपरटेंशन से पीड़ित है और वह इसका इलाज नहीं लेता तो सबसे पहले किडनी डैमेज का ख़तरा बढ़ जाता है इसके अलावा अचानक हार्ट अटैक और स्ट्रोक की संभावना भी काफी हद तक बढ़ जाती है ऐसे में यदि सही समय पर इलाज लिया जाए तो इस बीमारी को आसानी से कंट्रोल में किया जा सकता है.

हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण और कारण 

जीवनशैली, खराब खानपान, आनुवांशिक कारण और प्रदूषण भी ब्लड प्रेशर को प्रभावित करते हैं.

शारीरिक एक्टिविटी की कमी, जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड का ज्यादा सेवन, सिगरेट और शराब भी व्यक्ति को हाइपरटेंशन का शिकार बना देता है.

तनाव भी मुख्य रूप से  हाइपरटेंशन के लिए जिम्मेदार होता है.

हाइपरटेंशन के लक्षण में चक्कर आना ,सांस लेने में तकलीफ होना ,थकान, नाक से खून आना, सिर दर्द रहना, सीने में दर्द महसूस होना और यूरिन के साथ ब्लड आना जैसे लक्षण शामिल है.

 

हाई ब्लड प्रेशर के इलाज और बचाव क्या है

अगर खान-पान और लाइफस्टाइल को बेहतर बना लिया जाए तो हाइपरटेंशन के खतरे को कम किया जा सकता है. अगर हाइपरटेंशन की चपेट में आ गए हैं तो सबसे पहले इसका इलाज करवाएं, क्योंकि स्थिति गंभीर होने पर हार्ट अटैक तक आ सकता है. अगर किसी की फैमिली में कभी हाइपरटेंशन की समस्या रही है तो ऐसे लोगों को नियमित तौर पर जांच करवाते रहना चाहिए. 18 साल की उम्र के बाद सभी को कम से कम साल में दो बार बीपी चेक करवाना चाहिए.


पुरुषों में ज्यादा होती है हाई ब्लड प्रेशर क़ी दिक्क़त 

हाइपरटेंशन के मामले महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में ज्यादा देखने को मिल रहे हैं. भारत में 27 प्रतिशत पुरुषों और 20 प्रतिशत मामले महिलाओं में आ रहे हैं. वहीं ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की बात की जाए तो भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में हाइपरटेंशन के 25 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 33 प्रतिशत मरीज हैं. वहीं राजस्थान में यह आंकड़ा ग्रामीण में 18.3 प्रतिशत और शहर में 26.1 प्रतिशत है. गांवों में 25 प्रतिशत और शहरों में 38 प्रतिशत एक्सपर्ट का कहना है कि लंबे समय तक हाइपरटेंशन होने से हार्ट कमजोर हो जाता है और हार्ट फेलियर होने के वाली मृत्यु दर बढ़ रही है. 62 प्रतिशत हार्ट फेलियर के मामलों के पीछे का कारण हाइपरटेंशन है.