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दिल्ली के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, Guest Teachers के भरोसे चल रही पढ़ाई

दिल्ली सरकार के 1030 स्कूलों में कक्षा छठी से 10वीं तक के शिक्षकों के 3,825 पद खाली हैं.

Bhasha | Edited By : Vikas Kumar | Updated on: 24 Nov 2019, 05:34:16 PM
दिल्ली के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी

highlights

  • दिल्ली सरकार के ज्यादातर स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है.
  • दिल्ली सरकार के 1030 स्कूलों में कक्षा छठी से 10वीं तक के शिक्षकों के 3,825 पद खाली हैं.
  • दिल्ली के स्कूलों में गेस्ट टीचर्स के भरोसे चल रही है क्लास.

दिल्ली:  

दिल्ली सरकार (Delhi Government) के लिए अब एक नई मुसीबत है. दरअसल दिल्ली सरकार के ज्यादातर स्कूलों (delhi schools) में शिक्षकों की भारी कमी है. दिल्ली सरकार के 1030 स्कूलों में कक्षा छठी से 10वीं तक के शिक्षकों के 3,825 पद खाली हैं. इन कक्षाओं के लिए स्वीकृत शिक्षकों की संख्या 33,397 है, जिसमें स्थायी शिक्षक सिर्फ 17,695 हैं जबकि 11,877 अतिथि अध्यापक स्कूलों में पढ़ा रहे हैं. ज़र्फ एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष मंजर अली की ओर से दायर आरटीआई आवेदन के जवाब में शिक्षा निदेशालय ने बताया है कि सरकारी स्कूलों में विभिन्न अहम विषयों के शिक्षकों की कमी के साथ-साथ प्रधानाचार्य एवं उप प्रधानाचार्य के काफी पद भी खाली पड़े हैं.

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आरटीआई के जवाब में शिक्षा निदेशालय ने बताया कि 25 सितंबर 2019 तक अंग्रेजी विषय के टीजीटी के शिक्षकों के 704 पद खाली हैं जबकि कुल स्वीकृत पदों की संख्या 5462 है. दिलचस्प है कि 5462 पदों में से स्थायी शिक्षक केवल 2614 हैं और अतिथि शिक्षकों की संख्या 2144 है. आरटीआई के मुताबिक यही हाल, गणित के विषय का है. इस अहम विषय के 696 पद खाली पड़े हैं. इस विषय के लिए स्थायी शिक्षकों के 5848 पद स्वीकृत हैं, लेकिन स्थायी अध्यापक केवल 3282 हैं. वहीं अतिथि शिक्षक (Guest Teachers) 1870 हैं.

हिन्दी विषय के लिए कुल स्वीकृत पदों की संख्या 5048 है, जिसमें 3063 स्थायी अध्यापक हैं और 1821 अतिथि शिक्षक हैं. इस विषय के लिए 164 शिक्षकों की कमी है. टीजीटी संस्कृत के 162 और टीजीटी उर्दू के 675 पद खाली हैं. संस्कृत के लिए कुल स्वीकृत पद 4174, जिसमें से 2231 स्थायी शिक्षक हैं और 1781 अतिथि अध्यापक इस भाषा को पढ़ा रहे हैं. वहीं उर्दू के लिए 1031 पद स्वीकृत हैं और स्थायी शिक्षक 74 हैं, 282 अतिथि शिक्षक हैं और 675 अध्यापकों की कमी हैं.

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शिक्षा निदेशालय ने आरटीआई के जवाब में बताया है कि सहायक शिक्षक (नर्सरी) के 925 पद स्वीकृत जिसमें स्थायी शिक्षक 460 हैं और खाली पदों की संख्या 465 है. सहायक शिक्षक (प्राइमरी) के 4061 पदों में से 2027 स्थायी शिक्षक हैं और अध्यापकों के 2034 पद खाली हैं. ड्राइंग, पुस्तकालय और गृह विज्ञान के क्रमश: 439,202 तथा 399 पद खाली पड़े हैं. आरटीआई के अनुसार वहीं 11वीं और 12वीं कक्षा को पढ़ाने वाले पीजीटी शिक्षकों की बात करें तो 26 सितंबर 2019 तक अंग्रेजी के पीटीजी शिक्षकों के 42 पद खाली पड़े हैं, जबकि इस भाषा के लिए आवंटित पदों की संख्या 1822 है, जिसमें स्थायी शिक्षक 1399 है और अतिथि अध्यापक 381 है.

गणित के 823 पद स्वीकृत हैं जिसमें से 494 स्थायी शिक्षक और 226 अतिथि अध्यापक इस विषय को पढ़ा रहे हैं. विभिन्न स्कूलों में कॉमर्स के 129 शिक्षकों की कमी है. इस विषय के लिए 1056 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 663 स्थायी शिक्षक और 264 अतिथि अध्यापक नियुक्त हैं. कक्षा 11 वीं और 12वीं में अर्थशास्त्र पढ़ाने वाले 21 शिक्षकों की कमी है. राजनीति विज्ञान के 9, कैमेस्ट्री के 33, फिजिक्स के 47, बायोलॉजी के लिए 46 शिक्षकों की कमी है.

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आरटीआई के मुताबिक, शिक्षा विभाग में 31 अगस्त 2019 तक प्रधानाचार्य के 711 और उपप्रधानाचार्य के 419 पद खाली पड़े हैं. हालांकि शिक्षा निदेशालय ने बताया कि उसने सीधी भर्ती कोटे के तहत टीजीटी/टीजीटी (एमआईएलके) 9981 पदों पर भर्ती के लिए दिल्ली स्टाफ चयन बोर्ड (डीएसएसबी) को एक पत्र भेजा गया है. वर्ष 2017-18 और 2018-19 के लिए विभागीय पदोन्नति कोटे के तहत टीजीटी/टीजीटी (एमआईएल) के 1760 पद रिक्त हैं. निदेशालय फीडर कैडर से आवेदन करने के लिए दो सितंबर 2019 को पहले ही अधिसूचना जारी कर चुका है.

इस बाबत दिल्ली सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री का जिम्मा संभाल रहे उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से बात करने की कोशिश की गई। सिसोदिया को ई-मेल पर सवाल भेजे गए। हालांकि अब तक उनका जवाब नहीं मिला है। 

First Published : 24 Nov 2019, 05:28:37 PM

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