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ऐसे तैयार होते हैं भारत के सीमा प्रहरी अग्निवीर

तन जला देने वाली जैसलमेर की गर्मियों, शेरों के बीच सुंदरबन से लेकर दलदल कच्छ गुजरात तक ड्यूटी करनी होती है. ऊंचाई से कूदना हो घने कोहरे को दिखाने वाले धुएं से निकलना हो इसके लिए बॉडी और माइंड दोनों को बैलेंस करके रखा जाता है.

Rahul Dabas | Edited By : Shivani Kotnala | Updated on: 21 Jul 2022, 10:57:56 PM
Soldiers Training

Soldiers Training (Photo Credit: Social Media)

नई दिल्ली:  

कमांडो ऑब्सटेकल ट्रेनिंग सबसे महत्वपूर्ण 
कमांडो ऑब्सटेकल ट्रेनिंग एक नए नवेले रिक्यूट को बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स का कमांडो बनाने में सबसे महत्वपूर्ण है. उसे माओवादी क्षेत्र के जंगलों से लेकर आतंकवाद से निपटने के लिए कश्मीर घाटी तक, तन जला देने वाली जैसलमेर की गर्मियों, शेरों के बीच सुंदरबन से लेकर दलदल कच्छ गुजरात तक ड्यूटी करनी होती है. ऊंचाई से कूदना हो घने कोहरे को दिखाने वाले धुएं से निकलना हो, रस्सी के सहारे एक दीवार से दूसरी दीवार तक दौड़ना हो, इसके लिए बॉडी और माइंड दोनों को बैलेंस करके रखा जाता है. इन सभी 22 मुश्किलों को 8 मिनट के समय में पार करने वाला ही बीएसएफ का कमांडो कहलाता है.

अतिंम धावा: सीमा प्रहरीयों का प्रहार

बीएसएफ के जवान हमेशा सीमा पर तैनात रहते हैं, जहां कुछ कदम की दूरी पर दुश्मन देश के सिपाही हैं. कई बार दूरी इतनी कम हो जाती है की बंदूकों की गोलियों की जगह, गन की बट और खुखरी का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसी स्थिति में दुश्मन को देखकर आंखों में खून उतर आना लाजमी है. उस परिस्थिति में मानवता दया और इंसानियत को देशभक्ति की दहलीज पर बलिदान कर देना जरूरी है. इस सिखलाई का इस ट्रेनिंग का सबसे महत्वपूर्ण रोल यही है कि जब आपको अपने दुश्मन के सीने पर अंतिम प्रहार करना पड़े तो एक ही प्रहार जानलेवा होना चाहिए. जिसमें दया-करूणा की कोई जगह नहीं, यही हौंसला यही जोश इनकी आवाज में नजर आता है और यही जज्बा इनकी आंखों में नजर आता है.

लॉन्ग रेंज पेपर ट्रेनिंग

दुश्मन हर बार असाल्ट राइफल और स्नाइपर की रेंज में हो यह जरूरी नहीं, कई बार युद्ध की स्थिति में नापाक पाकिस्तान को परास्त करने के लिए कई किलोमीटर दूर उनके मचान पर खड़े सिपाही को पूरी ऐकोरेसी के साथ निशाना बनाना जरूरी हो जाता है. ऐसी स्थिति में अत्याधुनिक हथियार काम आते हैं. इनमें से एक हथियार long-range 30mm मल्टी ग्रेनेड लॉन्चर होता है. इसके जरिए कई किलोमीटर दूर तक गोले दागे जा सकते हैं, यह आर्टिलरी गन नहीं होती लेकिन उस से कमतर भी नहीं होती.


दूसरा हथियार एंटी मेटेरियल गन होती है. इसमें कई कैलिबर की गोलियों का अलग-अलग समय में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसकी खास बात यह है कि अगर दुश्मन बंकर में बैठ कर खुद को महफूज समझ रहा है और आड़ लेकर गोलाबारी कर रहा है तो छोटे से सुराग से भी हाई कैलीबर बुलेट बंकर के अंदर दागी जा सकती है ,जिसके बाद उसके अंदर विस्फोट होगा और पूरा बंकर अंदर से ही तबाह हो जाएगा.


मार्च से अनुशासन

सीमा प्रहरी बनने की पहली शर्त अनुशासन और केवल अनुशासन है. अनुशासन के लिए मार्च को जरूरी माना जाता है.सब एक साथ कदमताल करेंचाहे वह शांति का क्षेत्र हो, सीमा के ग्रश्त या युद्ध का मैदान अनुशासन होना चाहिए. इसके साथ ही उनके अंदर जोश भी भरा जाता है. जिससे पूरी पलटन में परिवार वाली भावना आ सके और एक दूसरे साथी के लिए जान की बाजी लगा सकें.


सर्किट ट्रेनिंग, योगाभ्यास

यह गोल चक्कर एक सर्किट की तरह है, जहां लगभग 18 तरह की एक्सरसाइज जाती हैं. कुछ बाजू बल के लिए जरूरी है, कुछ पैरों को ताकत देते हैं. किसी एक्सरसाइज से मनोबल मजबूत होता है, तो किसी से शरीर के अंदर कष्ट सहने की शक्ति में बढ़ोतरी होती है. इसके साथ ही योग के जरिए आत्मबल में प्रवीण होने की ट्रेनिंग बीएसएफ की अग्निवीरों को दी जाती है.

First Published : 21 Jul 2022, 10:57:56 PM

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