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राजस्थान : भाषण और वादों तक सिमटा महिला सशक्तिकरण, कांग्रेस 16 और बीजेपी 8 फीसदी पर अटकी

देश की दो सबसे बड़ी पार्टियों बीजेपी और कांग्रेस ने महिलाओं को चुनाव लड़ाने में कंजूसी की है

Written By : लालसिंह फौजदार | Edited By : Dalchand Kumar | Updated on: 10 Apr 2019, 08:36:25 AM

जयपुर:

राजनीतिक दलों के लिए महिलाएं महत्वपूर्ण तो हैं, लेकिन सरकार बनाने के लिए, सरकार में भागीदारी देने के लिए नहीं हैं. महिलाओं की भागीदारी चुनाव में मतदान करने में पिछले 15 साल में तेजी से बढ़ी है, लेकिन देश की दो सबसे बड़ी पार्टियों बीजेपी और कांग्रेस ने महिलाओं को चुनाव लड़ाने में कंजूसी की है. राजस्थान में जहां कांग्रेस ने पिछली बार 6 की तुलना में सिर्फ 4 महिलाओं को टिकट दिया है, वहीं बीजेपी उसकी परंपरा को कायम रखते हुए इस बार 23 में से महज 2 महिलाओं को टिकट दिए हैं.

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लोकसभा चुनाव से लेकर छोटे से छोटे चुनाव में महिला सशक्तिकरण और उन्हें बराबरी का हिस्सा देने का नारा जोर-शोर से लगाया जाता रहा है. चुनाव में बड़े-बड़े वादे उनसे किए जा रहे हैं. चुनाव में उन्हें आरक्षण देने का वादा पिछले करीब 30 साल से किया जा रहा है. अब तो महिलाओं का मतदान प्रतिशत भी पुरुषों से अधिक रहने लगा है. इसके उदाहरण पिछले दो विधानसभा चुनाव है. चार महीने पहले हुए राजस्थान में हुए विधानसभा चुनाव में जहां पुरुषों का मतदान प्रतिशत 73.83 था, वहीं महिलाओं का 74.68 प्रतिशत रहा. हालांकि लोकसभा चुनाव के दौरान महिलाओं का मतदान प्रतिशत नहीं बढ़ सका है.

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कांग्रेस 16 और बीजेपी 8 फीसदी पर अटकी
इस बार के चुनाव में कांग्रेस ने 4 महिला उम्मीदवार उतारे हैं और यह कुल सीटों का 16 फीसदी बैठता है. जबकि बीजेपी और रालोपा के गठबंधन की 24 सीट पर उम्मीदवार तय हो गए हैं. फिलहाल 2 महिलाओं को टिकट दिया है. यह कुल सीटों का 8 फीसदी है. बीजेपी ने 2014 की राज्य से एकमात्र महिला सांसद संतोष अहलावत का झुंझुनूं से टिकट काट दिया. अधिक संख्या में महिलाओं को उम्मीदवार नहीं बनाने का नेताओं के पास सबसे अच्छा बहाना जिताऊ नहीं होने का रहता है. नेताओं का तर्क है कि जब आरक्षण लागू होगा तो सभी दलों को मजबूरी में महिलाओं को टिकट देना होगा. ऐसे में खुद-ब-खुद महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ जाएगा.

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कांग्रेस ने 2014 के चुनाव में प्रदेश से छह महिला उम्मीदवारों को चुनाव में उतारा था. हालांकि इनमें से जीत किसी के हाथ नहीं आई थी. जबकि 2004 और 1991 में सबसे कम एक-एक महिला को टिकट दिया गया. इस बार राजस्थान में यह महिला उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं.

कांग्रेस

  • जयपुर : ज्योति खंडेलवाल
  • जयपुर ग्रामीण : कृष्णा पूनिया
  • नागौर : ज्योति मिर्धा
  • दौसा : सविता मीणा

बीजेपी

  • राजसमंद : दीया कुमारी
  • भरतपुर : रंजीता कोहली

आरक्षण बिल लटक रहा
चुनाव में महिलाओं को समान भागीदारी देने को कोई भी पार्टी तैयार नहीं दिख रही है. महिलाओं के 33 फीसदी आरक्षण की बात करने वाली दोनों पार्टियों के हाल खराब है. महिला आरक्षण बिल किसी न किसी बहाने संसद में लटका दिया गया.

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प्रदेश में भी पुरुष वोटरों से ज्यादा बढ़ी महिला वोटर
प्रदेश में 2014 लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार महिला वोटरों की संख्या पुरुषों से अधिक बढ़ी है. पुरुष 26 लाख 85 हजार 356 बढ़े हैं, तो महिलाएं 28 लाख 97 हजार 814 बढ़ी हैं. प्रदेश में इस बार 2 करोड़ 52 लाख 64 हजार 656 पुरुष मतदान करेंगे. वहीं 2 करोड़ 32 लाख 14 हजार 342 महिलाएं अपने मत का उपयोग करेंगी. 7 लोकसभा सीटों पर 16 लाख से ज्यादा नए वोटर जुड़े यानी हर सीट पर करीब ढाई लाख. इन 7 में से 6 सीटों पर नई महिला वोटर ज्यादा बढ़ीं.

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First Published : 10 Apr 2019, 08:36:22 AM

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