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चाणक्य नीति: जीवन में सफलता चाहिए तो इन बातों का रखें ध्यान

आप अपने जीवन में एक सफल व्यक्ति बनना चाहते है. सफलता के लिए आप सभी तरह की संभव कोशिशें और मेहनत भी करते हैं. लेकिन इसके बाद भी बहुत से लोगों को सफलता की ऊंचाईयां हासिल नहीं होती है.

News Nation Bureau | Edited By : Ravindra Singh | Updated on: 25 Feb 2021, 09:00:00 AM
chanakya niti

आचार्य चाणक्य (Photo Credit: फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

आप अपने जीवन में एक सफल व्यक्ति बनना चाहते है. सफलता के लिए आप सभी तरह की संभव कोशिशें और मेहनत भी करते हैं. लेकिन इसके बाद भी बहुत से लोगों को सफलता की ऊंचाईयां हासिल नहीं होती है. आज हम आपको चाणक्य नीति में ऐसे गुर बताएंगे जो कि आपको जीवन में सफल बनाने में कारगार साबित होगी. आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र की रचना की. आपको बता दें कि आचार्य चाणक्य एक कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ, प्रकांड अर्थशास्त्री थे.  उनकी बुद्धि अत्यंत कुशाग्र और तार्किक थी.  आचार्य चाणक्य ने बतया था कि आपको मूर्ख लोगों से कभी वाद-विवाद नहीं करना चाहिए, इससे आपका बहुमूल्य समय नष्ट होता है. जीवन में सफल होने के लिए समय का सही उपयोग करना आवश्यक होता है. इसके साथ ही आचार्य चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को मूर्खों से प्रशंसा सुनने से अच्छा है कि बुद्धिमान व्यक्ति की डांट सुन ली जाए.

चाणक्य का मानना था कि व्यक्ति को सफल होने के लिए बहुत अधिक विशेष गुणों की आवश्यकता नहीं होती है. व्यक्ति कभी कभी एक गुण से ही सफलता प्राप्त कर सकता है. चाणक्य नीति के मुताबिक, एक श्रेष्ठ गुण ही व्यक्ति को सफलता की ऊंचाईयों पर पहुंचा सकता है.

एकेन शुष्कवृक्षेण दह्ममानेन वहिृना.
दह्मते तद्वनं सर्वं कुपुत्रेण कुलं यथा.

चाणक्य नीति के इस श्लोक का भाव ये है कि जिस प्रकार से जंगल में सूखे वृक्ष में आग लगने से संपूर्ण वन जलकर खाक हो जाता है, इसी प्रकार कुपुत्र पैदा होने पर पूरा कुल नष्ट हो जाता है और अपयश की प्राप्ति होती है. चाणक्य की इन दोनों ही बातों का अर्थ ये भी है कि गुण से युक्त व्यक्ति सम्मान पाता है और अवगुण धारण करने वाला व्यक्ति अपयश दिलाने का कार्य करता है इसलिए सदैव गुणवान बनाना चाहिए.

एकेनापि सुवर्ण पुष्पितेन सुगंधिना.
वसितं तद्वनं सर्वं सुपुत्रेण कुलं यथा.

चाणक्य के इस श्लोक का अर्थ है कि गुणवान व्यक्ति अपने एक गुण से ही सभी के बीच अपना प्रभाव छोड़ने में सफल रहता है. वह एक गुण की उसकी संपूर्ण पहचान बन जाता है. चाणक्य कहते हैं कि जिस तरह से संपूर्ण वन में सुंदर फूलों वाला एक पौधा ही अपनी सुगंध से पूरे वन को सुंगधित कर सकता है. ठीक उसी तरह से एक सुपुत्र ही पूरे कुल का नाम रोशन करने के लिए काफी होता है.

चाणक्य के अनुसार जिन व्यक्तियों में रचनात्मकता होती है, वे हर कार्य को चुनौती मान कर करते हैं. ऐसे लोग नकारत्मक नहीं होते हैं बल्कि हर कार्य को लेकर इनका दृष्टिकोण सकारात्मक होता है. ऐसे लोग समस्या नहीं बल्कि समस्याओं का हल बताने पर अधिक यकींन करते हैं.

चाणक्य के मुताबिक, अगर मनुष्य को जीवन में सफलता प्राप्त करनी है तो हमेशा हारे हुए की सलाह ध्यान से सुननी चाहिए, क्योंकि हारे हुए व्यक्ति को जो अनुभव होता है, वह उसके अनुसार आपको सही सलाह देता है. जिससे आप उसकी गलतियों से सबक लेकर आगे बढ़ सकते हैं और जीवन में सफल हो सकते हैं.

सफलता की कुंजी है सिर्फ मेहनत
आचार्य चाणक्य ने बताया है कि जो व्यक्ति कठिन परिश्रम करने से नहीं घबराता है, वह अपने जीवन में सफलता अवश्य हासिल करता है. किसी भी व्यक्ति को अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करके परिश्रम करना चाहिए. इससे उसे सफलता अवश्य हासिल होती है और वो अपने जीवन में सफलता को प्राप्त करता है.

 

First Published : 25 Feb 2021, 09:00:00 AM

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