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ध्यान देंः रेमडेसिविर इंजेक्शन असली है या नकली, ऐसे करें पहचान

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की डीसीपी मोनिका भारद्वाज ने एक ट्वीट के जरिए असली और नकली रेमडेसिविर के बारे में जानकारी दी है. उन्होंने बताया है कि रेमडेसिविर की नकली और असली शीशी की पहचान कैसे की जाए.

News Nation Bureau | Edited By : Karm Raj Mishra | Updated on: 01 May 2021, 01:54:17 PM
Remdesivir

Remdesivir Injection (Photo Credit: News Nation)

highlights

  • बाजार में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन भी बिक रही है
  • असली रेमडेसिविर को आसानी से पहचाना जा सकता है
  • डीसीपी मोनिका भारद्वाज ने ट्विटर पर दी जानकारी

नई दिल्ली:

देश में कोरोना (Corona) ने कोहराम मचा रखा है. अस्‍पतालों में न तो बेड है और न ही ऑक्‍सीजन. कोरोना के के इलाज में काम आने वाली दवा रेमडेसिविर (Remdesivir) की डिमांड भी लगातार बढ़ती जा रही है. अधिकांश राज्यों में आसानी से यह इंजेक्शन (Injection) नहीं मिल रहा है. जिससे कालाबाजारी काफी बढ़ गई है. मार्केट में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन भी खूब पकड़ी जा रही हैं. हाल ही में दिल्ली पुलिस ने उत्तराखंड में एक कंपनी का भंडाफोड़ किया है. यहां नकली रेमडेसिविर बनाने का काम चल रहा था. मार्केट में इस नकली इंजेक्शन को भी 25 हजार रूपये में बेचा जाता था. आज हम आपको बताने वाले हैं कि कैसे आप पहचान सकते हैं कि आप जो रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीद कर लाए हैं, वो असली है या नकली. 

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रेमडेसिविर के पैकेट के ऊपर की कुछ गलतियों को पढ़कर असली और नकली का फर्क आसाने से लगाया जा सकता है. 100 मिलीग्राम का इंजेक्शन सिर्फ पाउडर के तौर पर ही शीशी में रहता है. इंजेक्शन के सभी शीशी पर Rxremdesivir लिखा रहता है. यही नहीं इंजेक्शन के बॉक्स के पीछे एक बार कोड भी बना होता है. दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की डीसीपी मोनिका भारद्वाज ने एक ट्वीट के जरिए असली और नकली रेमडेसिविर के बारे में जानकारी दी है.

मोनिका भारद्वाज ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने बताया है कि रेमडेसिविर की नकली और असली शीशी की पहचान कैसे की जाए. उन्होंने नकली पैकेट पर मौजूद कुछ गलतियों की तरफ इशारा किया है, जो इसे असली पैकेट से अलग करने में मदद कर सकते हैं.

ऐसे करें असली-नकली की पहचान

  • नकली रेमडेसिविर के पैकेट पर इंजेक्शन के नाम से ठीक पहले Rx नहीं लिखा हुआ है.
  • असली रेमडेसिविर पर 100 mg/Vial लिखा हुआ है, जबकि नकली पैकेट पर 100 mg/vial लिखा हुआ है यानी केवल Capital V का अंतर है.
  • असली पैकेट पर For use in लिखा हुआ है जबकि नकली पैकेट पर for use in लिखा हुआ है यानी दोनों में सिर्फ Capital F का अंतर है.
  • असली पैकेट के पीछे चेतावनी लेबल (Warning Label) लाल रंग में है, जबकि नकली पैकेट पर Warning लेबल काले रंग में है.
  • नकली रेमडेसिविर के पैकेट पर Warning लेबल के ठीक नीचे मुख्य सूचना Covifir (ब्रांड नाम) is manufactured under the license from Gilead Sciences, Inc नहीं लिखी हुई है.
  • फर्जी रेमडेसिविर वाले पैकेट पर पूरे पते (Address) में स्पेलिंग की गलतियां हैं. जैसे नकली पैकेट पर Telangana की जगह Telagana लिखा हुआ है.

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रेमडेसिविर में अंग्रेजी की तमाम गलतियां देखने को मिल रही है. अगर इस डिब्‍बे को ध्‍यान से पढ़ा जाए तो इन गलतियों का आसानी से पता चल जाता है. असली रेमडेसिविर इंजेक्शन के कांच की शीशी काफी हल्की होती है. ऐसे में जरूरी है कि इन बातों का ध्‍यान रखा जाए. बता दें कि कोरोना के इलाज में शामिल रेमडेसिविर इन दिनों कई राज्यों में तय कीमत से हजार गुना ज्यादा तक की कीमत पर बिक रहा है. दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड समेत कई राज्यों से नकली रेमडेसिविर की शिकायतें भी आ रही हैं.

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First Published : 01 May 2021, 01:54:17 PM

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