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अक्षय कुमार को भारी पड़ रही रुस्तम, अदालत ने भेजा नोटिस

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News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 27 Feb 2021, 12:48:08 PM
Akshay Kumar

रुस्तम फिल्म के एक शब्द पर दायर कर दी गई याचिका. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

मुंबई/कटनी:

बीते कुछ समय से अक्षय कुमार किसी न किसी कारण से सुर्खियों में बने हुए हैं. अब वह 2016 में प्रदर्शित अपनी फिल्म 'रुस्तम' को लेकर विवादों के फेर में हैं. इस फिल्म में एक दृश्य था जिसमें पात्र वकील को 'बेशर्म' कहता है. इसी डायलॉग पर मनोज गुप्ता की याचिका पर मध्य प्रदेश के कटनी की एक अदालत ने उन्हें नोटिस जारी किया है. अक्षय के साथ-साथ जी एंटरटेनमेंट के सुभाष चंद्रा के साथ-साथ रुस्तम फिल्म के निर्माता-निर्देशक व लेखक भी मुसीबत में पड़ गए हैं. कोर्ट ने सभी को 10 मार्च को अदालत में पेश होने का आदेश दिया है.
  
रुस्तम के एक संवाद पर कटनी की अदालत का नोटिस
2016 में अक्षय कुमार स्टारर फिल्म 'रुस्तम' के एक सीन में संवाद के दौरान वकील को 'बेशर्म' कहने के कारण फरियादी मनोज गुप्ता ने कटनी की अदालत में याचिका दायर की है. बताते हैं कि फरियादी खुद पेशे से वकील हैं. उन्होंने इस फिल्म को अपने साथी अंशु मिश्रा के देखी थी. उन्होंने याचिका में जिक्र करते हुए कहा है कि फिल्म के एक सीन में फिल्म का मुख्य पात्र (अक्षय कुमार)  दूसरे कलाकार (अनंग देवाई) से अदालत की कार्यवाही के दौरान जिरह करते हुए वकील के लिए 'बेशर्म' जैसे शब्द का प्रयोग कर रहा है जो कि सरासर गलत है. साथ ही यह शब्द किसी भी व्यक्ति की विधिक कार्य प्रणाली को चुनौती देने वाला और उसकी पेशेवर जीवन को ठेंस पहुंचाने वाला है. ऐसे में वकील को 'बेशर्म' शब्द से संबोधित करने के कारण समस्त वकीलों की मानहानि हुई. इसलिए फरियादी ने अदालत से फिल्म से जुड़े जिम्मेदार लोगों को दंडित किए जाने की गुहार लगाई है.

जमानती हैं धाराएं
इस मामले में संज्ञान लेते हुए कटनी कोर्ट ने फिल्म के हीरो अक्षय कुमार, जी एंटरटेनमेंट के सुभाष चंद्रा, डायरेक्टर टीनू सुरेश देसाई, लेखक विपुल के रावल, फिल्म कलाकार अनंग देसाई, सिटी प्राइड सिनेमा हॉल, सिटी मॉल कटनी के मालिक सुरेश गुप्ता समेत अन्य लोगों को 10 मार्च को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है. विधि मामलों के जानकार के अनुसार, इस मामले में कटनी अपर सत्र न्यायाधीश ने 10 मार्च 2021 को सुनवाई के दौरान पेशी संबंधी नोटिस जारी किया है. फरियादी के वकील मिथलेश जैन ने बताया कि 500, 501, 502 भादंवि के अंतर्गत प्रस्तुत किए गए परिवाद में सभी धाराएं जमानती है. साथ ही इनमें दो साल की सजा या फिर जुर्माने का प्रावधान है.

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First Published : 27 Feb 2021, 12:48:08 PM

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