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पंजाब में कल मतदान, सूबे में दलित वोटरों पर नजर, जानें पूरी स्थिति

Written By : विजय शंकर | Edited By : Vijay Shankar | Updated on: 19 Feb 2022, 10:19:16 AM
Dalit voters in punjab

Dalit voters in punjab (Photo Credit: File Photo)

highlights

  • पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए रविवार को मतदान
  • राज्य में अनुसूचित जातियां कुल आबादी का लगभग 32 प्रतिशत
  • राष्ट्रीय स्तर पर 4.3 प्रतिशत अनुसूचित जातियां पंजाब में है

 

नई दिल्ली:  

पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 के लिए कल यानी रविवार को मतदान होगा. प्रदेश में 14,751 जगहों पर 24,740 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं, लेकिन इन सभी के बीच सभी की नजरें दलित वोटर पर होंगी. वैसे तो जाट विषय पंजाबी पॉप, फिल्मों और राजनीति में जोरशोर से गूंजता है, लेकिन इनका यह प्रभुत्व राज्य की डेमोग्राफी को झुठलाती है. पंजाबी जाट राज्य की 3.7 करोड़ की आबादी का लगभग 20 प्रतिशत है. आनुपातिक रूप से पंजाब भारत में अनुसूचित जाति समुदायों की उच्चतम सघनता का केंद्र है.  आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि सिख-बहुल राज्य में अनुसूचित जातियां इसकी कुल आबादी का लगभग 32 प्रतिशत और अनुसूचित जाति का 4.3 प्रतिशत राष्ट्रीय स्तर पर हैं, लेकिन जिस चीज ने पंजाब के जाति कारक को राष्ट्रीय सुर्खियां बटोरीं, वह थी सितंबर 2021 में राज्य के पहले दलित मुख्यमंत्री के रूप में अनुसूचित जाति के विधायक चरणजीत सिंह चन्नी का आना. 

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जाति डेमोग्राफी का बिखराव

राज्य में 35 से अधिक नामित अनुसूचित जातियों में से मजहबी, रविदासिया/रामदासिया, आद-धर्मी, वाल्मीकि और बाजीगर मिलकर पंजाब की कुल अनुसूचित जाति की आबादी का लगभग 87 प्रतिशत हैं.

मजहबी कौन हैं?

मजहबी सिख पारंपरिक रूप से सफाई के काम से जुड़े हुए हैं. वे संख्यात्मक रूप से सबसे बड़े अनुसूचित वर्ग है जो पंजाब की सभी अनुसूचित जातियों का 31.5 प्रतिशत है. 

रविदास/रामदासियां ​​कौन हैं?

रविदासिया हिंदू और रामदासिया सिख मिलकर पंजाब की कुल अनुसूचित जाति की आबादी का 26.2 प्रतिशत हिस्सा हैं. मुख्यमंत्री चन्नी रामदसिया सिख हैं. रामदसिया और रविदासिया दोनों पारंपरिक रूप से चमड़े से संबंधित व्यवसायों से जुड़े हुए हैं. 

आद-धर्मी कौन हैं?

इसके बाद आद-धर्मी हैं या जिसे वे मूल आस्था कहते हैं, उसके अनुयायी हैं. वे पंजाब की अनुसूचित जाति की आबादी का 15 प्रतिशत हिस्सा हैं. आद-धर्मी समुदाय की उत्पत्ति 1925-35 के एक आद धर्म आंदोलन से हुई थी. यह खुद को भारत के अपने आदिवासियों के रूप में पहचानता है.

वाल्मीकि कौन हैं?

पंजाब के अनुसूचित जाति पदानुक्रम में वाल्मीकि हिंदू 11 प्रतिशत हैं. मजहबियों की तरह वे भी पारंपरिक रूप से स्वच्छता और सफाई के काम से जुड़े हुए हैं. 

ग्रामीण इलाकों में एससी वर्ग ज्यादा
पंजाब के अनुसूचित जाति मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों में निवास करते हैं. इनमें से करीब 70 फीसदी गांवों में रहते हैं. आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य के 23 जिलों में एक तिहाई या उससे अधिक आबादी अनुसूचित जाति की है. राज्य के 12,000 से अधिक बसे हुए गांवों में से 57 गांवों में अनुसूचित जाति की आबादी 100 फीसदी और उससे सटे गांवों में 40 फीसदी या उससे अधिक है. जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब की अनुसूचित जाति की जनसंख्या की दशकीय वृद्धि दर 2011 में लगभग 26 प्रतिशत थी, जबकि पूरे राज्य में यह लगभग 14 प्रतिशत थी. 


जाट नियंत्रण कृषि अर्थव्यवस्था

जाट राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था में प्रमुख स्टेकहोल्डर्स हैं. वर्ष 2015-16 की कृषि जनगणना के अनुसार, इसके विपरीत, दलितों के पास पंजाब की निजी कृषि भूमि का केवल 3.5 प्रतिशत हिस्सा है. आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि पंजाब की अनुसूचित जाति की लगभग एक तिहाई आबादी श्रम में लगी हुई है, जिनमें से लगभग 21 प्रतिशत सीमांत श्रमिक हैं. यही कारण है कि 2020-21 के कृषि आंदोलन में दलितों की भागीदारी कम हो गई. वर्ष 
2011 की जनगणना के अनुसार, पंजाब के अनुसूचित जाति के बीच साक्षरता दर राज्य में 76 प्रतिशत और राष्ट्रीय स्तर पर 73 प्रतिशत की तुलना में लगभग 65 प्रतिशत है. 

पंजाब की राजनीति में दलित

चन्नी के मुख्यमंत्री बनने से पहले पंजाब में केवल दो गैर जाट मुख्यमंत्री थे. ज्ञानी जैल सिंह, जिन्होंने 1972-77 तक पद संभाला था, रामगढ़ी थे, जो बढ़ईगीरी से जुड़ी जाति थी. इससे पहले, एक व्यापारी जाति के ज्ञानी गुरमुख सिंह मुसाफिर को 1966 में राज्य का दर्जा मिलने के बाद पंजाब का पहला मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया था. वह 127 दिनों तक इस पद पर रहे. पंजाब में 34 आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र हैं.

पूरी तरह विभाजित हैं वोटर

राज्य के दलित ऐतिहासिक रूप से एक बड़े गुट नहीं रहे हैं. वे धार्मिक आधार पर और राजनीतिक वफादारी में विभाजित हैं. एक लेखक और जाति व्यवस्था के विशेषज्ञ बलबीर माधोपुरी ने अच्छे तरीके से इसे समझाने की कोशिश की है. माधोपुरी ने कहा, "पंजाब में दलित नेतृत्व एकजुट नहीं है. दलित जाति समूहों के भीतर काफी गुटबाजी है जिसके कारण बहुत अधिक राजनीतिक अवसरवाद है.

34 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित

पंजाब की 117 सीटों में से 34 (एक तिहाई) सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं. आरक्षित सीटों में, 34 आरक्षित सीटों में से आठ सीटें ऐसी हैं, जहां पर 40% से अधिक दलित मतदाता हैं.  बंगा (49.71%), करतारपुर (48.82%), फिल्लौर (46.85%), आदमपुर (46.16%), चब्बेवाल (45.36%), शाम चौरासी (44.67%), भोआ (42.48%) और मलोट (40.62%). 

ऐसे उभरा था बसपा
दलित के सबसे बड़े नेता कांशी राम का जन्म पंजाब में हुआ था. उन्होंने 1984 के महत्वपूर्ण वर्ष में बसपा की स्थापना की. बारह साल बाद बसपा ने शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन किया और कांशीराम होशियारपुर से लोकसभा के लिए चुने गए. यह साझेदारी अधिक समय तक नहीं चल सकी और उग्रवाद के घावों से उभरने के लिए संघर्ष कर रहे राज्य में शहरी हिंदू मतदाताओं को लुभाने के लिए अकालियों ने भाजपा में शामिल होना चुना. बसपा का 1992 के पंजाब विधानसभा चुनावों में सबसे अच्छा प्रदर्शन था, जब उसने 16.3 प्रतिशत के वोट-शेयर के साथ नौ सीटें जीती थीं.  अकालियों की चेतावनी ने उस वोट का बहिष्कार किया. इसके बाद पार्टी में गिरावट आई. यह 2017 के विधानसभा चुनावों में लोकप्रिय वोटों का सिर्फ 1.5 प्रतिशत ही मैनेज कर सका, लेकिन पंजाब में बसपा की किस्मत में एक चांदी की परत फिर से उभर आई जब उसके तीन उम्मीदवारों ने 2019 के लोकसभा चुनाव में 3.49 प्रतिशत वोट शेयर के साथ तीसरा स्थान हासिल किया. पार्टी अब बादल के साथ गठबंधन में राज्य की 117 सीटों में से 20 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. 


किन सीटों पर कितने दलित वोटर्स

पंजाब की 117 में से 98 सीटों (34 आरक्षित सीटों और 57 सामान्य सीटों) पर दलितों की हिस्सेदारी होगी. जिन सामान्य सीटों पर दलित मतदाता ज्यादा हैं वे हैं- नकोदर (43.89%), नवां शहर (40.66%), लंबी (40.50%), मजीठा (37.44%), गढ़शंकर (38.62%), मुक्तसर (35.38%), कोटकपूरा (35.64%), फरीदकोट (35.25%), भाग पुराण (35.18%). नवजोत सिद्धू की अमृतसर पूर्व सीट पर भी 21.91 फीसदी दलित वोटर हैं. बहुध्रुवीय चुनावों में जहां आधा प्रतिशत भी महत्वपूर्ण होता है, दलित वोटर्स की सबसे कम उपस्थिति 10.46 प्रतिशत भी मायने रखती है.

First Published : 19 Feb 2022, 10:19:16 AM

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