ब्रश करते समय फटी गले की नस, फिर कैसे गाय के दिल की झिल्ली से डॉक्टरों ने युवक की बचाई जान?

रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में डॉक्टरों ने एक अत्यंत दुर्लभ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है. भनपुरी के एक व्यक्ति की ब्रश करते समय गले की मुख्य धमनी (कैरोटिड आर्टरी) फट गई थी. डॉक्टरों ने गाय के दिल की झिल्ली का उपयोग करके उसकी जान बचाई. यह दुनिया का केवल 10वां ऐसा मामला है.

रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में डॉक्टरों ने एक अत्यंत दुर्लभ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है. भनपुरी के एक व्यक्ति की ब्रश करते समय गले की मुख्य धमनी (कैरोटिड आर्टरी) फट गई थी. डॉक्टरों ने गाय के दिल की झिल्ली का उपयोग करके उसकी जान बचाई. यह दुनिया का केवल 10वां ऐसा मामला है.

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Ravi Prashant
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Carotid Artery Injury

कैरोटिड धमनी की चोट Photograph: (GROK AI IMage)

रायपुर के भनपुरी इलाके में रहने वाले एक व्यक्ति के साथ सुबह ब्रश करते समय एक ऐसा हादसा हुआ, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी. ब्रश करते समय अचानक असंतुलन या किसी झटके की वजह से उसके गले की मुख्य धमनी, जिसे मेडिकल भाषा में कैरोटिड आर्टरी कहा जाता है, वह अंदर से फट गई. खून का बहाव इतना तेज था कि युवक की हालत कुछ ही मिनटों में गंभीर हो गई. आनन-फानन में उसे रायपुर के डॉक्टर भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) ले जाया गया.

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वहां डॉक्टरों ने जब जांच की, तो पता चला कि मामला बहुत ही पेचीदा और जानलेवा है. युवक की जान बचाने के लिए डॉक्टरों के पास बहुत कम समय था.

गाय के दिल की झिल्ली का अनोखा इस्तेमाल

डॉक्टरों ने इस चुनौती को स्वीकार किया और ऑपरेशन के दौरान 'बोवाइन पेरिकार्डियम' तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला किया. बोवाइन पेरिकार्डियम दरअसल गाय के दिल के चारों ओर की एक प्राकृतिक झिल्ली होती है. इसे विशेष रूप से संसाधित करके इंसानी शरीर में उपयोग के योग्य बनाया जाता है. इस सर्जरी में फटी हुई कैरोटिड आर्टरी की मरम्मत के लिए इसी झिल्ली का एक पैच बनाकर लगाया गया. यह झिल्ली इंसानी शरीर के ऊतकों के साथ बहुत अच्छी तरह से घुलमिल जाती है और इसमें संक्रमण का खतरा भी बहुत कम होता है. इसकी मजबूती और लचीलापन इसे हृदय और धमनियों की सर्जरी के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनाता है.

दुनिया का 10वां सबसे दुर्लभ मामला

चिकित्सा जगत के आंकड़ों के अनुसार, ब्रश करने जैसी सामान्य प्रक्रिया के दौरान गले की कैरोटिड आर्टरी का फटना और फिर गाय की झिल्ली से उसे ठीक करना, दुनिया भर में अब तक दर्ज केवल 10वां मामला है. मेकाहारा के डॉक्टरों की इस सफलता ने छत्तीसगढ़ और भारत का नाम वैश्विक चिकित्सा मानचित्र पर ऊंचा कर दिया है.

डॉक्टरों ने बताया कि अगर समय पर सर्जरी नहीं की जाती, तो दिमाग तक खून की सप्लाई रुकने से मरीज को लकवा मार सकता था या उसकी तत्काल मृत्यु भी हो सकती थी. इस सफल ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत अब स्थिर है और वह तेजी से रिकवरी कर रहा है.

क्यों जानलेवा होती है कैरोटिड आर्टरी की चोट

हमारे गले के दोनों तरफ कैरोटिड धमनियां होती हैं, जो सीधे हमारे दिमाग को ऑक्सीजन युक्त खून पहुंचाने का काम करती हैं. यह शरीर की सबसे महत्वपूर्ण नसों में से एक मानी जाती है. अगर इसमें कोई गहरी चोट आती है या यह फट जाती है, तो खून का दबाव इतना अधिक होता है कि उसे रोकना मुश्किल हो जाता है.

ऐसी स्थिति में इंसान के पास बचने के लिए बहुत ही कम समय होता है. रायपुर के इस मामले में भी युवक की गर्दन के अंदरूनी हिस्से में गंभीर चोट आई थी, जिससे भारी रक्तस्राव हो रहा था. डॉक्टरों की टीम ने अपनी सूझबूझ से इस जटिल हिस्से की मरम्मत कर खून के बहाव को नियंत्रित किया.

ब्रश करते समय इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

अक्सर लोग ब्रश करते समय मसूड़ों से होने वाले खून या मामूली दर्द को सामान्य समझकर टाल देते हैं. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ब्रश करते समय गले में अचानक तेज दर्द हो, लगातार खून निकले या निगलने में तकलीफ महसूस हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.

कई बार ब्रश का कठोर हिस्सा या अचानक लगा झटका गले के नाजुक ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकता है. रायपुर की यह घटना हमें सिखाती है कि शरीर के प्रति छोटी सी लापरवाही भी कितनी बड़ी मुसीबत बन सकती है. स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना और किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना ही जीवन की सुरक्षा का एकमात्र तरीका है.

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