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जरा सी खांसी-बुखार हुआ नहीं कि डर कोरोना का, कहीं आप भी तो नहीं Coronaphobia के शिकार?

कोरोना वायरस महामारी अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है. भले ही कोरोना की वैक्सीन आ चुकी है, मगर लोगों में इस महामारी का डर अभी भी है. कोरोना न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक रूप से लोगों को अस्वस्थ बना रहा है.

News Nation Bureau | Edited By : Dalchand Kumar | Updated on: 03 Mar 2021, 09:27:32 AM
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खांसी-बुखार यानी डर कोरोना का, कहीं आप भी हैं Coronaphobia के शिकार? (Photo Credit: फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

कोरोना वायरस महामारी अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है. भले ही कोरोना की वैक्सीन आ चुकी है, मगर लोगों में इस महामारी का डर अभी भी है. कोरोना न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक रूप से लोगों को अस्वस्थ बना रहा है. ऐसे में संक्रमण के साथ अब इसने एक बीमारी का रूप ले लिया है, जिसे 'कोरोनाफोबिया' (Coronaphobia) कहा जा रहा है. ऐसा इसलिए, क्योंकि लोगों में कोरोना का डर इस कदर है कि जरा सा सर्दी-जुकाम हुआ नहीं कि वह एक तरह से सदमे में चले जाते हैं. सर्दी-जुकाम होने पर लोग कोरोना के लक्षणों को ढूंढना शुरू कर देते हैं. साथ ही कभी एलोपैथिक तो कभी आयुर्वेदिक दवाएं लेने लग जाते हैं. ऐसे में हम आपको बताएंगे कोरोनाफोबिया के बारे में, जिससे आपको लक्षणों और सुझावों को समझने में मदद मिलेगी.

क्या है कोरोनाफाबिया?

कोरोनाफोबिया एक नए प्रकार का फोबिया है, जो कोरोना वायरस से जुड़ा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इसमें व्यक्ति को हर पल कोरोना वायरस से खुद के संक्रमित होने का संदेह रहता है. शरीर में किसी भी तरह की दिक्कत होने पर व्यक्ति को चिंता होने लग जाती है. इतना ही नहीं, इस डर में व्यक्ति सार्वजनिक जगहों पर जाने से घबराता है और दूसरे लोगों से भी दूरी बनाने लग जाता है. कुल मिलाकर उस व्यक्ति को एक डर होता है कि कहीं वह कोरोना से संक्रमित न हो जाए.

'कोरोनाफोबिया' के लक्षण

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिसंबर 2020 में एशियन जर्नल ऑफ साइकियाट्री में छपे एक अध्ययन में विशेषज्ञों ने कोरोना से उभरने वाली चिंता के कुछ कारण यानी 'कोरोनाफोबिया' के लक्षण बताए थे. जिसमें दिल की धड़कन कम होना, भूख न लगना, चक्कर आना, हर पल कोरोना के बारे में सोचना, सार्वजनिक समारोह में जाने से डरना और असामाजिक व्यवहार करना शामिल हैं.

'कोरोनाफोबिया' का डर किसे ज्यादा?

एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुरूषों की तुलना में महिलाओं में अनिद्रा, चिंता और अवसाद के लक्षण ज्यादा दिखाई पड़े. महिलाओं के अंदर परिवार के सदस्यों के बीमार होने या दूसरों को संक्रमित करने का डर ज्यादा रहा. इस महामारी को लेकर युवा वर्ग भी काफी चिंतित रहा है.

कैसे निपटे 'कोरोनाफोबिया' से?

  • खुद को आश्वस्त करें और डरने की बजाय सावधानी बरतें.
  • खुद को कुछ दिनों तक कोरोना से जुड़ी खबरों या अन्य बातों से दूर रखें.
  • अपना ध्यान दूसरी अन्य बातों पर लगाएं.
  • जोखिम को तार्किक रूप से समझने की कोशिश करें.
  • अच्छी नींद, व्यायाम और सामाजिक रूप से जुडें.

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First Published : 03 Mar 2021, 09:27:32 AM

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