गर्भावस्था में हीमोग्लोबिन की कमी मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक, इन उपायों से रहें सुरक्षित

गर्भावस्था में हीमोग्लोबिन की कमी मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक, इन उपायों से रहें सुरक्षित

गर्भावस्था में हीमोग्लोबिन की कमी मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक, इन उपायों से रहें सुरक्षित

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IANS
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गर्भावस्था में हीमोग्लोबिन की कमी मां और बच्चे दोनों के लिए खतरा, इन उपायों से रहें सुरक्षित

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 7 जनवरी (आईएएनएस)। गर्भावस्था का समय किसी भी महिला के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दौर होता है। इस दौरान शरीर में सिर्फ मां की नहीं, बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु की जरूरतें भी पूरी करनी होती हैं। ऐसे में खून यानी हीमोग्लोबिन की भूमिका और भी बढ़ जाती है, क्योंकि यही ऑक्सीजन और पोषण को मां से बच्चे तक पहुंचाने का काम करता है।

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जब गर्भवती महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम होने लगती है, तो इसका असर सिर्फ उसकी सेहत पर ही नहीं, बल्कि बच्चे के विकास पर भी पड़ सकता है।

शुरुआत में यह समस्या हल्की थकान, सांस फूलने या चक्कर आने के रूप में नजर आती है, लेकिन समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह कमजोरी, संक्रमण का खतरा और प्रसव से जुड़ी जटिलताओं का कारण बन सकती है। यही वजह है कि गर्भावस्था के दौरान हीमोग्लोबिन की कमी को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए और सही समय पर इसके उपायों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।

गर्भावस्था में आयरन से भरपूर भोजन को रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बनाना बेहद जरूरी है। हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी और सरसों आयरन और फोलेट का अच्छा स्रोत होती हैं, जो खून बनने की प्रक्रिया को मजबूत करती हैं। चुकंदर भी इस दौरान काफी फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इसमें आयरन के साथ ऐसे तत्व होते हैं जो लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करते हैं। अनार, सेब और आंवला जैसे फल भी कमजोरी को कम करते हैं।

सूखे मेवे भी हीमोग्लोबिन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। खजूर, किशमिश और अंजीर में मौजूद आयरन और प्राकृतिक शुगर शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ खून की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं। इन्हें रात में भिगोकर सुबह खाने से इनके पोषक तत्व आसानी से पचते हैं और शरीर को बेहतर लाभ मिलता है। काले तिल और गुड़ का सेवन भी गर्भवती महिलाओं के लिए उपयोगी माना जाता है, क्योंकि यह आयरन की पूर्ति के साथ-साथ थकान और कमजोरी को भी दूर करता है।

आयरन के सही अवशोषण के लिए विटामिन सी का होना बहुत जरूरी है। इसलिए खाने के साथ नींबू, संतरा, मौसमी, या आंवला जैसी खट्टी चीजों को शामिल करना चाहिए। यह शरीर को भरपूर मात्रा में आयरन देता है। वहीं चाय और कॉफी से दूरी बनाना जरूरी है, क्योंकि इनमें मौजूद तत्व आयरन के असर को कम कर देते हैं। अगर चाय पीनी ही हो, तो भोजन और आयरन की दवा से कुछ समय का अंतर रखना बेहतर होता है।

गर्भावस्था में डॉक्टर द्वारा दी गई आयरन और फोलिक एसिड की दवा को नियमित और सही तरीके से लेना भी बेहद जरूरी है। कई बार महिलाएं पेट में जलन या उलझन की वजह से दवा छोड़ देती हैं, जिससे हीमोग्लोबिन और ज्यादा गिर सकता है। ऐसे में दवा का समय बदलकर या भोजन के बाद लेने से समस्या कम हो सकती है, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह दवा बंद नहीं करनी चाहिए।

इसके अलावा पर्याप्त नींद और मानसिक शांति भी हीमोग्लोबिन को बेहतर बनाए रखने में मदद करती है। पूरी नींद लेने से शरीर को खुद को ठीक करने और नई रक्त कोशिकाएं बनाने का समय मिलता है। हल्की सैर, प्राणायाम और गहरी सांस लेने की आदतें शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बेहतर बनाती हैं, जिससे कमजोरी और थकान कम महसूस होती है।

गर्भावस्था में कोई भी घरेलू उपाय और आहार में बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

--आईएएनएस

पीके/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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