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Subconscious mind पर कर लिया काबू तो जीत जाएंगे दुनिया !

हमारे पैदा होने से लेकर हमारे मरने तक कुछ रोजाना के काम ऐसे होते हैं जिन्हें करने में हमें ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती या यूं कहें दिमागी मेहनत नहीं करनी पड़ती. कुछ काम जैसे की रोज ब्रश करना, मुंह धोना, खाना-पीना, आदी. आप सोच रहे होंगे की ये भी क्या

Updated on: 06 Mar 2022, 01:17 PM

highlights

  • वैज्ञानिकों ने हमारे दिमाग को दो हिस्सों में बांटा है.
  • जो काम हम रोज या कई बार करते हैं वो हमारे Subconscious mind में बैठ जाते हैं
  • विज्ञापन बनाने वाले हमारे अवचेतन दिमाग़ को कंट्रोल करते हैं

New Delhi:

हमारे पैदा होने से लेकर हमारे मरने तक कुछ रोजाना के काम ऐसे होते हैं जिन्हें करने में हमें ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती या यूं कहें दिमागी मेहनत नहीं करनी पड़ती. कुछ काम जैसे कि रोज ब्रश करना, मुंह धोना, खाना-पीना, आदी. आप सोच रहे होंगे की ये भी क्या कोई बहुत बड़े काम हैं जिनके के लिए मेहनत लगे. लेकिन क्या आपको याद है की ये काम आपने सीखे कब और इतनी गहराई से आपके दिमाग में कैसे पैठे हैं की आप आंख बंद करके भी ये काम कर सकते हैं. उदाहरण के तौर पर आप खुद से पूछिए की क्या आप आंख बंद करके टाईपिंग कर सकते हैं ? बहुत से लोग ये नहीं कर सकते लेकिन कई लोग हैं जो ऐसा कर सकते हैं. जिनकी उंगलियों को पता है की कीबोर्ड पर कौनसे अक्शर का बटन कहां है. ये लोग ऐसा इसलिए कर सकते हैं क्योंकि ये इनके अवचेतन मन यानि Subconscious mind में बैठ चुका है. 

वैज्ञानिकों ने हमारे दिमाग को दो हिस्सों में बांटा है जिसमें से एक है चेतन दिमाग ( Conscious mind ) और एक है अवचेतन दिमाग ( Subconscious mind). जो काम हम रोज या कई बार करते हैं वो हमारे Subconscious mind में बैठ जाते हैं और इन कामों को दोहराने के लिए हमें ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती. लेकिन जब हमें कोई नया काम करना होता है तो हमारे चेतन मन यानि Conscious mind को काफि मेहनत करनी पड़ती है. इसलिए कई वैज्ञानिक ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं की अवचेतन दिमाग ( Subconscious mind) को काबू में करके हम अपनी जिंदगी को कैसे आसान बना सकते हैं.

अगर हम किसी बल्लेबाज की बात करें तो जब खेलते वक्त गेंदबाज गेंद को तेज रफ्तार से बल्लेबाज की तरफ फेंकता है तो बल्लेबाज किस तेजी से छक्का जड़ देता ये अवचेतन दिमाग का उदाहरण है. अगर अपनी तरफ आती गेंद को बल्लेबाज चेतन दिमान से समझे तो वो गेंद को अपने बल्ले से छू भी नहीं पाएगा.बरसों से डिज़ाइनर्स और विज्ञापन बनाने वाले, हमारे अवचेतन दिमाग़ को कंट्रोल करते रहे हैं किसी भी प्रोडक्ट को बेचने के लिए। उसके प्रति हमारे मन में चाव पैदा करके. अगर हम अपने दिमाग़ में कोई भी बात अच्छे से बैठा दें तो आगे चलकर बहुत से फ़ैसले लेने में, कई काम करने में हमें दिमाग़ नहीं लगाना पड़ेगा. इसी चीज का इस्तमाल लोगों को नशे की लत झुड़ाने के लिए किया जाता है. इस तरीके का उपयोग बेहतरी से करने के लिए रिसर्च जारी हैं.