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Lok Sabha Elections 2019 : अशोक गहलोत का गढ़ रहे जोधपुर में 29 अप्रैल को पड़ेंगे वोट, क्या वापसी कर पाएगी कांग्रेस?

देश में लोकसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान हो चुका है. 7 चरणों में वोट डाले जाएंगे.

News Nation Bureau | Edited By : Deepak Pandey | Updated on: 11 Mar 2019, 07:17:24 AM
अशोक गहलोत (फाइल फोटो)

अशोक गहलोत (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

जोधपुर लोकसभा सीट (Jodhpur lok sabha seat) : देश में लोकसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान हो चुका है. 7 चरणों में वोट डाले जाएंगे. इसे लेकर राजनीतिक पार्टियों ने अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी है. राजस्थान में अभी कांग्रेस की सरकार है. ऐसे में दोनों बड़ी पार्टी कांग्रेस और बीजेपी मिशन 2019 की तैयारी जुट गई है. वैसे तो यहां की सभी सीटों का महत्व है, लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह जिला जोधपुर खास मायने रखता है.

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बता दें कि राजस्थान में 25 लोकसभा सीटें हैं, जहां दो चरणों में मतदान होगा. चौथे चरण का चुनाव 29 अप्रैल को होगा, जिसमें प्रदेश की 13 लोकसभा सीटों पर मतदान होगा. इसी तरह पांचवें चरण का मतदान 6 मई को 12 लोकसभा सीटों के लिए होगा. विधानसभा चुनाव में जीत से कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं, वहीं बीजेपी भी इस हार की भरपाई लोकसभा चुनाव से करना चाहेगी. वैसे तो राजस्थान में दोनों बड़े सियासी दल लक्ष्य-25 के मिशन पर काम कर रहे हैं. राज्य की हॉट सीट कही जाने वाली जोधपुर में 29 अप्रैल को वोट पड़ेंगे. ये सीट कई दशकों से राज्य की सियासत का केंद्र बना हुआ है, क्योंकि कभी इस सीट से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जीता करते थे. गहलोत का विधानसभा क्षेत्र सरदारपुरा भी जोधपुर में ही आता है.

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जोधपुर संसदीय सीट पर आजादी के बाद हुए 16 आम चुनावों और 1 उपचुनाव में 8 बार कांग्रेस का कब्जा रहा, जबकि 4 बार बीजेपी ने जीत दर्ज की. वहीं, 4 बार निर्दलीय उम्मीदवार, 1 बार भारतीय लोकदल ने बाजी मारी. इस सीट पर सबसे ज्यादा 8 बार जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस 1957, 1967, 1980, 1984, 1991, 1996, 1998, 2009 में जीती, जबकि 1989, 1999, 2004 और 2014 में यह सीट बीजेपी के खाते में गई. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस सीट का पांच बार प्रतिनिधित्व किया. माली समुदाय से आने वाले गहलोत ने राजपूतों के वर्चस्व वाली सीट पर सभी सियासी समीकरणों को धाराशाई कर दिया.

जोधपुर का परिचय
राजस्थान के दूसरे सबसे बड़े शहर जोधपुर की स्थापना राव जोधा ने 12 मई, 1459 ई. में की थी, 'सूर्य नगरी' के नाम से प्रसिद्ध जोधपुर शहर की पहचान यहां के महलों और पुराने घरों में लगे छितर के पत्थरों से होती है, ऐतिहासिक इमारतों को समेटे जोधपुर पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हमेशा सा रहा है, यहां स्थित मेहरानगढ़ दुर्ग को घेरे हुए हजारों नीले मकानों के कारण इसे 'नीली नगरी' के नाम से भी जाना जाता है, इसकी आबादी 29,60,625 है, जिसमें से मात्र 57 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है, जबकि 42 प्रतिशत लोग यहां के शहरों में निवास करते हैं.

सामाजिक समीकरण
जोधपुर लोकसभा क्षेत्र जोधपुर और जैसलमेर के कुछ हिस्सों को मिलाकर बनाया गया है. साल 2008 के परिसीमन के बाद यहां का जाट बहुल क्षेत्र पाली में चले जाने से यह सीट राजपूत बहुल हो गई है. इसके अलावा इस सीट पर विश्नोई समाज का भी खासा प्रभाव है, जबकि कुछ इलाकों में मुस्लिम वोट निर्णायक है. साल 2011 की जनगणना के मुताबिक यहां की जनसंख्या 29,60,625 है, जिसका 54.46 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण और 42.54 प्रतिशत हिस्सा शहरी है. वहीं कुल आबादी का 14.91 फीसदी अनुसूचित जाति और 3.46 फीसदी अनुसूचित जनजाति हैं. साल 2014 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों के मुताबिक इस सीट पर मतदाताओं की संख्या 17,27,363 है, जिसमें 9,10,466 पुरुष और 8,16,897 महिला मतदाता हैं.

कांग्रेस ने 2018 के विस चुनाव में जबरदस्त वापसी की थी
साल 2013 के विधानसभा चुनाव और गत लोकसभा चुनाव में अपना यह गढ़ बीजेपी के हाथों गंवा बैठी कांग्रेस ने दिसंबर 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में जबरदस्त वापसी की है. पहले जोधपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की 10 सीटें आती थीं. लेकिन 2008 के परिसीमन में यहां की 2 जाट बहुल सीटों को पाली में शामिल कर दिया गया. हाल में हुए विधानसभा चुनाव में जोधपुर लोकसभा क्षेत्र की 8 सीटें-पोकरण, फलोदी, लोहावट, शेरगढ़, सरदारपुरा, जोधपुर शहर और सूरसागर विधानसभा में 6 सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की. जबकि बीजेपी को महज 2 सीट फलोदी और सूरसागर से संतोष करना पड़ा.

2014 का जनादेश
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में जोधपुर लोकसभा सीट पर बीजेपी का पलड़ा भारी था. विधानसभा चुनाव में मिली अप्रत्याशित जीत को दोहराते हुए बीजेपी ने कांग्रेस का गढ़ रहे इस सीट पर जीत का परचम लहराया. बीजेपी से गजेंद्र सिंह शेखावत ने कांग्रेस से राजघराने की चंद्रेश कुमारी कटोच को 4,10,051 मतों के भारी अंतर से पराजित किया था, जहां शेखावत को 7,13,515 वोट मिले तो वहीं चंद्रेश कुमारी कटोच को 3,03,464 वोट मिले.

सांसद की रिपोर्ट कार्ड
जोधपुर सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत का जन्म 3 अक्टूबर 1967 में हुआ था. शेखावत ने जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी से एमए और एमफिल की डिग्री हासिल की और 1992 में छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए. गजेंद्र सिंह शेखावत इस वक्त मोदी सरकार में कृषि और किसान कल्याण राज्यमंत्री के रूप में कार्यरत हैं. राजपूत परिवार में जन्मे गजेंद्र सिंह सीकर जिले के महरौली गांव से संबंध रखते हैं. शेखावत भाजपा विंग के किसान मोर्चा के महासचिव भी हैं. दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 5 सालों में शेखावत की लोकसभा में उपस्थिति 91 प्रतिशत रही है और इस दौरान इन्होंने 320 डिबेट में हिस्सा लिया है और 312 प्रश्न पूछे हैं. शेखावत छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और स्वदेशी जागरण मंच से जुड़े रहे हैं. गजेंद्र सिंह शेखावत जमीन से जुड़े नेता माने जाते हैं. उन्होंने अपने सांसद विकास निधि का 49.32 फीसदी अपने क्षेत्र के विकास पर खर्च किया.

First Published : 11 Mar 2019, 07:16:06 AM

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