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नए शोध के अनुसार ई-सिगरेट से हो सकती है दिल की बीमारी: Research

IANS | Edited By : IANS | Updated on: 26 Oct 2022, 06:35:54 PM
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(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

न्यूयॉर्क:  

एक भारतीय मूल के शोधकर्ता से जुड़े एक नए अमेरिकी अध्ययन में पाया गया है कि ई-सिगरेट एरोसोल के संपर्क में आने से दिल की बीमारी पैदा कर सकती है. नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित क्रिस्टीना ली ब्राउन एनवायरोम इंस्टीट्यूट में लुइसविले विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अध्ययन से पता चलता है कि ई-सिगरेट तरल पदार्थ (ई-तरल पदार्थ) के भीतर विशिष्ट रसायनों के संपर्क में एरिथमिया और कार्डियक इलेक्ट्रिकल डिसफंक्शन को बढ़ावा मिलता है.

अध्ययन का नेतृत्व करने वाले सहायक प्रोफेसर एलेक्स कार्ल ने कहा, हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि ई-सिगरेट के अल्पकालिक संपर्क ई-तरल पदार्थो के भीतर विशिष्ट रसायनों के माध्यम से हृदय ताल को अस्थिर कर सकते हैं. इन निष्कर्षो से पता चलता है कि ई-सिगरेट के उपयोग में कुछ फ्लेवर या सॉल्वेंट शामिल हैं, जो हृदय की विद्युत चालन को बाधित कर सकते हैं और अतालता को भड़का सकते हैं. कार्ल ने कहा, ये प्रभाव एट्रियल या वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन और अचानक कार्डियक गिरफ्तारी के जोखिम को बढ़ा सकते हैं.

शोधकर्ताओं ने ई-सिगरेट पदार्थ (निकोटीन मुक्त प्रोपलीन ग्लाइकोल और वेजिटेबल ग्लिसरीन) में मुख्य दो अवयवों से या निकोटीन युक्त स्वाद वाले खुदरा ई-तरल पदार्थो से पूरी तरह से ई-सिगरेट एरोसोल के हृदय संबंधी प्रभावों का परीक्षण किया. उन्होंने पाया कि सभी ई-सिगरेट एरोसोल के लिए, जानवरों की हृदय गति पफ एक्सपोजर के दौरान धीमी हो गई और बाद में तेज हो गई क्योंकि हृदय गति परिवर्तनशीलता में गिरावट आई, जो फाइट-या-फ्लाइट तनाव प्रतिक्रियाओं का संकेत देती है.

इसके अलावा, मेन्थॉल-स्वाद वाले ई-तरल या अकेले प्रोपलीन ग्लाइकोल से ई-सिगरेट पफ्स के कारण वेंट्रिकुलर अतालता और हृदय में अन्य चालन अनियमितताएं होती हैं. ई-सिगरेट दहनशील सिगरेट के बराबर स्तर पर एल्डिहाइड, पार्टिकल्स और निकोटीन वितरित कर सकता है.

First Published : 26 Oct 2022, 06:35:54 PM

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