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लोकसभा चुनाव

जानिए कौन हैं सोफिया फिरदौस, जो ओडिशा में पहली बार बनी हैं कांग्रेस की मुस्लिम विधायक

Congress MLA Sophia Firdous: ओडिशा में कांग्रेस की एक मात्र मुस्लिम महिला उम्मीदवार सोफिया फिरदौस चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची हैं.

Updated on: 09 Jun 2024, 03:53 PM

New Delhi:

Congress MLA Sophia Firdous: लोकसभा चुनाव के साथ-साथ ओडिशा में विधानसभा का चुनाव हुआ. जहां पहली बार बीजेपी की सरकार बनने जा रही है. इसी के साथ ओडिशा की सत्ता में 24 साल काबिज रहे नवीन पटनायक की विदाई हो गई. 147 सदस्यों वाली ओडिशा विधानसभा में बीजेपी ने 78 सीटें जीती है जबकि बीजेडी ने 51 सीटें जीती हैं. ऐसे में कांग्रेस की एक विधायक की काफी चर्चा है. जो ओडिशा विधानसभा में चुनाव जीतकर पहुंचने वाली इकलौती मुस्लिम महिला हैं. दरअसल, सोफिया फिरदौर ने कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता और जीत दर्ज की.

ओडिशा की पहली मुस्लिम महिला विधायक

सोफिया फिरदौस ओडिशा की पहली मुस्लिम महिला विधायक बनी हैं. हालांकि, सोफिया फिरदौस अपनी पहचान "मुस्लिम विधायक" से पहले एक उड़िया, भारतीय और एक महिला के रूप में रखती हैं. सोफिया फिरदौस का कहना है कि, “मैं एक उड़िया, भारतीय और सबसे पहले एक महिला हूं. रियल एस्टेट में अपने करियर और पेशेवर जीवन के दौरान, मैंने महिला सशक्तिकरण के लिए कड़ी मेहनत की है और मैं राजनीति में भी ऐसा करना जारी रखूंगी. 32 वर्षीय कांग्रेस विधायक का कहना है कि एक मुस्लिम राजनेता होने के बारे में मैंने कभी नहीं सोचा.

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कैसे हुई राजनीति में सोफिया की एंट्री

राजनीती में एंट्री और अपना पहला चुनाव पड़ने पर सोफिया फिरदौस करती हैं कि मैरे पास चुनाव की तैयारी करने के लिए सिर्फ एक महीना था. बता दें कि सोफिया के पिता मोहम्मद मोकीम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बाराबती-कटक से कांग्रेस विधायक रहे हैं. जिन्हें ऋण धोखाधड़ी मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद अयोग्य घोषित कर दिया गया था, अप्रैल में ओडिशा उच्च न्यायालय ने भी कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा था.

पिता की जगह सोफिया को दिया टिकट

पिता के अयोग्य ठहराए जाने के बाद कांग्रेस ने उनकी बेटी सोफिया फिरदौस को विधानसभा चुनाव में टिकट दिया और जीत हासिल की. सोफिया का कहना है कि, "मैं कोई राजनेता नहीं हूं. जब मेरे पिता चुनाव लड़ने में असमर्थ थे, तो हमारे आवास पर 400-500 समर्थकों की एक बड़ी सभा बुलाई गई. मेरे पिता की कड़ी मेहनत और कटक में उनके द्वारा स्थापित किए गए ठोस आधार को पहचानते हुए, उन्होंने सर्वसम्मति से मुझे मैदान में उतरने का समर्थन किया."

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सोफिया का कहना है कि, "हालांकि, मेरा मुख्य डर यह था कि लोग मेरे पिता को अच्छी तरह से जानते थे. वह 2014 में हार गए और फिर 2019 में विजयी हुए. तो लोग मुझे इतनी जल्दी वोट क्यों देंगे और मुझ पर भरोसा क्यों करेंगे? भीषण गर्मी में सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक प्रचार चला. फिर इसे शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक फिर से शुरू किया गया. कुछ ऐसा जो वास्तव में मेरे लिए काम आया, मुझे लगता है कि वह मेरे पिता का अच्छा काम था."

8001 वोट से दर्ज की जीत

बता दें कि सोफिया फिरदौस ने बीजेपी की उम्मीदवार पूर्ण चंद्र महापात्रा को 8001 वोटों से हराया. हालांकि, कांग्रेस 147 सदस्यीय विधानसभा में केवल 14 सीटें ही जीत पाई है. बीजेपी और बीजेडी के बाद कांग्रेस में राज्य में तीसरे नंबर की पार्टी बनी है. बीजेपी 78 सीटें जीतने के बाद बीजेडी को 24 साल बाद सत्ता से बेदखल कर दिया.

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