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कम नींद से मनोभ्रंश और बुजुर्गों में जल्दी मृत्यु का खतरा, शोध में चौंकाने वाला खुलासा

बुजुर्गों को अक्सर नींद के लिए संघर्ष करते और रात में बार-बार जागते देखा जाता है. उनमें मनोभ्रंश विकसित होने या किसी भी कारण से जल्दी मरने का खतरा अधिक होता है.

News Nation Bureau | Edited By : Dalchand Kumar | Updated on: 20 Jun 2021, 09:50:35 AM
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कम नींद से मनोभ्रंश और बुजुर्गो में जल्दी मृत्यु का खतरा (Photo Credit: IANS)

न्यूयॉर्क:

बुजुर्गों को अक्सर नींद के लिए संघर्ष करते और रात में बार-बार जागते देखा जाता है. उनमें मनोभ्रंश विकसित होने या किसी भी कारण से जल्दी मरने का खतरा अधिक होता है. यह एक नए शोध में पता चला है. जर्नल ऑफ स्लीप रिसर्च में प्रकाशित सीएनएन की रिपोर्ट ने संकेत दिया कि जिन लोगों ने नियमित रूप से सोने में कठिनाई का अनुभव किया, उनमें मनोभ्रंश का जोखिम 49 प्रतिशत बढ़ गया और जो लोग अक्सर रात में जागते थे और उन्हें फिर से सोने में कठिनाई होती थी, उनमें भी मनोभ्रंश का खतरा 39 प्रतिशत बढ़ गया.

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हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की शोधकर्ता रेबेका रॉबिन्स ने कहा, 'हमें नींद आने में लगातार कठिनाई और रात के समय जागना और मनोभ्रंश और किसी भी कारण से जल्दी मौत के बीच एक मजबूत संबंध मिला, भले ही हमने अवसाद, लिंग, आय, शिक्षा और पुरानी स्थितियों जैसी चीजों को नियंत्रित किया हो.' अध्ययन के लिए, टीम ने नेशनल हेल्थ एंड एजिंग ट्रेंड्स स्टडी (एनएचएटीएस) द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों का विश्लेषण किया, जो 6,376 मेडिकेयर लाभार्थियों के राष्ट्रीय प्रतिनिधि नमूने के साथ वार्षिक व्यक्तिगत साक्षात्कार आयोजित करता है.

नए अध्ययन के लिए 2011 और 2018 के बीच के डेटा की जांच की गई, जिसमें उच्चतम जोखिम श्रेणी के लोगों पर ध्यान केंद्रित किया गया था. उन लोगों ने कहा कि उन्हें ज्यादातर रातें या लगभग हर रात नींद की समस्या थी. अध्ययन में प्रतिभागियों द्वारा स्व-रिपोर्ट की गई नींद की कठिनाइयों की तुलना तब प्रत्येक प्रतिभागी के मेडिकल रिकॉर्ड से की गई थी.

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अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों को ज्यादातर रातों को सोने में परेशानी होती थी, उनमें किसी भी कारण से जल्दी मौत का जोखिम लगभग 44 प्रतिशत बढ़ गया. जिन लोगों ने कहा कि वे अक्सर रात में जागते हैं और सोने के लिए संघर्ष करते हैं, उनमें कुछ अधिक जोखिम होता है - 56 प्रतिशत किसी भी कारण से जल्दी मौत का खतरा बढ़ जाता है. रॉबिन्स ने कहा कि ये परिणाम बताते हैं कि नींद हर रात, तंत्रिका संज्ञानात्मक गिरावट और मृत्युदर के लिए हमारे दीर्घकालिक जोखिम को कम करने के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

(इनपुट - आईएएनएस )

First Published : 20 Jun 2021, 09:50:35 AM

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