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जयंती विशेष: कौन हैं भारत की पहली महिला शिक्षक सावित्रीबाई फुले ? जानें सबकुछ

फुले की शादी नौ साल की उम्र में ज्योतिबा से कर दी गई थी. उस समय वे अनपढ़ थीं, लेकिन उनके पति ने उन्हें घर पर ही पढ़ना-लिखना सिखाया. अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उसने दो शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अपना नाम दर्ज कराया.

News Nation Bureau | Edited By : Vijay Shankar | Updated on: 03 Jan 2022, 01:33:15 PM
Savitribai Phule

Savitribai Phule (Photo Credit: File Photo)

highlights

  • समाज सुधारक और नारीवादी सावित्रीबाई फुले की आज जयंती
  • फुले का जन्म 3 जनवरी, 1831 को महाराष्ट्र में हुआ था
  • महिलाओं के अधिकारों की हिमायत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका  

मुंबई:

समाज सुधारक और नारीवादी आइकन सावित्रीबाई फुले (Savitribai Phule ) की आज 3 जनवरी को जयंती है. फुले का जन्म 3 जनवरी, 1831 को महाराष्ट्र (Maharastra) में हुआ था और उन्हें भारत में महिलाओं के अधिकारों की हिमायत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए याद किया जाता है. सावित्रीबाई ने अपने पति ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर 1848 में पुणे (Pune) में भिड़े वाडा में भारत के पहले लड़कियों के स्कूलों में से एक की स्थापना की. इसके अलावा, सावित्रीबाई फुले ने ऐसे समय में शिक्षिका बनने वाली पहली भारतीय महिला बनकर पितृसत्ता की बेड़ियों को भी तोड़ा, जब लड़कियों को स्कूलों में जाने की अनुमति नहीं थी. उन्हें भारत की पहली महिला शिक्षिका भी माना जाता है. जैसा कि भारत सावित्रीबाई फुले की जयंती मना रहा है, यहां उनके बारे में कुछ तथ्य दिए गए हैं

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फुले की शादी नौ साल की उम्र में ज्योतिबा से कर दी गई थी. उस समय वे अनपढ़ थीं, लेकिन उनके पति ने उन्हें घर पर ही पढ़ना-लिखना सिखाया. अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उसने दो शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अपना नाम दर्ज कराया, एक अहमदाबाद में और दूसरा पुणे में. अपने प्रशिक्षण के बाद वह भारत की पहली महिला शिक्षिका और साथ ही पहली भारतीय प्रधानाध्यापिका बनीं.

पति के साथ मिलकर तीन स्कूलों की स्थापना की

सावित्रीबाई फुले ने बाद में अपने पति के साथ 1851 के अंत तक पुणे में लड़कियों के लिए तीन स्कूलों की स्थापना की. फुले ने बाद में एक महिला आश्रय गृह खोला, जिसे होम फॉर द प्रिवेंशन ऑफ इन्फेंटिसाइड कहा जाता है, जहां विधवाएं अपने बच्चों को जन्म दे सकती हैं और अगर चाहें तो उन्हें गोद लेने के लिए छोड़ सकती हैं. 
वह बाल विवाह के खिलाफ थी और सती प्रथा का कड़ा विरोध करती थी. फुले ने विधवाओं के लिए एक आश्रय गृह भी स्थापित किया. सावित्रीबाई ने विधवा पुनर्विवाह के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए भी अपनी आवाज का इस्तेमाल किया.

विरोध के बावजूद विभिन्न जातियों की लड़कियों को सिखाया

सावित्रीबाई फुले द्वारा स्थापित भिड़ा वाड़ा स्कूल में उन्होंने फातिमा बेगम शेख को काम पर रखा, जो ज्योतिबा की दोस्त उस्मान शेख की बहन थीं. फातिमा देश की पहली मुस्लिम महिला शिक्षिका बनीं. रूढ़िवादी विचारों के साथ स्थानीय समुदाय के प्रतिरोध का सामना करने के बावजूद सावित्रीबाई ने विभिन्न जातियों की लड़कियों और बच्चों को पढ़ाना जारी रखा. 10 मार्च, 1897 को एक 10 वर्षीय लड़के को बचाने की कोशिश में एक बीमारी होने के बाद उसकी मृत्यु हो गई. 

First Published : 03 Jan 2022, 01:22:38 PM

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