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लोकसभा चुनाव

Pariksha Pe Charcha 2023: पीएम मोदी से बच्चों के 10 सवाल और जानिए क्या हैं जवाब?

प्रधामनंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को 'परीक्षा पे चर्चा' पर छात्रों के कई मुश्किल सवालों के जवाब दिए. इस साल लगभग 38.8 लाख छात्रों ने 'परीक्षा पे चर्चा' के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है

Updated on: 27 Jan 2023, 02:34 PM

नई दिल्ली:

प्रधामनंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को 'परीक्षा पे चर्चा' पर छात्रों के कई मुश्किल सवालों के जवाब दिए. तालकटोरा स्टेडियम में सुबह 11 बजे से कार्यक्रम की शुरुआत हुई. पूरा स्टेडियम छात्रों से खचाखच भरा था. इस साल लगभग 38.8 लाख छात्रों ने 'परीक्षा पे चर्चा' के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है. जो पिछले साल पंजीकृत छात्रों की संख्या  (15.73 लाख) से दोगुना है. 2018 में लगभग 22,000 स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जो 2019 में बढ़कर 58,000 हो गया. फिर 2020 में रजिस्ट्रेशन करने वाले स्टूडेंट्स की संख्या बढ़कर 3 लाख और फिर 2021 में 14 लाख हो गई. आइए पीएम मोदी से किए दस सवालों के जवाबों के बारे में जानने की कोशिश करते हैं.

सवाल 1. पीएम मोदी से सबसे पहले अश्विनी मदुरई, केंद्रीय विद्यालय, नवतीश और प्रियंका से सवाल पूछती हैं- सवाल: हम पर परफॉर्मेंस को लेकर दबाव में होते हैं

जवाब: अश्विनी आप क्रिकेट खेलती हैं क्या, क्रिकेट में गुगली बॉल होती है. आप मुझे पहले ही बॉल में आउट करना चाहती हैं. अगर परिवार का लोग सोशल स्टेट्स के कारण बच्चों पर दबाव होता है तो ये गलत है. कभी-कभी मां बाप अपने सोशल स्टेट्स के कारण माता पिता बाहर बड़ी- बड़ी बात करके घर मे भी वही करते हैं.  जब हम चुनाव लड़ते हैं तो हम पर भी दबाव बनाया जाता है 200 लाए तो 250 क्यों सीटें नहीं लाए, 300 लाए तो 350 क्यों नहीं लाए तो दबाव हम पर भी होता है लेकिन उस दबाव को लेकर बैठेंगे क्या. आपको फोकस करने की ज़रूरत है, दबाव के दबाव में न रहें. अपनी क्षमता को महसूस करें. अपनी क्षमता को कम न समझें

2. सवाल- आरुषि चंबा से, अदिति दिवान पीएम मोदी से सवाल : परीक्षा के दौरान पढ़ाई कहां से शुरू करें?

जवाब: काम करने की कभी थकान नहीं होती, काम करने से सुकून मिलता है. आपकी पसंद की चीज़ों में आप सबसे ज़्यादा समय लगाते हैं, जो सबसे कठिन विषय है उसका स्लैब बनाइये. आराम से सॉल्यूशन निकालेंगे तो समाधान मिलेगा. मां का टाइम मैनेजमेंट सबसे बेहतर होता है, कभी मां थकती नहीं. आज माइक्रो मैनेजमेंट की जरूरत है.

3. सवाल- रूपेश कश्यप छत्तीसगढ़, तन्मय, ओडिशा - सवाल : अनुचित साधनों से कैसे बचा जाए ये बताइए? नकल करने वालों से कैसे बचें?

जवाब: अब तो बड़े गर्व से कहते हैं- जो मूल्यों में बदलाव आया है वो ख़तरनाक है, ये समाज को सोचना होगा. ट्यूशन वाले भी नकल करने के लिए गाइड करते हैं. कुछ स्टूडेंट नकल करने के तरीके खोजते रहते हैं, ये चोरी करने वाले बड़े क्रिएटिव होते हैं अगर इतनी मेहनत पढ़ाई में लगाते तो बेहतर होता, अब ज़िन्दगी बहुत बदल चुकी है. आज हर डगर पर एग्जाम है कितनी जगह नकल करोगे. नकल से जिन्दगी नहीं बन सकती है. मेहनत करने वालों से कहूंगा कि आपकी मेहनत रंग लाएगी. जीतते जीतते ज़िन्दगी जीनी है

4. सवाल: सूजल ने पूछा हार्ड वर्क या स्मार्ट वर्क क्या करें?

जवाब : कहावत है कौव्वे और गढ़े के पानी की जिसमें कंकर डालकर पानी पीता है तो ये स्मार्ट वर्क था. कुछ लोग सिर्फ हार्ड वर्क करते है कुछ सिर्फ स्मार्ट वर्क करते हैं. लेकिन कुछ स्मार्टली हार्ड वर्क कैसे करते हैं ये सोचना चाहिए. हमारी गाड़ी खराब हुई तो मैकेनिक ने 2 मिनट में ठीक किया तो 200 रुपये मांगे तो उसने स्मार्ट वर्क किया. 

5. सवाल: जोबिता पात्रा, गुरुग्राम- एवरेज स्टूडेंट एग्जाम में कैसे बेहतर करें?

जवाब : मैं आपको बधाई देता हूं कि आपने एवरेज स्टूडेंट अपने आपको कहा. बहुत बड़े तीस मरखा बनने की ज़रूरत नहीं. आपके अंदर कितना सामर्थ्य है ये जानना भी ज़रूरी है. माता-पिता को भी सोचना चाहिए. ज़्यादातर लोग सामान्य लोग होते हैं और वही असामान्य काम कर जाते हैं, दुनिया में ज्यादातर लोग जो सफल हुए वो पहले सामान्य लोग ही थे. पूरी दुनिया मे आर्थिक स्थिति की चर्चा हो रही है कि कौन देश आगे गया, कोरोना के बाद तो ये स्थिति है, लेकिन भारत आज दुनिया में आर्थिक तुलना में काफी महत्वपूर्ण है. आज भारत दुनिया में चमक रहा है

6. सवाल : मन्नत बाजवा, क्या आपको नकारात्मक बाते प्रभावित करते हैं तो आप क्या करते हैं? 

सवाल : मीडिया आपकी जब आलोचना करती हैं तो आप क्या करते हैं?

सवाल : आप चुनौतियों से कैसे लड़ते हैं?*

जवाब : आप जब एग्जाम देते है और वापस आकर परिवार के साथ बैठते हैं और कोई सवाल का जवाब नहीं आया तो आप कहते हैं आउट ऑफ स्लेबस है इसलिए ये सवाल भी आउट  ऑफ स्लेबस है. जहां तक मेरा सवाल है और मेरा कनविक्शन है कि समृद्ध लोकतंत्र के लिए आलोचना एक शुद्धि यंत्र है. आलोचना पूर्व शर्त है. ओपन सॉर्स तकनीक में लोग अपनी अपनी वस्तुएं डालते हैं और काफी लोगों के प्रयास से काफी बेहतर परिणाम मिलता है. कंपनियां भी करती है कि जो कमियां दिखाएगा उसे इनाम दिया जाएगा ऐसा किया जाता है

आलोचना करने वाला कौन है इसपर मामला सेट होता है. फैंसी ड्रेस में आपका प्रिय दोस्त कहे ये क्या पहना है तो आपका रिएक्शन अलग होगा. लेकिन जो इंसान आपको पसंद नहीं वो कहे तो रिएक्शन अलग होगा. उसी तरह से आलोचना करने वालों का इरादा अलग होता है उसपर ध्यान नहीं देना चाहिए. 

टोका टाकी आलोचना नहीं है

माता-पिता से आग्रह है कि टोका टाकी से बाहर निकलिए. पार्लियामेंट में स्पीच देने के लिए अच्छी तैयारी करते हैं और टिप्पड़ी करते रहते हैं. जवाब देने वाला उसकी टिप्पणी पर ही जवाब देता रहता है समय निकल जाता है. पीएम मोदी ने कहा, आलोचना के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है और ज़्यादातर लोग आरोप लगाते हैं. आलोचना नहीं करते. आलोचना को हमेशा मूल्यवान समझना चाहिए. आरोपो की परवाह नहीं करनी चाहिए.

7. सवाल - दीपेश, अधिताब, कामाक्षी, मनन, सोशल मीडिया की वजह से बहुत दिक्कत होती है क्या करें कैसे बचें?

जवाब : आप स्मार्ट हैं या गैजेट स्मार्ट है. आप अपने से भी ज़्यादा गैजेट को स्मार्ट मान लेते हैं. गैजेट आपसे ज़्यादा स्मार्ट नहीं है वो सिर्फ एक इंस्ट्रूमेंट है बस. कोई बता रहा था कि एवरेज 6 घंटे गैजेट पर बिताते हैं. जब मोबाइल पर टॉक टाइम होता था जो 20 मिनट लगता था. आज कल रील देखते हैं. अगर 6 घंटे स्क्रीन पर जाए तो गैजेट हमें गुलाम बना लेता है. इसलिए हमें सचेत रहना चाहिए, मेरे हाथ में कभी मोबाइल नहीं होता. मैं एक्टिव बहुत हूं फिर भी दूर रहता हूं. हमें कोशिश करनी चाहिए कि मैं गैजेट का गुलाम नहीं बनूं. उपयोगिता और आवश्यकता पर ज़रूरी है. आज हम अपनी क्षमता खो रहे हैं. अपने आपको टेस्ट करते रहें. हफ्ते में कुछ दिन तकनीक की फास्टिंग कर सकते हैं क्या.

डिजिटल फास्टिंग की ज़रूरत है

एक ही परिवार के लोग एक ही घर में मोबाइल पर रहते हैं जो बीमार बना रहा है. घर के अंदर एक कोना बना दीजिए. वहां नो तकनीक ज़ोन बनाने की ज़रूरत है. 

8. सवाल : निदा, जम्मू कश्मीर से सवाल, प्रशांत पलवल से सवाल

सवाल: परीक्षा परिणाम का तनाव कैसे कम करें? 

जवाब: परीक्षा परिणाम का एक सबसे बड़ी वजह है कि परीक्षा देकर वापस आते ही बोलेंगे की पेपर बहुत अच्छा हुआ है ऐसा माहौल   बनाते हैं. हमको सच बोलना चाहिए. आपके दिमाग में दोस्त भरे होते हैं, जिसके बारे में आप सोचते हैं और कम्पटीशन के भाव में जीते हैं. 
अपने भीतर के सामर्थ पर ज़ोर देना चाहिए. जिस दिन हम मानते हैं कि ये एग्जाम गया तो जीवन गया तो जान लीजिए जीवन कभी नहीं रुकता. एग्जाम एन्ड नहीं होता है. मन में तनाव नहीं रखना चाहिए.

9. सवाल: अवस्रा, हैदराबाद, रितिक भोपाल से 

अधिक भाषाएं कैसे सीख सकते हैं?

जवाब: भारत विविधताओं से भरा हुआ देश है भारत में कई भाषाएं हैं हमें इस समृद्धि पर गर्व होना चाहिए. विदेशी नमस्ते बोलते हैं जो कम्युनिकेशन की बड़ी ताकत है. अतरिक्त विधा का विकास करना चाहिए. भाषा सीखने की कोशिश करनी चाहिए. तमिल भाषा दुनिया की सबसे पुरानी भाषा है, इतनी बड़ी ताकत हमारे पास है, जब यूएन में मेरा भाषण था तब मैंने कुछ तमिल में बोला था ताकि दुनिया को पता चले. अपनी मात्र भाषा के साथ कुछ भाषाएं सीखनी चाहिए.

10. सवाल: टीचर का सवाल - क्लास को रुचिकर कैसे बनाया जाए?

जवाब: बच्चों को कक्षा में समय दीजिए, आज कल टीचर्स भी बहुत व्यस्त रहते हैं. मेरे समय मे तो टीचर बहुत डराते थे लेकिन आज ऐसा नहीं है. आज कल टीचर अपना प्रभाव बनाने के लिए सबसे कमज़ोर बच्चे को पकड़ते हैं. मैं होता टीचर तो सबसे तेज़ बच्चे से सवाल पूछता. कमज़ोर बच्चे को अलग से समय देने की ज़रूरत है और संवाद करने की ज़रूरत है. टीचर्स को डंडा लेकर डिसिप्लिन वाला रास्ता नहीं चुनना चाहिए.