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अब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, राष्ट्रपति से की गई शिकायत, जानें क्यों

लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) को लेकर देशभर में आचार संहिता लागू है.

News Nation Bureau | Edited By : Deepak Pandey | Updated on: 09 Apr 2019, 01:20:57 PM
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (फाइल फोटो)

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) को लेकर देशभर में आचार संहिता लागू है. इसे सख्ती से लागू कराने और निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराने की जिम्मेदारी आयोग की है. इस बीच ही कुछ लोगों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठा दिए हैं. उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर इसकी शिकायत की है.

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आचार संहिता के पालन के प्रति चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर 66 पूर्व नौकरशाहों ने गहरी चिंता जताई. नौकशाहों ने चुनाव आयोग की शिकायत करते हुए अपने पत्र में 'ऑपरेशन शक्ति' के दौरान एंटी सैटेलाइट मिसाइल के सफल परीक्षण के बाद पीएम नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन, पीएम नरेंद्र मोदी पर बनी बायोपिक, वेब सीरीज और बीजेपी के कई नेताओं के आपत्तिजनक भाषणों का जिक्र भी किया है. जिन पर चुनाव आयोग को की गई शिकायत के बावजूद महज दिखावे की ही कार्रवाई हुई.

राष्ट्रपति को खत लिखने वालों में पूर्व विदेश सचिव शिवशंकर मेनन, दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, पंजाब के पूर्व डीजीपी जुलियो रिबेरो, प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जवाहर सरकार और ट्राई के पूर्व चेयरमैन राजीव खुल्लर जैसे पूर्व नौकरशाह शामिल हैं. नौकरशाहों की ओर से लिखे पत्र में कहा गया है कि सत्तारूढ़ दल और केंद्र सरकार अपने रुतबे का दुरुपयोग मनमाने ढंग से करते हुए आचार संहिता की धज्जियां उड़ा रहे हैं. उनके ऐसे मनमाने कामकाज से साफ है कि चुनाव आयोग के प्रति भी उनके मन में कोई सम्मान नहीं है.

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पूर्व नौकरशाहों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखने से पहले चुनाव आयोग को भी पत्र लिखकर आचार संहिता के उल्लंघन को रोकने की बात कही थी. इस पत्र में उन्होंने मोदी बायोपिक फिल्म समेत कई अन्य सामग्रियों पर अपनी गहरी चिंताएं जताई थीं. अब यही शिकायती पत्र राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भी लिखा गया है.

इस बीच चुनाव आयोग ने निर्देश जारी करते हुए 11 अप्रैल से शुरू हो रहे लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से अंतिम चरण तक मीडिया संस्थान और ज्योतिषी चुनाव को लेकर किसी तरह के चुनावी सर्वेक्षण या भविष्यवाणी पर रोक लगा दी है. आयोग की ओर से सोमवार को जारी निर्देश के अनुसार, 11 अप्रैल को सुबह सात बजे पहले चरण का मतदान शुरू होने से 19 मई को शाम साढ़े छह बजे सातवें चरण का मतदान होने तक किसी भी तरह की भवष्यवाणी, चुनावी सर्वेक्षण और चुनाव परिणाम संबंधी आकलन नहीं किया जा सकेगा.

First Published : 09 Apr 2019, 01:20:51 PM

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