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64वां नेशनल फिल्म अवॉर्ड: जानिए किन वजहों से 'पिंक' को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

महिला प्रधान फिल्म पिंक को साल 2016 के 64वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में मिला बेस्ट सोशल फिल्म अवार्ड।

By : Shivani Bansal | Updated on: 07 Apr 2017, 01:18:37 PM
फिल्म 'पिंक' को मिला बेस्ट सोशल फिल्म अवॉर्ड (फाइल फोटो)

फिल्म 'पिंक' को मिला बेस्ट सोशल फिल्म अवॉर्ड (फाइल फोटो)

highlights

  • साल 2016 के 64वें राष्ट्रीय सिने पुरस्कारों की घोषणा हुई।  
  • फिल्म पिंक को मिला सामाजिक मुद्दों पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म पुरस्कार। 
  • अमिताभ बच्चन ने इस महिलाप्रधान फिल्म में अहम किरदार निभाया था।  

नई दिल्ली:

साल 2016 के 64वें राष्ट्रीय सिने पुरस्कारों की घोषणा की गई। इनमें सोशल मुद्दों पर बनी अमिताभ बच्चन स्टाटर फिल्म पिंक को बेस्ट फिल्म का खिताब मिला है।

फिल्म 'पिंक' को सोशल मुद्दे पर बेस्ट फिल्म का खिताब मिला है। साल 2016 में आई निर्देशक अनिरुद्ध रॉय चौधरी की अमिताभ बच्चन स्टाटर इस फिल्म में मुख्य भूमिकाएं तापसी पन्नू, कीर्ति कुल्हारी और एंड्रिया तारियांग ने निभाई थी।

यह थीं फिल्म 'पिंक' की ख़ास बातें 

1. फिल्म 'पिंक' बिंदास लड़कियों की कहानी है जो अपने दम पर ज़िंदगी जीना चाहती हैं। लेकिन समाज से जुदा इन लड़कियों के ख़्यालात इनकी परेशानियों का सबब बन जाते हैं और फिर इन्हें लड़नी पड़ती है एक संगीन लड़ाई। 

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2. अमिताभ बच्चन इस फिल्म में वकील के किरदार में नज़र आए थे। जो अपनी क्लाइंट्स और इन लड़कियों के स्त्रीत्व की लड़ाई लड़ने में इनका साथ देते हैं। यह फिल्म बदलते वक्त में बदलती महिलाओं की सोच और उसके साथ अभी भी जारी उनके प्रति दकियानूसी सोच की कहानी बयां करती है। 

3. इस फिल्म को दर्शकों का भरपूर प्यार और दुलार मिला, क्योंकि फिल्म दर्शकों की संवेदनाओं पर सीधे प्रहार करती है और खुद को फिल्म के किरदारों से सीधा जोड़ती है। शायद फिल्म का एक डॉयलॉग 'नो... मिन्स नो' दर्शकों के दिल पर चोट करता है और यह समझाने पर मजबूर करता है कि न का मतलब हर लिहाज से सिर्फ न ही होता है।

4. यह फिल्म बीच-बीच में कहीं न कहीं पूर्व में बनी महिला प्रधान फिल्म 'दामिनी' और 'नो वन किल्ड जेसिका' सरीखी फिल्मों की याद दिलाती हैं।

5. इन फिल्मों की भांति इस फिल्म में भी लड़कियों के स्वच्छंद व्यवहार को उनके ख़राब कैरेक्टर की कैटेगरी में रखने की समाज का दोयम सोच को दर्शाता है।

इस फिल्म में दर्शकों ने खुद को महिलाओं की स्थिति और उनके संघर्ष से कहीं न कहीं सीधा कनेक्ट किया और समाज की उस सोच पर चोट की जो महिलाओं की स्वच्छंदता को ढील समझ उसका फायदा उठाते हैं।

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First Published : 07 Apr 2017, 12:53:00 PM

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